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इस फिल्म के लिए कहिए 'शराफत गई तेल लेने'

Fri, 16 Jan 2015 03:54 PM IST
रवि बुले/ अमर उजाला, मुंबई ब्यूरो
रवि बुले/ अमर उजाला, मुंबई ब्यूरो Updated Fri, 16 Jan 2015 03:54 PM IST
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Movie Review by sharafat gai tel lene

आप बहुत शरीफ हैं और पैसों की तंगी का सामना करते हैं। ऐसे में एटीएम की अपनी पर्ची में एक दिन अचानक पांच हजार की जगह 100 करोड़ रुपये दिख जाएं तो क्या शरीफ बने रहेंगे? मन में गुदगुदी होगी और शराफत का क्या होगा...!

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ऐसा ही कुछ दिल्ली में एक दिन पृथ्वी खुराना (जाएद खान) के साथ होता है। उसकी जिंदगी उथल-पुथल हो जाती है। परंतु कुछ ऐसी बातें भी होती हैं, जिससे वह इस पैसा का लुत्फ नहीं उठा पाता। उल्टे लगता है कि पैसा पाकर फंस गया।
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फिल्म धीमी और कुछ बोरिंग रफ्तार से शुरू होती है क्योंकि पृथ्वी खुराना बोर इंसान है। दोस्त के आगे उसकी दाल नहीं गलती और गर्लफ्रेंड के सामने ‘बेबी’ बना रहता है! अतः ब्रोमांस-रोमांस की उम्मीद यहां न करें।
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फिल्म एटीएम वाली घटना के बाद रफ्तार पकड़ती है और अचानक दाउद का नाम सामने आता है। दाउद कौन है यह कहने की जरूरत नहीं। उसने ये सौ करोड़ पृथ्वी के अकाउंट में डलवाए हैं। पता चलता है कि दाउद इस अकाउंट के मार्फत किश्तों में किसी के पास धन पहुंचना चाहता है। बदले में पृथ्वी को भी दो परसेंट का पेमेंट होता है।

कहानी में ट्विस्ट तब आता है जब टीवी पर खबर चलती है कि दुबई में एक पुलिस एनकाउंटर में दाउद मारा गया! तो क्या बचा हुआ पैसा अब पृथ्वी के पास रहेगा? फिल्म रोचक ढंग से इस सवाल के साथ कुछ राज खोलती है।

जाएद खान ने लंबे समय बाद वापसी की है। सीधे-सादे मध्यमवर्गीय युवा के रूप में वह पिछली पारी के मुकाबले ज्यादा जमे हैं। रणविजय सिंह का अभिनय अच्छा है और वह फिल्म को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं। मगर टीना देसाई इन दोनों से बढ़ कर दिखती हैं। टेबल नंबर 21 और स्पेशल 26 जैसी फिल्मों की तुलना में वह यहां काफी सुंदर और आत्मविश्वास से भरी नजर आई हैं।

निर्देशक गुरमीत सिंह की यह फिल्म अपने कथानक के केंद्र में यूं तो आकर्षक है मगर इसका निर्वाह थोड़े जटिल ढंग से हुआ है। अतः फिल्म को समझने के लिए दिमाग खर्च करना पड़ेगा।


अगर टिकट खिड़की पर जेब ढीली करने के साथ आप कॉमेडी को समझने के लिए दिमाग लगाना चाहते हैं तो जरूर देखें। फिल्म निराश नहीं करेगी। परंतु हल्के-फुल्के ढंग से देखने जाएंगे तो मजा नहीं आएगा। बिना मेहतन ढेर सारे ‘इंस्टेंट धन’ की आकांक्षा रखने वाले युवाओं के साथ इस फिल्म की पटरी बैठ सकती है।

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