इस क्राइम रिपोर्टर ने उठाया था संजय दत्त के आतंकी संबंधों से पर्दा!
संजू फिल्म देखते हुए मुझे बलजीत परमार की बहुत याद आई, फिल्म में अखबार को एलएसडी जैसा खतरनाक नशा भी कहा गया। संजू कहता है "आपके घरों में अखबार के नाम पर यह नशा रोज भेजा जाता है।" तब मुझे बार-बार तुम्हारी याद आई थी। मुझे लगा कि अब इसमें कहीं आपका नाम आएगा, पर नहीं आया। राजीव नीमा इंदौरी आ गए, आप नहीं।
ब्लिट्ज ग्रुप के आरके करंजिया साहब के अंग्रेजी टेब्लॉयड 'द डेली' में धाकड़ क्राइम रिपोर्टर के रूप में संजय दत्त के आतंकी संबंधों की खबर अप्रैल 1993 में किसी दिन तुमने ही डंके की चोट पर ब्रेक की थी।
बाद में संजय दत्त के वकील राम जेठमलानी ने तुम्हें और अखबार को एक करोड़ रुपये हर्जाने और माफीनामे का नोटिस भी दिया था, जिसे तुमने कूड़ेदान में डाल दिया था। यह बात तुमने ही बताई थी कि पुलिस कमिश्नर के केवल इस एक वाक्य से तुम खबर की तह तक पहुंचे थे कि इस मामले में एक एमपी का बेटा भी शक के घेरे में है। तुमने बात पकड़ी, संजय दत्त ने तुम्हें गुमराह करने की कोशिश की।
संजय दत्त उस समय मॉरीशस में आतिश फिल्म की शूटिंग कर रहा था। सुनील दत्त साहब मुंह छुपाए जर्मनी चले गए थे। तुम खबर को खोदते रहे, खोदते रहे, फिर एक सुबह लोगों ने उस खबर (संजू के शब्दों में एलएसडी) को पढ़ा।
पुलिस कमिश्नर ने भी खबर को गलत बता दिया, दबाव भी बहुत आए, दहला देने वाली इस खबर के कारण तुम और द डेली पर ब्लैकमेल में इल्जाम लगे, लेकिन जब संजय मॉरीशस से मुम्बई आया तब उसे सहारा एयरपोर्ट पर ही गिरफ्तार कर लिया गया।
मुम्बई के बम-ब्लास्ट दिल दहलानेवाले थे, जिसमे 257 की मौत तो तभी हो गई थी, बाद में भी घायल 1000+ में से कई की मौत हुई। सैकड़ों अनाथ हो गए थे। अगर संजय बच निकलता तो यह अन्याय होता, उनके लोगों के साथ।
बेखौफ पत्रकारिता की मशाल थामे रहने का शुक्रिया तो क्या कहूँ, तुम पर आज भी फख्र है, यही कहना चाहूंगा। संजू के प्रचार के शोर में तुम्हारा नाम दब नहीं सकता। जांबाजी से पत्रकारिता करते रहो, मेरा सलाम।
पुनश्च : शेर और रिपोर्टर कभी बूढ़े नहीं होते