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Killers of the Flower Moon Review: 80 साल के स्कॉर्सेसे का विस्मयकारी सिनेमा, इस साल की बेहतरीन हॉलीवुड फिल्म

Fri, 27 Oct 2023 11:23 PM IST
Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Fri, 27 Oct 2023 11:23 PM IST
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Killers of the Flower Moon Review in Hindi Martin Scorsese Leonardo dicaprio Robert di niro lily gladstone
किलर्स ऑफ द फ्लॉवर मून - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
Movie Review
किलर्स ऑफ द फ्लॉवर मून
कलाकार
रॉबर्ट डी निरो , लिओनार्डो डिकैप्रियो , लिली ग्लैडस्टोन , जैसे प्लेमोंस , टैंटू कार्डिनल और ब्रेंडन फ्रेजर आदि
लेखक
एरिक रॉथ और मार्टिन स्कॉर्सेसे (डेविड ग्रैन की लिखी किताब ‘किलर्स ऑफ द फ्लॉवर मून’ पर आधारित)
निर्देशक
मार्टिन स्कॉर्सेसे
निर्माता
डैन फ्रेडकिन , बैडले थॉमस , मार्टिन स्कॉर्सेसे और डेनियल लुपी
रिलीज
27 अक्तूबर 2023 (भारत)
रेटिंग
4/5

इस साल के कान फिल्म फेस्टिवल में जिन फिल्मों की सबसे ज्यादा चर्चा रही, उनमें दिग्गज फिल्मकार मार्टिन स्कॉर्सेसे की फिल्म ‘किलर्स ऑफ द फ्लॉवर मून’ का नाम सबसे आगे रहा। फिल्म का प्रीमियर इसी फिल्म समारोह में हुआ और तब से दुनिया भर में सुधी फिल्म दर्शकों का इसका इंतजार रहा। अमेरिका में बीते हफ्ते रिलीज होने के बाद इस शुक्रवार को ये फिल्म भारत के सिनेमाघरों तक पहुंची है। अभिनेता रॉबर्ट डी नीरो की स्कॉर्सेसे के साथ ये 10वीं फिल्म है और डिकैप्रियो के साथ सातवीं। एक निर्देशक का अपने कलाकारों पर जो भरोसा होता है, उसकी ये फिल्म अद्भुत बानगी है। ये फिल्म इस बात की भी बानगी है कि सिनेमा में अनुभव का निवेश कमाल का होता है। 80 साल की उम्र में मार्टिन स्कॉर्सेसे ने अतीत की घटनाओं पर आधारित जो ये फिल्म बनाई है ये प्राकृतिक संसाधनों के दोहन के लालच की एक ऐसी कहानी है जिसे देखना सिनेमा के उस अनुभव से दो चार होना है जिसके लिए सिनेमा के सुधी दर्शक हर कालखंड में लालायित रहे हैं। फिल्म ‘किलर्स ऑफ द फ्लॉवर मून’ इस साल की बेहतरीन हॉलीवुड फिल्म है। अगले साल के ऑस्कर पुरस्कारों में इसकी धूम रहने वाली है। अगर आपको अंग्रेजी फिल्में पसंद हैं तो इसे देखना बिल्कुल न भूलें।

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किलर्स ऑफ द फ्लॉवर मून - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
अमेरिका की सिहरा देने वाली सत्यकथा

मशहूर संगीतकार रॉबी रॉबर्टसन को समर्पित फिल्म ‘किलर्स ऑफ द फ्लॉवर मून’ बीते सात साल से चर्चा में रही है। छह साल पहले डि नीरो और कैप्रियो इस फिल्म से जुड़े और इसकी शूटिंग भी 2018 में शुरू हो जानी थी लेकिन पहले व्यवस्थागत दिक्कतें आईं, फिर कोरोना आया और उसके बाद 2021 में जाकर फिल्म की शूटिंग शुरू हो सकी। कहानी इसके कोई सौ साल पहले की है। अमेरिका के मध्य पश्चिमी मैदानी इलाकों की जनजाति ओसाजे नेशन की धरती पर तेल मिलता है। जनजाति समुदाय के लोगों को मिला ये काला सोना एकदम से इनका रहन सहन बदल देता है। गोरों को ये बर्दाश्त नहीं होता। संसद एक कानून बनाकर यहां नई व्यवस्था बनाती है और इस व्यवस्था के समानांतर एक भ्रष्ट तंत्र भी पनपने लगता है। चाचा-भतीजा की एक जोड़ी की नजर इस बस्ती के उन लोगों पर है जिनके पास प्राकृतिक संसाधनों का खजाना है। विरासत के हकदारों की संख्या कम करने के लिए साजिशें रची जाती हैं। कत्ल पर कत्ल होते हैं और फिर मामला उस परिवार तक आता है जिसकी वारिस से भतीजा शादी कर लेता है। शादी के बाद पूरे परिवार की विरासत पर कब्जा करने के लिए एक और बड़ी साजिश शुरू होती है, लेकिन इसके अंजाम तक पहुंचने से पहले ही भंडाफोड़ हो जाता है। मामला राष्ट्रपति तक पहुंचता है। ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (बीओआई) का दखल होता है और मामला चाचा-भतीजे की गिरफ्तारी तक पहुंचता है लेकिन अभी कहानी का अंतिम सिरा पोर दर पोर खुलना बाकी है।

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किलर्स ऑफ द फ्लॉवर मून - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
मार्टिन स्कॉर्सेसे का बेहतरीन सिनेमा

फिल्म ‘किलर्स ऑफ द फ्लॉवर मून’ करीब साढ़े तीन घंटे लंबी फिल्म है। दिलचस्प है ये बात नोट करना कि कभी लंबी फिल्में बनाने के लिए पश्चिम में ‘बदनाम’ रहीं भारतीय फिल्मों का असर अब वहां के सिनेमा पर खूब दिखता है। अपने यहां फिल्में छोटी हो रही हैं और उनकी फिल्में लंबी होती जा रही हैं। लेकिन, मार्टिन स्कॉर्सेसे ने एक लंबी फिल्म को भी शुरू से लेकर अंत तक इतना चुस्ती से बांधकर रखा है कि हर पल कुछ नया दिखने की उत्सुकता अंत तक बनी रहती है। इसमें सबसे बड़ा हाथ तो उस किताब का ही है जिस पर ये फिल्म बनी है। 1919 से लेकर 1921 के कालखंड में घटती ये फिल्म अपने समय को पूरी तरह स्थापित करते आगे बढ़ती है। फिल्म की पटकथा को असरदार बनाने के लिए मार्टिन ने अपने पुराने जोड़ीदार संगीतकार रॉबी रॉबर्टसन के अनुभव का पूरा फायदा उठाया है। दोनों की साथ में ये 11वी और आखिरी फिल्म है। रॉबी का फिल्म की रिलीज के दो महीने पहले ही निधन हुआ। एक मजबूत कहानी पर लिखी चुस्त पटकथा पर मार्टिन स्कॉर्सेसे ने एक ऐसी फिल्म निर्देशित की है, जिसमें न सिर्फ उस समय की सामाजिक परिस्थिति को बहुत कायदे से दर्शाया गया है बल्कि वर्ग विभेद, इंसानी लालच और अकूत संपत्ति हासिल करने की हवस पर भी उन्होंने बहुत अच्छे से कैमरा घुमाया है।

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किलर्स ऑफ द फ्लॉवर मून - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
डी नीरो, कैप्रियो और ग्लैडस्टोन की कमाल तिकड़ी

रॉबर्ट डी नीरो और लियोनार्डो डिकैप्रियो फिल्म ‘किलर्स ऑफ द फ्लॉवर मून’ के दो मजबूत स्तंभ हैं। दोनों अपने स्याह किरदारों में कुछ इस तरह रच बस जाते हैं कि लगता ही नहीं कि ये दोनों ही कहानी के असली विलेन हैं। स्याह किरदारों को लेकर फिल्में बनाने में मार्टिन स्कॉर्सेसे को महारत हासिल रही है, उनकी पहचान ही इस सिनेमा की है। मार्टिन स्कॉर्सेसे के सिनेमा में काले, सफेद के बीच का इलाका इतना विस्तार पाता है कि ये स्याह रंग ही उनके सिनेमा की पहचान बन जाता है। यहां किरदार इंसानी हैं। वे वह सब करते हैं जो संबंधित परिस्थिति में एक आम इंसान करता ही करता। विलियम किंग हेल के किरदार में रॉबर्ट डि नीरो का अभिनय उनकी समृद्ध फिल्मावली का एक ऐसा पड़ाव है जिसका संदर्भ आने वाले तमाम वर्षों मे सिनेमा के छात्रों की चर्चा में आता रहेगा। और, उसी शिद्दत से उनके भतीजे अर्नस्ट बर्कहार्ट का किरदार निभाया है लियोनार्डो डिकैप्रियो ने। प्रथम विश्व युद्ध से लौटे अर्नस्ट की मानवीय संवेदनाओं के साथ जो हुआ, वह उसके बर्ताव में साफ दिखता है। वह आदेश मानने के लिए कुछ इस तरह तैयार हो चुका है कि उसे अपने कृत्यों में अच्छे और बुरे का फर्क नजर आना बंद हो चुका है। लेकिन, इन स्याह तूफानों के झंझावात में रोशनी की किरण बनकर चमकती है अर्नस्ट की पत्नी बनी लिली ग्लैडस्टोन की अदाकारी। उसे जब पता चलता है कि उसका पति ही उसके परिजनों की हत्या की साजिश में शामिल रहा है तो उस दृश्य में लिली के चेहरे के भाव देखने लायक हैं। अभिनय की पाठशालाओं में ये दृश्य आने वाले समय में खूब दिखाया जाने वाला है।

Killers of the Flower Moon Review in Hindi Martin Scorsese Leonardo dicaprio Robert di niro lily gladstone
किलर्स ऑफ द फ्लॉवर मून - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
सहायक कलाकारों की बेजोड़ अदाकारी

फिल्म ‘किलर्स ऑफ द फ्लॉवर मून’ के इन तीन मुख्य कलाकारों के अलावा फिल्म में ऐसे और कई कलाकार हैं जो इस फिल्म को मजबूत सहारा देते हैं और मार्टिन स्कॉर्सेसे के सिनेमा को एक अलग स्तर तक ले जाते हैं। थॉमस ब्रूस व्हाइस सीनियर के किरदार में जेसी प्लेमोंस ने फिल्म का एक अलग टेंट पोल संभाले रखा है। तफ्तीश के दौरान की उनकी कोशिशें फिल्म को एक नया प्रवाह देती हैं। हेल के वकील बने ब्रेंडन फ्रेजर का जिरह करने का अंदाज भी काबिले तारीफ है। इनके अलावा मोली की मां बनी टैंटू कार्डिनल, सरकारी वकील जॉन लिथगो और साजिशों के साझीदार रहे केलसी मॉरिसन के रूप में लुई कैंसिलमी का अभिनय भी फिल्म के इंद्रधनुषी विस्तार में मदद करता है। रॉबी रॉबर्टसन का संगीत तो फिल्म की जान है ही, सौ साल पहले के कालखंड को कैमरे के जरिये परदे पर सजाने में इसके सिनेमैटोग्राफर रॉड्रिगो प्रीटो की मेहनत भी सिनेमैटोग्राफी की किसी टेक्स्ट बुक सरीखी ही है। थेल्मा स्कूनमेकर का संपादन फिल्म के निर्देशक की संवेदनाओं के अनुसार ही है, हालांकि फिल्म का इतना लंबा होना मौजूदा दौर के तमाम दर्शकों को थका भी सकता है लेकिन यदि आपको अच्छी फिल्में देखने का शौक रहा है तो इस फिल्म की लंबाई उतना परेशान नहीं करती है।

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