Movie Review: छोटे लड़के से युवती की प्रेम कहानी है 'सांकल'
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-निर्देशकः दैदीप्य जोशी
-सितारेः चेतन शर्मा, तनीमा भट्टाचार्य, हरीश कुमार, जगत सिंह, मिलिंद गुणाजी
रेटिंग **
कई अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में सराही गई फिल्म सांकल राजस्थान के दूर-दराज के इलाकों में प्रचलित एक कुरीति को सामने लाती है, जिसने हजारों जिंदगियां बर्बाद कर दी। फिल्म एक ऐसे छोटे-से गांव की कहानी है जिसने दूसरे गांवों की बेटियों से अपने बेटों का तो ब्याह किया परंतु रक्त की शुद्धता के नाम पर दूसरे गांवों में बेटियां ब्याह करना बंद कर दी। धीरे-धीरे ये बेटियां बड़ी हुईं तो समस्या खड़ी गई। पंचों ने तय किया कि गांव के ही छोटे-छोटे लड़कों के साथ इन युवतियों का विवाह किया जाए। यह कोई हल नहीं था और समस्या अधिक जटिल हो गई। रिश्तों के ताने-बाने टूट गए।
फिल्म जैसलमेर के गांव खूती की ढाणी में रहने वाले केसर (चेतन शर्मा/जगत सिंह) और अबीरा (तनीमा भट्टाचार्य) के माध्यम से इसी कुरीति की कहानी कहती है। केसर जब छोटा था तभी युवा हो चुकी अबीरा से उसका विवाह कर दिया गया। फिल्म की कहानी का अंदाज पुराना है, जो रोमांच पैदा नहीं करता। निर्देशक दैदीप्य जोशी पारंपरिक सिनेमाई की राह पर चलते हुए किरदारों की जटिक मानसिक बुनावट और भावनात्मक उतार-चढ़ाव को सामने नहीं ला पाते। इस लिहाज से अभिनेता भी निराश करते हैं। फिल्म में कलात्मकता और अच्छे संवादों का अभाव है। अतः सांकल कोई नई वैसी आवाज नहीं पैदा करती जो लोगों को चौंकाए। यह केवल उन दर्शकों में जिज्ञासा जगा सकती है जो फेस्टिवल फिल्मों पर बारीक नजर रखते हैं।