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Snehal Rai: 'एक बच्चे को खोना सौ मौतों के बराबर है', चार महीने के बेटे के निधन को यादकर छलका स्नेहल का दर्द

Fri, 02 Jun 2023 02:47 PM IST
दीक्षा पाठक एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: दीक्षा पाठक Updated Fri, 02 Jun 2023 02:47 PM IST
सार

स्नेहल राय शादी के फौरन बाद बेटे की मां बन गई थीं। एक्ट्रेस का बेटा जब चार महीने का था तब उसकी बीमारी की वजह से मौत हो गई थीं। अब काफी साल के बाद स्नेहल ने अपने बच्चे को लेकर शॉकिंग खुलासा किया है।

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Snehal Rai heartbreaking revelation of losing her four month old son to an illness see actress reaction
स्नेहल राय - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

 
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टीवी की जानी मानी अभिनेत्री स्नेहल राय ने ‘इश्क का रंग सफेद’ जैसे शोज से लेकप्रियता हासिल की है। अब अभिनेत्री ने टीवी की दुनिया से दूरी बना ली है और अपनी निजी जिंदगी में बिजी हो गई हैं। स्नेहल राय शादी के फौरन बाद बेटे की मां बन गई थीं। एक्ट्रेस का बेटा जब चार महीने का था तब उसकी बीमारी की वजह से मौत हो गई थीं। अब काफी साल के बाद स्नेहल ने अपने बच्चे को लेकर शॉकिंग खुलासा किया है।

 

स्नेहल ने निजी जिंदगी को लेकर किए खुलासे
स्नेहल ने अपने हालिया इंटरव्यू में एक दिल दहला देने वाला खुलासा किया है। इस खुलासे में अभिनेत्री ने अपने चार महीने के बच्चे को खोने का दर्द बयां किया है। शादी के तुरंत बाद अभिनेत्री एक बच्चे की मां बनी थीं और बेहद खुश थीं, लेकिन लंबी बीमारी के चलते उन्होंने अपने बच्चे को खो दिया था। अभिनेत्री ने कहा, शादी के बाद मेरा एक बेटा हुआ था जब वह चार महीने का था तब हमने उसे एक बीमारी के कारण खो दिया था। उसका नाम रुद्र था।

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बच्चे की मौत ने बुरी तरह किया प्रभावित
स्नेहल ने आगे कहा, ‘मैं एक एनजीओ  रुद्रकल्प क्रिएशंस खोलने की प्रक्रिया में हूं। यह मैंने अपने बच्चे के लिए किया है। वह जहां भी हो भगवान उसकी आत्मा को शांति दे। यह सब मेरे बच्चे के लिए था। वह जहां भी हैं, वह एक खूबसूरत जगह है। इसके बाद जिंदगी के प्रति मेरा नजरिया बदल गया।  मैंने अपना बच्चा खोया, लेकिन कितने बच्चे ऐसे हैं, जिनकी मां नहीं है। तो या तो मैं इसका शोक मनाऊं या उन बच्चों की मां बन जाऊं।. मैंने दूसरा चुना। मैं इस मुस्कान को उन बच्चों को बांटना चाहती हूं। मैं उन महिलाओं की मदद करना चाहती हूं, जो मेरी और मेरी मां की तरह घरेलू हिंसा का शिकार हुई हैं।’


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इस घटना ने दी जीने की नई वजह
अपने चार महीने के बच्चे को खोने के दर्द को बयां करते हुए स्नेहल ने कहा, ‘एक बच्चे को खोना सौ मौतों के बराबर है। मैं एक हफ्ते के लिए कमरे में बंद हो गई थीं। मैं बस वॉशरूम जाती और अपने बिस्तर पर बैठ जाती। मुझे खाना याद नहीं है।  एक बार मैं एक अनाथालय में गई और एक बच्चे ने मुझे गले से लगा लिया और मुझे 'आई'  बुलाया। उसने मुझे लाइफ में वापस आने के लिए किक दी थी।’




 
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