Shiksha Mandal Review: व्यापम स्कैम पर एक और घिसी पिटी सीरीज, गौहर और गुलशन की मेहनत भी काम नहीं आई
एमएक्स प्लेयर की वेब सीरीज ‘शिक्षा मंडल’ भी बासी कढ़ी के नए उबाल की तरह है। फिल्म ‘सेटर्स’ में शिक्षा माफिया बन चुके पवन राज मल्होत्रा फिर अपने उसी तेवर के साथ यहां भी मौजूद हैं।
विस्तार
तीन साल पहले निर्देशक अश्विनी चौधरी की फिल्म ’सेटर्स’ जब रिलीज हुई थी तो किसी को अंदाजा भी नहीं रहा होगा कि ये फिल्म इसी कहानी पर एक के बाद एक वेब सीरीज की लाइन लगा देगी। सौमिक सेन ने भी इसके पहले ‘चीट इंडिया’ नामक एक फिल्म इसी गोरखधंधे पर बनाई थी। मध्य प्रदेश के व्यावसायिक परीक्षा मंडल यानी व्यापम में बीती सदी में लगी दीमक का जो भंडाफोड़ साल 2013 में हुआ, उसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी तरफ खींचा। विश्वगुरु बनने की राह पर अग्रसर देश की शिक्षा व्यवस्था की जड़ों को खोखला कर रहे शिक्षा माफिया की इन्हीं चालों को अब तक कई वेब सीरीज मे दिखाया जा चुका है। सोनी लिव के पास ‘व्हिसलब्लोअर’ है। ईरॉस के पास ‘हलाहल’ है। तो फिर एमएक्स प्लेयर ही पीछे क्यों रहता, उसके पास अब वेब सीरीज ‘शिक्षा मंडल’ है।
एक जैसी कहानियों की भेड़चाल
मुंबई में बनने वाली वेब सीरीज भी हिंदी सिनेमा की तरह भेड़चाल का शिकार हो चली हैं। एक ओटीटी पर ‘मिर्जापुर’ हिट होता है तो दूसरा ओटीटी ‘रंगबाज’ ले आता है। किसी की ‘कोटा फैक्ट्री’ खुलती है तो दूसरा ‘क्रैश कोर्स’ ले आता है। कोई कोई ओटीटी तो अपने ही प्लेटफॉर्म पर ‘डार्लिंग्स’ और ‘मोनिका ओ माय डार्लिंग’ एक के बाद एक बना रहे हैं। रेफरेंस के भरोसे चलने वाले हिंदी फिल्म जगत में असल कहानी की समझ रखने वाले लोग भी कम हैं और असल कहानियों को बनाने की हिम्मत करने वाले लोग तो खैर ओटीटी में कब आएंगे, राम जाने। ओटीटी भी किसी व्यापम से कम नहीं है इन दिनों। व्यापम देश के दिल कहे जाने वाले मध्य प्रदेश में हुए शिक्षा घोटाले की कहानी है। पहले से इंजीनियरिंग और मेडिकल प्रवेश परीक्षाएं पास कर चुके विद्यार्थियों को कभी लालच तो कभी भय दिखाकर दूसरों की जगह फिर से ये प्रवेश परीक्षाएं देने को तैयार करने का ये घोटाला अब भी थमा नहीं है।
लिखने वाले पांच, एपिसोड नौ
एमएक्स प्लेयर की वेब सीरीज ‘शिक्षा मंडल’ भी बासी कढ़ी के नए उबाल की तरह है। फिल्म ‘सेटर्स’ में शिक्षा माफिया बन चुके पवन राज मल्होत्रा फिर अपने उसी तेवर के साथ यहां भी मौजूद हैं। सीरीज की कहानी इतनी घिसी पिटी है कि इस पर नौ एपिसोड की इस सीरीज को लिखने के लिए भी पांच लोग लगेंगे, देखकर हैरानी होती है। लेकिन, कहते हैं कि इन दिनों लेखकों का हक मारने में तो वे लोग भी पीछे नहीं हैं जो अपनी फिल्म का नाम ‘सिया’ जैसा पवित्र रखते हैं। तो वेब सीरीज ‘शिक्षा मंडल’ के लेखकों में इसके निर्माता का नाम भी है और निर्देशक का भी। सबने मिलकर जो ताना बाना गढ़ा है, उसकी लिखावट ऐसी है कि आप अपना माथा पकड़ सकते हैं।
कहानी में ट्विस्ट है
तो अब भी कहानी जाननी है क्या आपको? वेब सीरीज ‘शिक्षा मंडल’ की कहानी में ट्विस्ट ये है कि ये एक लापता की तलाश से खाद पाती है। पानी इसमें उन छात्रों की हत्याओं का है जो एक के बाद एक गायब होते रहे हैं। तस्वीर एक ऐसी सामने आती है जिसे देखकर राजनीति से घिन होती है और शिक्षा व्यवस्था की इस हालत पर तरस आता है। इस सारे दलदल में उम्मीद की इकलौती लौ जलती दिखती है एक महिला पुलिस अफसर में। वेब सीरीज ‘शिक्षा मंडल’ को देखकर ये भी लगता है कि इसके किरदार पहले गढ़े गए और फिर इन किरदारों को आपस में जोड़ने के लिए एक जबर्दस्ती की कहानी खड़ी कर दी गई।
गुलशन और गौहर के भरोसे सीरीज
वेब सीरीज ‘शिक्षा मंडल’ के किरदार रोचक दिखते हैं। उनको गढ़ने की कोशिश भी ऐसी है कि इनके लिए कलाकारों की हां करवाने में मुश्किल न हो। गौहर खान इस वेब सीरीज में अपनी पूरी चमक दमक के साथ दिखने की कोशिश करती हैं। उनका अभिनय भी प्रभावित करता है लेकिन उनके चेहरे पर भावों को पढ़ने की कोशिश करते समय और भी बहुत कुछ समझ में आता रहता है। पवन मल्होत्रा का ऐसे किरदारों के लिए अब एक तय टैम्पलेट बन चुका है और वह उससे बाहर आने की कोशिश भी नहीं करते। गुलशन देवैया काबिल कलाकार हैं लेकिन जब कहानी में ही कुछ नया न हो तो वह भी कितना कोशिश कर सकते हैं। कुमार सौरभ के नन्हे नन्हे कदम उन्हें जल्द ही किसी बड़े धमाके के लिए तैयार जरूर कर रहे हैं।
देखें कि न देखें
एमएक्स प्लेयर के अंदरूनी झंझावातों जैसी वेब सीरीज ‘शिक्षा मंडल’ भी अपनी अंदरूनी कमजोरियों से ग्रसित एक औसत से कमतर वेब सीरीज है। इसकी कहानी से लेकर इसकी सिनेमैटोग्राफी और संपादन सब कुछ पहले से देखा और जाना पहचाना लगता है। नवीनता की इसमें गंभीर कमी है। और, इसके संवाद इसे देखने की नई चुनौती बन जाते हैं। सप्ताहांत का समय वैसे भी बहुत सोच समझकर ही किसी सीरीज या फिल्म के लिए निवेश करना होता है, ऐसे में ये वेब सीरीज आप नहीं भी देखेंगे तो कुछ खास छूटेगा नहीं आपसे।