Jigarthanda Double X Review: ‘बच्चन पांडे’ जैसी निकली जिगरठंडा डबल एक्स, राघव लॉरेंस की ओवरएक्टिंग की दुकान
फिल्म का मूल कथानक यह है कि सिनेमा के माध्यम से कैसे समाज की दशा और दिशा बदली जा सकती है। इसी विषय पर एक साधारण सी पटकथा लिख कर एक प्यारी सी फिल्म बनाई जा सकती थी जो फिल्म के इंटरवल के बाद फिल्म में थोड़ी सी दिखती भी है। लेकिन पूरी फिल्म में एक्शन ही एक्शन है और इन दृश्यों में बैकग्राउंड म्यूजिक इतना लाउड है कि सुनकर सिर दर्द होने लगता है। फिल्म की इकलौती खासियत सिर्फ यह है कि फिल्म में 1975 के दशक की पृष्ठभूमि को बहुत अच्छे तरह से पेश किया गया है। उस दौर की वेशभूषा और मेकअप पर गहराई से ध्यान दिया गया है।
फिल्म में गैंगस्टर सीजर की भूमिका अभिनेता राघव लॉरेंस ने निभाई है। वह अपनी कई पिछली फिल्मों की तरह ही इस फिल्म में भी लाउड एक्टिंग करते ही नजर आए। किरदार में जो विविधता आनी चाहिए वह उनके किरदार में नजर नहीं आई। इंटरवल के बाद उन्होंने खुद को थोड़ा सा संभालने की कोशिश जरूर की है। किरुबाकर की भूमिका में एसजे सूर्या का सहज अभिनय प्रभावशाली रहा है। गैंगस्टर सीजर की पत्नी की भूमिका में निमिषा सजयन, डीएसपी की भूमिका में नवीन चंद्रा के अलावा सैथयान, अरवीन्द्र प्रकाश और फिल्म के बाकी कलाकारों ने अपनी-अपनी भूमिका के साथ पूरी तरह से न्याय करने की कोशिश की लेकिन बात बनी नहीं। थिरू की सिनेमॅटोग्राफी अच्छी है, खास करके जंगल वाले दृश्य मन मोह लेते हैं। शफीक मोहम्मद अली का संकलन सामान्य हैं, कम से कम इस फिल्म से 20 मिनट के सीन पर उन्हें कैची चलाने की जरूरत थी । संतोष नारायण का संगीत साउथ की फिल्मों के हिसाब से ठीक है, लेकिन हिंदी डबिंग में उनका संगीत सिर्फ शोर ही है, जो हिंदी पट्टी के दर्शकों के कानों को राहत नहीं देता है।