फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Entertainment ›   Movie Review ›   review of leela film

लीला: राजस्थानी चाशनी में लिपटा सनी लियोनी का ग्लैमर

Sat, 11 Apr 2015 12:36 PM IST
Updated Sat, 11 Apr 2015 12:36 PM IST
विज्ञापन
review of leela film

अगर इंसान का पुनर्जन्म हो सकता है तो सिनेमा का भी पुनर्जन्म संभव है। पुरानी थीम को उठा कर नया सिनेमा गढ़ा जा सकता है। भले ही चेहरे बदल दिए जाएं। एक पहेली... लीला पुनर्जन्म की कहानी है। जिसमें थोड़ा-सा रहस्य है और ज्यादातर ऊब है। अगर इसमें सनी लियोनी के ग्लैमर की गोंद न हो तो आपके कुर्सी से चिपके रहने का कोई कारण नहीं बनता। परंतु इस ग्लैमर में अब पहले वाली बात नहीं है। तमाम तरह से सजाने-संवारने के बावजूद मेक-अप के पीछे की सच्चाई कई जगहों पर उजागर हो जाती है।

विज्ञापन


लीला की कहानी आखिरी के कुछ मिनटों को छोड़ कर निराश करती है। पुनर्जन्म के दौरान इसके किरदार 300 बरसों की यात्रा तो करते हैं, मगर उनकी कहानी बेहद संकुचित और थ्रिल-विहीन है। लंदन में रहने वाली सुपर मॉडल मीरा (सनी लियोनी) एक शूट के सिलसिले में हिंदुस्तान आती है और यहां जोधपुर के राजकुमार रणवीर (मोहित अहलावत) से उसे प्यार हो जाता है। फिर चटमंगनी और पट ब्याह।
विज्ञापन


कहानी में ट्विस्ट यह कि मुंबई की म्यूजिक इंडस्ट्री स्ट्रगल कर रहे करन (जय भानुशाली) को ऐसा सपना बार-बार आता है जिसमें एक आदमी दूसरे को हंटर से पीट रहा है। सपने में एक लड़की भी उसे दिखती है, लीला (सनी लियोनी)। करन एक नाड़ीशास्त्री की मदद से सपने की व्याख्या को समझते हुए जोधपुर पहुंचता है। वहां मीरा से मिलता है और उसे बताता है कि वह पिछले जन्म की लीला है।

विज्ञापन
विज्ञापन

कमजोर कथानक को द्विअर्थी संवादों की बैसाखी

review of leela film

अब क्या है मीरा और लीला की सच्चाई? करन का इनसे क्या संबंध है? हंटर से कौन किसको पीट रहा है? रणवीर का इस कहानी में क्या काम क्या है? ऐसे ही कुछ सवालों को लीला की कहानी में निर्देशक ने पिरो कर उनके जवाब ढाई घंटे में दिए हैं।

फिल्म की रफ्तार धीमी है। ट्रीटमेंट कुछ जगहों पर अस्सी के दशक का मालूम पड़ता है। दो-एक दृश्यों को छोड़ सनी का अभिनय निराश करता है। फिल्म टी-सीरीज की है और इसे संगीत से सजाने की भरपूर कोशिश हुई है। लेकिन गीत-संगीत कहानी में फिट नहीं बैठता और जबर्दस्ती डाला गया लगता है। कहानी के एक ट्रेक में कुछ द्विअर्थी संवाद डाले गए हैं, जिससे आगे की बैंचवालों को और मजा मिले। परंतु जब असली कथानक आनंद नहीं दे सकता तो केवल द्विअर्थी संवाद कैसे पैसा वसूल करा सकते हैं।

मोहित अहलावत से लेकर जय भानुशाली और जस अरोरा तक वाक्य में खाली स्थान को भरने वाले शब्दों जैसे लगते हैं। फिल्म तकनीकी स्तर पर श्रेष्ठ है। इसके दृश्यों में रंग-संयोजन सुंदर है। फिर भी राजस्थान की खूबसूरती का सही ढंग से इस्तेमाल करने में निर्देशक बॉबी खान पूरी तरह सफल नहीं रहे। जब कहानी के सिरे जकड़े हुए हों और उनमें उड़ान का खुला आसमान न हो तो कितने पंख फैलाए जा सकते हैं। कुल मिलाकर फिल्म पोर्न स्टार सनी के ग्लैमर पक्ष को राजस्थानी चाशनी में डुबो कर पेश करने की कोशिश है। एक ही व्यंजन को अलग-अलग थाली में पेश करने से उसका स्वाद तो नहीं बदल जाता। हलवाई भले यह न जाने, परंतु जुबान तो जानती है।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें Entertainment News से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। मनोरंजन जगत की अन्य खबरें जैसे Bollywood News, लाइव टीवी न्यूज़, लेटेस्ट Hollywood News और Movie Reviews आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed