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Planet Earth III Review: बढ़ती गर्मी से पैदा हो रहे सिर्फ मादा कछुए, प्लैनेट अर्थ का ये सीजन देख आप रो पड़ेंगे

Mon, 29 Jul 2024 08:47 PM IST
Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Mon, 29 Jul 2024 08:47 PM IST
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Planet Earth Season 3 Review in Hindi by Pankaj Shukla Mike Gunton Sir David Attenborough BBC Earth Sony Liv
प्लैनेट अर्थ सीजन 3 – एपिसोड 1 रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
Movie Review
प्लैनेट अर्थ सीजन 3 – एपिसोड 1
कलाकार
सर डेविड अटनबरो (सूत्रधार)
लेखक
उपलब्ध नहीं
निर्देशक
निक ईस्टन
निर्माता
निक ईस्टन
रिलीज:
29 जुलाई 2024 (भारत)
रेटिंग
4/5

अगर आपकी डॉक्यूमेंट्री फिल्मों खासतौर से वन्य जीवन से जुड़े वृत्त चित्रों में रुचि रही है तो आपने डेविड एटनबरो का नाम तो जरूर सुना होगा, सर डेविड अटनबरो। 98 साल के हो चुके डेविड एटनबरो ने अपने जीवन के बीते आठ दशक धरती पर मौजूद जीवन को दुनिया भर के दर्शकों को समझाने में निवेश किए हैं। जितना मनमोहक समंदर की गहराई में झिलमिलाते किसी नए जीवन को परदे पर पहचानना होता है, उतनी ही सम्मोहक है डेविड एटनबरो की आवाज। वह आहिस्ता आहिस्ता समझा समझा कर जिस तरह कमेंट्री करते हैं, वह सीखने लायक है। सीरीज ‘प्लैनेट अर्थ’ का तीसरा सीजन सोमवार से भारत में प्रसारित होना शुरू हुआ है, प्रसारण के अगले दिन ये ओटीटी सोनी लिव पर उपलब्ध होगा। अगर आपके घर में बड़ा टेलीविजन है तो अपने बच्चों के साथ उस एचडी टेलीविजन पर ये सीरीज देखना मत भूलिएगा। शुक्रवार तक हर रोज एक एपिसोड है, तीन और एपिसोड अगले हफ्ते के पहले तीन दिन।

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Planet Earth Season 3 Review in Hindi by Pankaj Shukla Mike Gunton Sir David Attenborough BBC Earth Sony Liv
प्लैनेट अर्थ सीजन 3 – एपिसोड 1 रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

कुल आठ एपिसोड की सीरीज ‘प्लैनेट अर्थ III’ की शुरुआत उस जगह पर डेविड एटनबरो के साथ शूटिंग से होती है, जहां बताते हैं कि चार्ल्स डार्विन ने विकास के सिद्धांतों का प्रतिपादन किया था। जी हां थ्योरी ऑफ इवोल्यूशन! विकास के इन सिद्धांतों का सबसे मूलभूत बिंदु रहा है, अनुकूलन। सीरीज का पहला एपिसोड वन्य व जल जीवों के अपनी जलवायु के अनुसार खुद को बदलने और जीवन की जरूरत के अनुसार खुद को बदलने पर केंद्रित है। एपिसोड में कुछ बेहद मार्मिक तो कुछ बेहद रोचक दृश्य देखने को मिलते हैं। रोचक दृश्य यहां वह है जिसमें मैनग्रू्व्स के पास रहने वाली मछलियां पेड़ों पर फुदकने वाले कीड़ों का शिकार करने के लिए पानी के तीर बनाकर निशाना लगाना सीख लेती हैं। जी हां, ये मछलियां खूब सारा पानी मुंह में भरकर बिल्कुल निशाना साधकर ऐसी तेज धार इन कीड़ों पर मारती हैं कि शाखाओं पर बैठे कीड़े मुंह के बल नीचे पानी में आ गिरते हैं। कंपटीशन यहां भी है। जो पानी का तीर बनाकर मारेगा, शिकार के पानी में गिरने पर वह उसे ही मिलेगा, इसकी गारंटी जब नहीं रही तो फिर? फिर क्या, फिर एक और अनुकूलन। ये मछलियां पानी से बाहर छलांग लगाकर इन कीड़ों को पकड़ना सीख चुकी हैं। है न हैरतअंगेज कहानी?

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Planet Earth Season 3 Review in Hindi by Pankaj Shukla Mike Gunton Sir David Attenborough BBC Earth Sony Liv
प्लैनेट अर्थ सीजन 3 – एपिसोड 1 रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

सावन का महीना चल रहा है। हर तरफ बरखा बहार छाई है तो ऐसे में हैंस जिमर के संगीत की सुरलहरियों पर पिरोए गए ‘प्लैनेट अर्थ III’ के इस एपिसोड की कुछ कहानियां और भी आपको रोचक लग सकती हैं। जैसे कि एक कहानी है सांप की जो जमीन पर रेंगने के साथ ही पानी के भीतर भी दम साधकर शिकार करना सीख गया है। सांप शीत रुधिर प्राणी है, पानी का तापमान सहज नहीं है, फिर भी भोजन की तलाश उसे इसमें शिकार के लिए अनुकूल बनाती है। शरीर का खून कहीं जम न जाए इसलिए बीच बीच में वह सिर पानी के बाहर निकालकर सूरज की गर्मी से अपना सिर भी सेंकता रहता है और फिर गहरे पानी पैठ वहां जाकर शिकार कर लाता है, जहां बैठे प्राणी को ऐसे शिकारी की उम्मीद भी नहीं रही होती। डेविड एटनबरो ने अपना पूरा जीवन ऐसी ही दृश्यावलियों को दर्शकों तक पहुंचाने के नाम कर रखा है। दो साल बाद वह अपना जीवन शतक लगाएंगे, और, उनके भीतर अभी भी जो सीखने की ललक लगातार दिखती है, वह न सिर्फ प्रशंसनीय है, बल्कि अनुकरणीय भी है।

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Planet Earth Season 3 Review in Hindi by Pankaj Shukla Mike Gunton Sir David Attenborough BBC Earth Sony Liv
प्लैनेट अर्थ सीजन 3 – एपिसोड 1 रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

सीरीज ‘प्लैनेट अर्थ III’ का निर्माण बहुत जतन से किया जाता है। इस सीरीज का पहला सीजन साल 2006 में आया था और उसके दूसरा सीजन बनाने में टीम को 10 साल लगे। साल 2016 में दूसरे सीजन की शानदार कामयाबी के बाद तीसरा सीजन अभी बीते साल नवंबर में अमेरिका में रिलीज हुआ। भारत के दर्शकों के लिए ये आठ एपिसोड की सीरीज अब प्रसारित होनी शुरू हुई। सीरीज के आठों एपिसोड में अलग अलग मुद्दे हैं। जैसे, पहले एपिसोड की कहानी उन समु्द्र तटों की है जहां का थलीय जीवन, जलीय जीवन से आकर मिलता है और एक दूसरे के खुद को अनुकूल बनाता है। तंजानिया की फर सीलें वहां पहुंचने वाली शार्क मछलियों का आसान शिकार बनती रही हैं, लेकिन कभी आपने वह दृश्य भी देखा है जब सैकड़ों सील झुंड बनाकर शार्क को दौड़ा लें! और, उसे अपने इलाके से भागने पर मजबूर भी कर दें! यही जीवन का अनुकूलन भी है और सर्वोत्तम की उत्तरजीविता समझाने वाले डार्विन के विकास के सिद्धांतों का अंतिम अध्याय भी।

Planet Earth Season 3 Review in Hindi by Pankaj Shukla Mike Gunton Sir David Attenborough BBC Earth Sony Liv
प्लैनेट अर्थ सीजन 3 – एपिसोड 1 रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

सीरीज ‘प्लैनेट अर्थ III’ की अंतिम कहानी बहुत दारुण है। ये कहानी इतनी मार्मिक है कि इसे देखते हुए इस बात पर भी रोना आ सकता है कि हम इंसानों ने धरती का क्या हाल बना दिया है। ये कहानी है रायन द्वीप की। वह द्वीप जहां दुनिया भर में कछुओं के प्रजनन की सबसे बड़ी आबादी मानी जाती है। हजारों, लाखों कछुए हर साल यहां अंडे देने आते हैं। दिन ढलते ही रेगिस्तान में दूर तक चले आने वाले इन कछुओं में तमाम वापस सुबह होने पर समंदर तक पहुंच ही नहीं पाते। सूरज जैसे जैसे चढ़ता जाता है। रेत तपने लगती है और इसी तपती रेत में ये कछुए दम तोड़ देते हैं। जलवायु परिवर्तन का यहां जो असर हो रहा है, उससे इस द्वीप के अपना अस्तित्व खो देने का भी खतरा है। खतरा यहां प्रजनन करने आने वाली कछुओं की प्रजाति के भविष्य पर भी है क्योंकि रेत का तापमान बढ़ रहा है। कछुओं के अंडे से मादा कछुआ निकलेगी या नर, ये आसपास का तापमान तय करता है। ज्यादा तापमान माने ज्यादा मादा कुछए। और, हालत ये है कि तकरीबन अब सारे कछुए (99.5 फीसदी) मादा ही हो रहे हैं तो फिर, आगे क्या होगा..? ये सवाल अगर आपके भी मन में आ गया तो सीरीज ‘प्लैनेट अर्थ III’ बनाना सार्थक है। 

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