'अजब गजब लव' में कुछ भी गजब नहीं

रोहित मिश्र Updated Fri, 26 Oct 2012 02:36 PM IST
vasu directs film for son not public
वाशु भगनानी पहले भी पुत्र मोह में घटिया और फ्लाप फिल्‍में बना चुके हैं। इस बार हैरत उनको लेकर नहीं बल्कि फिल्म के निर्देशक को लेकर है। हैरानी है कि 'मेरे यार की शादी है', 'धूम' और 'धूम 2' जैसी मनोरंजक फिल्में बनाने वाले संजय गढ़वी ने इस फिल्म का निर्देशक बनना क्यों स्वीकारा। फिल्म की कहानी बेहद घिसी-पिटी है। पहले दस मिनट में ही साफ हो जाता है कि फिल्म का इंटरवल कहां होगा, क्लाइमेक्स में क्या ड्रामा होगा और हैप्पी एंड कैसे कराया जाएगा।

जैकी भगनानी अगर अपने पिता की ओर से तोहफे में बनाई गईं तीनों फिल्में देखें तो उन्हें समझ में आ जाएगा कि वह तीनों ही फिल्मों में एक जैसा ही बोलते हैं, एक्टिंग करते, कपड़े पहनते और गाते हैं। कुल मिलाकर फिल्‍म निर्माण का लंबा तर्जुबा रखने वाले वाशु को अपने लाडले के लिए एक अदद कहानी भी नहीं मिल पा रही है।

कहानी
फिल्म की कहानी रणवीर (जैकी भगनानी) के इर्द-गिर्द घूमती है। वह एक अमीर बाप का बेटा है पर उसे ऐसी लड़की मैडी (निधि सुभइया) से प्यार होता है जिसे अमीरों से नफरत है। वह भोपाल में रह रहे अपने दो भाईयों से इसलिए दूर रहती है क्योंकि वह अमीर हैं।

रणवीर मैडी को पाने के लिए गरीब बनने का नाटक करता है। जब मैडी उसके परिवार से मिलने आती है तो पूरा परिवार मुंबई की झुग्गी में जाकर रहने लगता है। हर संडे यह ड्रामा दोहराया जाता है। रणवीर के बिजनेस मैन पिता इस ड्रामे के लिए केले बेचते हैं और मां कपड़े सिलती हैं।

इस कहानी में मोड़ तब आता है जब मैडी के जुड़वा हमशक्‍ल भाई करन-अर्जुन राठौर (अर्जुन रामपाल) उस गरीब परिवार से मिलने के लिए मुंबई आ जाते हैं। कुछ ड्रामे के बाद सब कुछ खुल जाता है। दोनों पक्षों को गलतियों का एहसास होता है और फिल्म की हैप्पी एंडिंग हो जाती है।

अभिनय
अपनी तीनों ही फिल्‍मों 'कल किसने देखा', 'फालतू' और 'अजब गजब लव' में जैकी भगनानी ने एक जैसी ऐक्टिंग की है। वह एक ही तरह से भावुक होते हैं और एक तरह से खुश। गाने के डांस स्टेप भी लगभग हर फिल्म में वैसे ही होते हैं। बहरहाल इस फिल्म में जैकी के लिए निर्देशक ने जो भूमिका गढ़ी थी उसके लिए उन्होंने ठीक-ठाक ऐक्टिंग कर ली है।

फिल्म की नायिका निधि सुभइया कई कन्‍नड़ फिल्में कर चुकी हैं इसलिए वह वैसी ओवरऐक्टिंग करती नहीं दिखती जैसी कि ऐसी फिल्मों की नायिकाएं आमतौर पर करती हैं। मां और पिता की भूमिका में किरण खेर और दर्शन जरीवाला बेहतर लगे हैं। विशेष भूमिका में अर्जुन रामपाल भी प्रभावित करते हैं। अशरद वारसी ने शायद दोस्ती निभाई है।

निर्देशन
बहुत घिसा-पिटा विषय और कच्चे कलाकारों के बावजूद यदि फिल्म इंटरवल के बाद थोड़ी ठीक-ठाक लगती है जो उसकी वजह संजय गढ़वी ही रहे हैं। कुछ कॉमेडी दृश्य इस फिल्म में उन्होंने क्रिएट किए हैं।

इसके अलावा यहां-वहां कुछ संवाद भी चुटीले बन पड़े हैं। संजय वहां-वहां कमजोर होते हैं जहां दर्शक लीक से कुछ अलग हटकर देखना चाहते हैं। किरण खेर की चरित्र में जितनी मेहनत की गई है यदि उतनी मेहतन कहानी में होती तो इन किरदारों से ठोक-पीटकर ऐक्टिंग कराई जा सकती थी।

संगीत
फिल्‍म में जहां-जहां ना‌यक ने सपने देखे हैं वहां-वहां गाने हैं। कुछ गाने नायिकाओं के सपने पर भी हैं। सभी गानों की खासियत यह है कि वह समुद्र या किसी नदी के आसपास ही गाए गए हैं। एक भी गाना न तो कानों को भाता है और न ही दिल को। साजिद-वाजि‌द खुद अपनी इस फिल्म को याद नहीं रखना चाहेंगे।

फिल्म के सितारे
'अजब गजब लव' से वासु भगनानी अपने बेटे जैकी भगनानी को प्रमोट करना चाहते हैं। जैकी का काम लोगों को पसंद आ सकता है और इस फिल्म से उनके करियर को एक नयी दिशा मिल सकती है। यह साल जैकी भगनानी के लिए खास है। जीवन की दिशा निर्धारित करने में यह फिल्म इनके लिए सहायक होगी। जहां तक बॉक्स ऑफिस कलेक्शन की बात करें तो ग्रहों की स्थिति ऐसी नहीं है कि बासु खुशी मनाएं। थोड़े से ही इन्हें संतोष करना पड़ेगा।

क्यों देखें
यदि आप जैकी भगनानी के वैसे ही समर्थक हैं जैसे कि उनके पिता वासु भगनानी। साथ ही यह देखने के लिए भी फिल्म देखी जा सकती है कि संजय गढ़वी इन दिनों कैसी फिल्में बना रहे हैं।

क्यों न देखें
‌पिछले और इस हफ्ते मिलाकर तीन चार फिल्में आपके पास बड़ा विकल्प हैं। पहले उन्हें आजमा लें।

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