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Mast Mein Rehne Ka Review: जैकी श्रॉफ और नीना गुप्ता की बेहतरीन अदाकारी की अनोखी झलक, पढ़िए कहां चूकी फिल्म

Fri, 08 Dec 2023 05:09 PM IST
Virendra Mishra वीरेंद्र मिश्र
Updated Fri, 08 Dec 2023 05:09 PM IST
सार

मां बाप अपने बच्चों की परवरिश इस उम्मीद में करते हैं कि जब उनकी वृद्धवास्था आएगी तो वह उनके बुढ़ापे का सहारा बनेंगे लेकिन ऐसा होता बहुत ही कम है । बच्चे बड़े होकर अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों में इस कदर व्यस्त हो जाते हैं कि उन्हें अपने माता पिता की चिंता नहीं होती हैं। ऐसे में अकेलापन इंसान को अंदर ही अंदर खोखला करता रहता है।  

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Mast Mein Rehne Ka Review in Hindi Jackie Shroff Neena Gupta Abhishek Monika Faisal Rakhi Vijay Maurya
मस्त में रहने का रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
Movie Review
मस्त में रहने का
कलाकार
जैकी श्रॉफ , नीना गुप्ता , अभिषेक चौहान , मोनिका पवार , राखी सावंत और फैसल मलिक
लेखक
विजय मौर्या
निर्देशक
विजय मौर्या
निर्माता
पायल अरोड़ा और विजय मौर्या
रिलीज
8 दिसंबर 2023
रेटिंग
2/5

विस्तार

मां बाप अपने बच्चों की परवरिश इस उम्मीद में करते हैं कि जब उनकी वृद्धवास्था आएगी तो वह उनके बुढ़ापे का सहारा बनेंगे लेकिन ऐसा होता बहुत ही कम है । बच्चे बड़े होकर अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों में इस कदर व्यस्त हो जाते हैं कि उन्हें अपने माता पिता की चिंता नहीं होती हैं। ऐसे में अकेलापन इंसान को अंदर ही अंदर खोखला करता रहता है। जिंदगी तब और बोझ बन जाती है जब पति पत्नी में से कोई एक नहीं रहता है। ऐसे में जिंदगी को कैसे जिया जाए। फिल्म में छोटी-छोटी खुशियां दुख, भूली बिसरी यादें जैसे हर पहलू को बहुत ही बारीकी से दिखाया गया है। 

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Mast Mein Rehne Ka Review in Hindi Jackie Shroff Neena Gupta Abhishek Monika Faisal Rakhi Vijay Maurya
मस्त में रहने का - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

फिल्म 'मस्त में रहने का' में दो समानांतर कहानियां चलती हैं। एक कहानी मिस्टर कामत और प्रकाश कौर की है और दूसरी नन्हे और रानी की। मिस्टर कामत की पत्नी की मृत्यु हो चुकी है। जिंदगी उनको बोझ लगने लगी है। प्रकाश कौर बेटे के साथ कनाडा में रहती रही हैं, लेकिन वह कनाडा से अब मुंबई आ गई हैं। पति के जाने के बाद अंदर से वह भी टूट चुकी हैं, लेकिन कभी जाहिर नहीं करती। नन्हे एक लेडीज ट्रेलर है लेकिन वह इतने कर्जे में डूब गया है कि अकेले घर में रह रहे बुजुर्गो के घर चोरी करके अपना कर्ज चुका रहा है। नन्हे को ट्रैफिक सिगनल पर भीख मांगने वाली लड़की रानी से प्यार हो जाता है। दोनों कहानियां का कब, कैसे और कहां मिलन होता है, इसी पर टिकी फिल्म ‘मस्त में रहने का’ की कहानी।

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Mast Mein Rehne Ka Review in Hindi Jackie Shroff Neena Gupta Abhishek Monika Faisal Rakhi Vijay Maurya
मस्त में रहने का - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

फिल्म ‘मस्त में रहने का’ के लेखक-निर्देशक विजय मौर्या 'गली बॉय' और 'तुम्हारी सल्लू' जैसी फिल्में लिख चुके हैं। इस फिल्म में उन्होंने 'गली बॉय' जैसी ही दुनिया रचने की कोशिश की है। नन्हे और रानी  के किरदार के जरिए जहां उन्होंने मुंबई जैसे महानगर की झोपड़पट्टी में रहने वाले लोगों की मनोदशा दिखाई है, वहीं मिस्टर कामत और प्रकाश कौर के किरदार मुंबई के पॉश इलाकों में अकेले रहने वाले बुजुर्गों की मजबूरी और उनके अकेलेपन को दर्शाते हैं। कामत के घर जब नन्हे चोरी करने जाता है तो वह चोर से कहते हैं कि उनको जान से मार दे। लेकिन जैसे ही उनकी मुलाकात प्रकाश कौर से होती है, उनको लगता है कि जिंदगी को फिर से एक नए सिरे से जी जा सकती है।

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Mast Mein Rehne Ka Review in Hindi Jackie Shroff Neena Gupta Abhishek Monika Faisal Rakhi Vijay Maurya
मस्त में रहने का - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

मिस्टर कामत की भूमिका में जैकी श्राफ का अभिनय काफी प्रभावशाली रहा है। कहीं न कहीं उनके किरदार में फिल्म 'लाइफ इज गुड' की झलक दिखाई देती है, लेकिन अकेले रहने वाले बुजुर्ग की भूमिका में उनका अभिनय कमाल है। प्रकाश कौर की भूमिका में नीना गुप्ता ने भी अपनी छाप छोड़ी है। मिस्टर कामत को बात -बात में मद्रासी बुलाना और मद्रासी बोले जाने पर मिस्टर कामत का सफाई देना, फिल्म के बहुत ही भावुक प्रसंग हैं। फिल्म में छोटे छोटे ऐसे क्षण आते रहते हैं कि लगता है जिंदगी में सब दुख दर्द भूलकर मस्त में ही रहना चाहिए। इंसान के जीवन में एक दौर ऐसा आता है जब इंसान जिंदगी जीता है, लेकिन जब जिंदगी इंसान को जीने लगे तब किस तरह से समय के साथ अपने जीवन को अनुकूल बनाया जा सकता है। यही, इस फिल्म में दिखाया गया है। 

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Mast Mein Rehne Ka Review in Hindi Jackie Shroff Neena Gupta Abhishek Monika Faisal Rakhi Vijay Maurya
मस्त में रहने का - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

नन्हे की भूमिका में अभिषेक चौहान और रानी की भूमिका में मोनिका पवार का भी काम सरहानीय है। पंचायत सीरीज में उप प्रधान की भूमिका निभा चुके फैसल मालिक ने फिल्म में फल बेचने वाले बाबूराम की भूमिका में जान फूंक दी है। फिल्म में राखी सावंत का ट्रैक थोड़ा सा डिस्टर्ब जरूर करता है, लेकिन फिल्म की कहानी में उनके किरदार को इस तरह से जोड़ा गया है कि उनकी भी भूमिका को नजर अंदाज नहीं कर सकते हैं। फिल्म का विषय जितना अच्छा है तकनीकी रूप से फिल्म उतनी ही कमजोर हैं। फिर भी फिल्म को अगर अच्छे तरीके से प्रमोट किया गया होता तो यह फिल्म दर्शकों तक पहुंचने में जरूर कामयाब होती। 

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