Parvati Nair: पार्वती नायर ने PETA के साथ मिलकर केरल के मंदिर में दान किया यांत्रिक हाथी, 800 किलो है वजन
Parvati Nair: अभिनेत्री पार्वती नायर ने पेटा इंडिया के साथ मिलकर केरल के एक मंदिर को विशालकाय यांत्रिक हाथी गिफ्ट किया है। अब धार्मिक रस्में तकनीक के सहारे बने इसी हाथी के जरिए पूरी होंगी।
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मंदिरों में कई धार्मिक रस्में करने के लिए गजानन महाराज की जरूरत होती है। मगर, इस दौरान कई बार हाथी उग्र रूप रख लेते हैं, जिसकी वजह से अप्रिय घटना घटने की आशंका होती है। इस किस्म की घटनाओं की फिक्र के बिना भी अब मंदिर में धार्मिक कारज संपन्न हो सकेंगे। तकनीक की मदद से ऐसा संभव हुआ है। वास्तविक हाथी की जगह यांत्रिक हाथी इन धार्मिक रस्मों में शामिल रहेगा। और यह यांत्रिक हाथी अभिनेत्री पार्वती नायर ने पेटा इंडिया के साथ मिलकर केरल के एक मंदिर को दान दिया है।
350 साल पुराने मंदिर को दिया उपहार
न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, मंदिर के उत्सवों में हाथियों के उग्र होने की बढ़ती खबरों के बीच, पेटा इंडिया ने अभिनेत्री पार्वती नायर के साथ मिलकर तिरुवनंतपुरम के पास स्थि पेरुमकादविला में 350 साल पुराने श्री बलभद्रकाली क्षेत्रम को एक विशालकाय यांत्रिक हाथी उपहार में दिया है। इस हाथी का वजन करीब 800 किलोग्राम है। इसका नाम देवी दासन है।
.@paro_nair explains why temples must embrace cruelty-free innovations like Devi Dasan for a kinder future. 🌱@Action4ElliesUK #MechanicalElephant #RoboticDeviDasan #PETAIndia pic.twitter.com/agH7i69hrY
— PETA India (@PetaIndia) March 8, 2025
मंदिर के फैसले का किया सम्मान
पीपुल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (पेटा) इंडिया ने शनिवार को एक बयान में कहा, 'तीन मीटर लंबा, 800 किलोग्राम वजनी यांत्रिक हाथी देवी दासन शुक्रवार शाम को मंदिर को दान कर दिया गया। यह हाथी मंदिर के उस निर्णय के सम्मान में है, जिसमें उसने कभी भी जीवित हाथी को रखने या किराये पर नहीं लेने का फैसला किया है।
पार्वती नायर ने जताई खुशी
पार्वती नायर का कहना है, 'तकनीक ने धार्मिक रस्मों को बिना किसी की जान को जोखिम में डाले सुविधाजनक तरीके से संपन्न करने की सुविधा दी है। इस पहल का हिस्सा बनकर मैं बेहद खुश हूं'। मालूम हो कि यह पहल एक्शन फॉर एलीफेंट्स (एएफई) यूके द्वारा प्रायोजित और पेटा इंडिया द्वारा सुगम बनाई गई। पेटा ने कहा, 'देवी दासन का इस्तेमाल मंदिर में सुरक्षित और क्रूरता-मुक्त तरीके से समारोह आयोजित करने के लिए किया जाएगा, जिससे वास्तविक हाथी आजादी के साथ जंगल में अपने परिवार के साथ रह सकेंगे'।