Made In Heaven 2 Review: चमकते घरानों की दमकती शादियों की दरकती तस्वीर, सर्भ, शोभिता और माथुर की शानदार वापसी
वेब सीरीज ‘मेड इन हेवेन’ का डीएनए अगर जांचना हो तो वह कुछ कुछ वैसा ही है जैसा कि दिनेश ठाकुर की मशहूर गजल का वो शेर, कि, हर हंसीं मंजर से यारों फासले कायम रखो, चांद गर धरती पे उतरा देखकर डर जाओगे! मतलब कि वो शादी ही क्या जिसमें तमाशा न हो। शादियां रईस घरानों की हों या फिर मालदार लेकिन कुपढ़ समाजियों की, रोना हर जगह वही है। मियां बीवी राजी होते भी हैं तो मामला बिगाड़ने को कोई न कोई काजी कहानी लिखने वाले तलाश ही लाते हैं। समलैंगिकता का अपना एक अलग एजेंडा अमेरिकी ओटीटी का हिंदुस्तानी कहानियों में चलता ही रहता है। सीरीज शुरू होते ही एलजीबीटीक्यू प्लस से माफी मांगता सा एक डिस्क्लेमर है और कहानी फिर बीते सीजन की रफ्तार से आगे।
करन और तारा की माली हालत जो बीते सीजन में बिगड़ी थी वो उन्हें उठाकर वहां ले आई है जहां से काम करने के बारे में उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा होगा। रमेश जौहरी की बीवी बुलबुल इस बार बाग में चहकने आ गई है। तारा का अपने रईस पति से तलाक अब तक हो नहीं पाया है। और, इस रईस पति की माशूक पंजे सिकोड़ रही है। जसप्रीत उर्फ जैज का फोटोग्राफर संग नैन मटक्का जारी है। कहानी का मूल ढांचा बनाने वाले इन किरदारों में रंग भरने का काम करते दिखते हैं मेहेर चौधरी, शेफ राघव सिन्हा के अलावा वे सारे किरदार जो अलग अलग शादियों का यूएसपी बनकर आते हैं। और, शादियां भी इतने अलग अलग रंग और कलेवर की हैं कहीं इनसे घिन भी आ सकती है और कहीं कोफ्त इस बात को लेकर होती है कि ये सब हमारे ही आसपास हो रहा है। बस, जब भी बात एक खास तबके की होती है तो वह सीधे बौद्ध धर्म तक क्यों पहुंच जाती है, इस बारे मे लेखकों को विचार करने क जरूरत है।
वेब सीरीज ‘मेड इन हेवेन’ शुरू से हिंदी सिनेमा के आम दर्शकों के लिए नहीं रही है। इसे बनाने वाले जिस संभ्रांत वर्ग के नुमाइंदे होने का दम भरते हैं, ये सीरीज भी उन्हीं को लक्षित करते हुए बनी है। सीरीज बिल्कुल साउथ बॉम्बे या साउथ दिल्ली जैसी ही न चमक जाए तो संतुलन बनाए रखने के लिए ‘मसान’ वाले नीरज घेवन भी हैं। बागियों की बहारों से दोस्ती की कहानियां सजाती वेब सीरीज ‘मेड इन हेवेन’ का दूसरा सीजन भी अपने एक अलग सोचमंडल में बसता है। इसके किरदार कमाल के तरीके से इस दुनिया को रचते हैं। शोभिता धूलिपाला तो जैसे लगता है बनी ही तारा के किरदार के लिए हैं। उनकी एक एक अदा और उनका एक एक तंज उनकी अभिनय क्षमता को हर बार दो इंच ऊपर की तरफ ले जाता है। ‘पोन्नियिन सेल्वन’ में तृषा और ऐश्वर्या की मौजूदगी में दमक चुकीं शोभिता पर हिंदी सिनेमा के पारखियों की नजर पड़नी अभी बाकी है और जिस दिन ऐसा हुआ वह सीधे दीपिका, आलिया और मृणाल के साथ बैठी नजर आएंगी।
अर्जुन माथुर ने एक बार फिर सीरीज में पुरस्कार पाने लायक काम किया है। और, त्रिनेत्र हल्दर ने भी हिंदी सिनेमा में ट्रांसजेंडर्स को समाहित करने के लिए एक नई और मजबूत राह खोली है। उनका अभिनय नजीर बनता दिखता है। संजय कपूर, नीलम और समीर सोनी जैसे तमाम जाने पहचाने सितारों से सजी इस सीरीज के कलाकारों में अकेले जिम सर्भ का आकर्षण सौ नंबर का है। ये बंदा भी अलग ही बिंदास है। फ्रेम मे उसके साथ किसी और को दमकने का चांस ही नहीं है। मोना सिंह इन सबके बीच यूं ही हैं जैसे अवाकाडो की डलिया में हापुस आम। उनका हर अंदाज कमाल का है। कल्कि को जिस काम के लिए कहानी में बनाए रखा गया, उतना हिस्सा वह अपना ईमानदारी से निभा ले जाती हैं।