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Hindi News ›   Entertainment ›   Netaji Subhas Chandra Bose Jayanti Special Interview with Bose fame actor sachin khedekar

सालभर की तैयारी और 40 किताबें पढ़ने के बाद सचिन खेडेकर ने निभाया नेताजी का किरदार; बोले- ‘यह एक तपस्या थी’

Fri, 23 Jan 2026 06:00 AM IST
Kiran Jain किरण जैन
Updated Fri, 23 Jan 2026 06:00 AM IST
सार

Netaji Subhas Chandra Bose Jayanti: शुक्रवार 23 जनवरी को देशभर में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी वीर सुभाष चंद्र बोस की 129वीं जयंती मनाई जा रही है। इस खास मौके पर अमर उजाला ने फिल्म 'बोस' में नेताजी का किरदार निभाने वाले अभिनेता सचिन खेडेकर से खास बातचीत की।

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Netaji Subhas Chandra Bose Jayanti Special Interview with Bose fame actor sachin khedekar
सचिन खेडेकर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

2004 में श्याम बेनेगल की फिल्म ‘नेताजी सुभाष चंद्र बोस: द फॉरगॉटन हीरो’ रिलीज हुई थी। यही वो फिल्म थी जिसमें सचिन खेडेकर ने नेताजी की भूमिका निभाई थी। आज 22 साल बाद भी सचिन उस किरदार की गूंज, उसकी जिम्मेदारी और उसका असर अपने भीतर महसूस करते हैं। पढ़िए इस यादगार किरदार को निभाने के पीछे की कहानी अभिनेता सचिन की जुबानी…

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यह किरदार नहीं, ऐतिहासिक वादा था 
‘22 साल बाद भी आज जब मैं उस किरदार को याद करता हूं तो एक अजीब-सी सिहरन होती है। नेताजी का किरदार निभाना मेरे लिए सिर्फ अभिनय करने का मौका नहीं था बल्कि यह एक ऐतिहासिक वादा था कि मैं उनकी महान शख्सियत के साथ न्याय कर सकूं।
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हर सीन करते वक्त दिल में एक डर रहता था कि कहीं उनकी विशालता, उनकी सोच, उनकी आग- मेरे अभिनय से कम न हो जाए। यह किरदार मुझे आज भी याद दिलाता है कि अभिनय केवल मनोरंजन नहीं, कभी-कभी एक कर्तव्य भी होता है।’

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Netaji Subhas Chandra Bose Jayanti Special Interview with Bose fame actor sachin khedekar
फिल्म 'बोस' के एक सीन में सचिन खेडेकर - फोटो : X

बेनेगल सर की दी हुईं 40 से ज्यादा किताबें पढ़ीं
‘यह किरदार इतना पवित्र है कि उससे जोड़ा जाना ही मेरे लिए सम्मान की बात है। मुझे याद है, श्याम बेनेगल सर ने कहा था कि मेरी शक्ल-सूरत में थोड़ा बहुत नेताजी जैसा भाव दिखता है और शायद इसी वजह से मुझे यह भूमिका मिली। 
इस किरदार की तैयारी में मैंने लगभग एक साल लगाया। इस दौरान बेनेगल सर ने मुझे नेताजी को समझने के लिए 40 से ज्यादा किताबें पढ़ने के लिए दी थीं। शूटिंग भी करीब एक साल चली और हर दिन मुझे लगता था कि मैं किसी साधारण फिल्म का हिस्सा नहीं, बल्कि एक विरासत को जी रहा हूं।
जब आज भी कोई कहता है कि सचिन, उस फिल्म में सचमुच नेताजी दिखे… तो वह मेरे करियर के किसी भी अवॉर्ड से बड़ा है। यह एहसास होता है कि शायद मैंने थोड़ी देर के लिए ही सही, लेकिन एक महान आत्मा को छू लिया था।

Netaji Subhas Chandra Bose Jayanti Special Interview with Bose fame actor sachin khedekar
शूटिंग के दौरान जिसू सेनगुप्ता, सचिन खेडेकर और दिव्या दत्ता से चर्चा करते निर्देशक श्याम बेनेगल - फोटो : X

गुरुकुल में दाखिला लेने जैसा था 
‘मैंने थिएटर में सुन रखा था कि जर्मन अभिनेताओं की हर हरकत का एक कारण होता है। लेकिन जब मैं उनके साथ बर्लिन में सेट पर खड़ा था, तब समझ आया कि उनकी तैयारी कितनी खतरनाक स्तर की होती है। उनके साथ बैठकर बातचीत करना, उनकी रिहर्सल देखना.. वह मेरे करियर का सबसे बड़ा सबक था।
ऐसा लगा जैसे मैं अचानक किसी अंतरराष्ट्रीय गुरुकुल में पहुंच गया हूं जहां अभिनय की भाषा शब्दों से नहीं, शारीरिक अनुशासन से लिखी जाती है।’

Netaji Subhas Chandra Bose Jayanti Special Interview with Bose fame actor sachin khedekar
फिल्म के एक सीन में सोनू सूद और नरेंद्र झा - फोटो : X

आज उनकी चुप्पियों को और खतरनाक बना दूं 
‘आज अगर फिर से नेताजी का किरदार निभाने का मौका मिले, तो मैं उनकी चुप्पी पर ज्यादा काम करूंगा। वह बोले बिना भी पूरी भीड़ को हिला सकते थे। मैं उनके भीतर के स्ट्रगल, उनकी दुविधाएं और देश के भविष्य के लिए उनकी बेचैनी को और गहराई से पकड़ना चाहूंगा। नेताजी जब चुप होते थे, तब भी उनके भीतर तूफान चलता था, मैं आज उस तूफान को ज्यादा साफ दिखाता।’

आज की ऑडियंस भी नेताजी को देखकर रुकेगी  
‘हमारी आज की ऑडियंस तेज, डिजिटल और टेक्निकली बहुत अवेयर है। लेकिन अगर कहानी में ईमानदारी हो, तो वह किसी भी पीढ़ी को पकड़ लेती है। नेताजी की कहानी सिर्फ इतिहास नहीं। यह जुनून, निडरता और बगावत की कहानी है और यह तीनों चीजें आज की पीढ़ी को सबसे ज्यादा आकर्षित करती हैं।’

Netaji Subhas Chandra Bose Jayanti Special Interview with Bose fame actor sachin khedekar
फिल्म 'बोस' के एक सीन में सचिन खेडेकर - फोटो : X
हमारे राष्ट्रनायकों पर और फिल्में बननी चाहिए 
‘नेताजी एक रेबल थे... एक ऐसा नेता जो सिस्टम से सवाल पूछता था और समझौता नहीं करता था। हमारे युवा ही अगर अपने नायकों को नहीं जानेंगे तो आजादी के 75 साल मनाने का मतलब ही क्या रह जाएगा? 
मैं पूरी दृढ़ता से मानता हूं कि नेताजी, भगत सिंह, सरदार पटेल, अंबेडकर... इन सब पर और फिल्में बननी चाहिए।
आजादी के 75 साल पूरे हुए हैं, लेकिन हमारी युवा पीढ़ी अभी भी अपने असली नायकों से पूरी तरह परिचित नहीं है। यह सिर्फ इतिहास की जरूरत नहीं... यह राष्ट्र की जरूरत है।’

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