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Hindi News ›   Entertainment ›   Movie Reviews ›   Friday Night Plan Review in Hindi by Pankaj Shukla Babil Khan Juhi Chawla Farhan Akhtar Vatsal Netflix India

Friday Night Plan Review: बाबिल के सामने इरफान की छाया से निकलने की चुनौती, पढ़िए कहां चूकी फ्राइडे नाइट प्लान

Sat, 02 Sep 2023 11:48 AM IST
Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Sat, 02 Sep 2023 11:48 AM IST
सार

गुणवत्ता के हिसाब से फिल्म ‘फ्राइडे नाइट प्लान’ बहुत औसत सी फिल्म है। निर्माताओं के रूप में इससे फरहान अख्तर और रितेश सिधवानी का नाम भी जुड़ा है और इसके नेटफ्लिक्स पर रिलीज होने की सबसे बड़ी वजह भी यही दिखती है।
 

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Friday Night Plan Review in Hindi by Pankaj Shukla Babil Khan Juhi Chawla Farhan Akhtar Vatsal Netflix India
फ्राइडे नाइट प्लान रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
Movie Review
फ्राइडे नाइट प्लान
कलाकार
बाबिल खान , अमृत जयन , आध्या आनंद , रिया चौधरी , मेधा राणा , आदित्य जैन , निनाद कामत और और जूही चावला
लेखक
वत्सल नीलकंठन
निर्देशक
वत्सल नीलकंठन
निर्माता
फहरान अख्तर , रितेश सिधवानी और और कासिम जगमगिया
ओटीटी
नेटफ्लिक्स
रिलीज
1 सितंबर 2023
रेटिंग
2/5

विस्तार

हिंदी सिनेमा में अपने प्रभावशाली अभिनय से अमिट छाप छोड़ने वाले दिवंगत अभिनेता इरफान के बेटे बाबिल खान की दूसरी फिल्म है, ‘फ्राइडे नाइट प्लान’। अभिनेता के तौर पर उनकी बोहनी नेटफ्लिक्स की ही फिल्म ‘कला’ से हुई और पहली बार जब उन्हें कैमरे के सामने अपने हुनर दिखाने का मौका मिला, तो दर्शकों को उनसे जो भी अपेक्षाएं रहीं, उन पर वह खरे उतरे। इरफान का नाम जुड़ा होने से बाबिल को दर्शकों को काफी हद तक सहानुभूति भी मिलती है और इसका फायदा ये होता है कि फिल्म कैसी भी हो, उसको ओटीटी पर व्यूज मिल ही जाते हैं। ओटीटी का पूरा गेम प्लान ही यही है, फिल्म अच्छी है या खराब, उस पर चर्चा होती रहे तो होने दो, माल बिकता रहना चाहिए। गुणवत्ता के हिसाब से फिल्म ‘फ्राइडे नाइट प्लान’ बहुत औसत सी फिल्म है। निर्माताओँ के रूप में इससे फरहान अख्तर और रितेश सिधवानी का नाम भी जुड़ा है और इसके नेटफ्लिक्स पर रिलीज होने की सबसे बड़ी वजह भी यही दिखती है।

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Friday Night Plan Review in Hindi by Pankaj Shukla Babil Khan Juhi Chawla Farhan Akhtar Vatsal Netflix India
फ्राइडे नाइट प्लान रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

अच्छा विचार, कमजोर विस्तार
फिल्म ‘फ्राइडे नाइट प्लान’ अपने विचार के हिसाब से एक कमाल की फिल्म हो सकती थी। बाबिल ने फिल्म यही सोचकर की होगी। दो भाइयों के रिश्ते पर अब फिल्में बनती भी बहुत कम हैं। व्हाट्सएप के जमाने में दूसरे रिश्ते भी अब बातों से कम और संदेशों से ज्यादा चलते हैं। एक ही स्कूल में पढ़ने वाले दो भाइयों की ये कहानी गजब विस्तार पा सकती थी। पर, अपनी फिल्म की कहानी खुद ही लिखने वाले निर्देशक वत्सल नीलकंठन शायद दो विभाग एक साथ संभाल पाने लायक आत्मविश्वास अभी जुटा नहीं पाए हैं। फिल्म की सबसे कमजोर कड़ी इसकी पटकथा है और इसके चलते जो फिल्म उत्साह, उल्लास और किशोरवय ऊर्जा की हाईस्कूल ड्रामा फिल्म बन सकती थी, उससे ये चूक गई है। हिंदी सिनेमा में हाईस्कूल ड्रामा फिल्में बहुत कम बनी हैं और इनका जिक्र आने पर लोगों को ले देकर याद आती हैं तो बस ‘जो जीता वही सिकंदर’ और उससे भी पहले बनी ‘हिप हिप हुर्रे’ जैसी फिल्में।

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Friday Night Plan Review in Hindi by Pankaj Shukla Babil Khan Juhi Chawla Farhan Akhtar Vatsal Netflix India
फ्राइडे नाइट प्लान रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

नहीं बन पाई दो भाइयों की स्नेह कथा
वत्सल नीलकंठन की फिल्म ‘फ्राइडे नाइट प्लान’ अपने नाम से उत्सुकता जगाती है। हमेशा एक दूसरे की टांग खींचते रहने वाले दो भाइयों में एक अभी अभी 18 साल का हुआ है। स्कूल खत्म करके किसी कॉलेज में एडमिशन लेने का उस पर दबाव और तनाव दोनों हैं। छोटा भाई थोड़ा मस्तीखोर है। फुटबॉल मैच में गोल करके बड़ा भाई स्कूल का हीरो बन जाता है और उसी रात होने वाली फ्राइडे पार्टी में उसे न्योता भी मिल जाता है। मां कारोबारी सिलसिले में शहर से बाहर है तो दोनों भाई उसकी कार लेकर पार्टी में चले जाते हैं। मध्यमवर्गीय परिवार के बच्चों को रईस घरानों के बच्चों के साथ मेलजोल करने मे जो दिक्कतें आती हैं, वह इस फिल्म की कमाल की अंतर्कथा हो सकती थी। लेकिन, फिल्म की पटकथा इतनी तेज भागती है कि इसका कोई भी भाव स्थायी तौर पर दर्शकों के दिमाग में असर नहीं छोड़ पाता है।

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फ्राइडे नाइट प्लान रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

बाबिल के सामने बाबा की चुनौती
फिल्म ‘फ्राइडे नाइट प्लान’ को कलाकार कमाल के मिले हैं। बाबिल खान फिल्म दर फिल्म प्रगति कर रहे हैं। कथानक में हाशिये पर पड़े किरदार को मुख्यधारा में आने का मौका मिलना उनकी पिछली फिल्म का भी गुणसूत्र था और यहां भी उनका किरदार कुछ कुछ वैसी ही है। अभिनय में वह अपने पिता इरफान की बार बार याद दिलाते हैं। जब भी दृश्य भीतर ही भीतर घुटते इंसान का सामाजिक दस्तूरों के साथ चलने की कोशिश का होता है, और कैमरा उनकी आंखों के करीब जाने की कोशिश करता है, तो झटका लगता है कि कहीं ये इरफान ही तो नहीं है। ये बात बाबिल के हक में भी जाती है और उनके खिलाफ भी। अपने पिता के अभिनय की छाया उनकी तरफ दर्शकों को खींचकर तो ला सकती है लेकिन उन्हें अपने अभिनय का अनदेखा विस्तार जल्द से जल्द दर्शकों के सामने परोसना होगा, नहीं तो उनके अगला अभिषेक बच्चन, राहुल खन्ना या तुषार कपूर बनने में देर नहीं लगेगी।

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फ्राइडे नाइट प्लान रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

आध्या और मेधा के अभिनय का दिखा असर
वत्सल नीलकंठन ने एक काम फिल्म में अच्छा किया है और वह है स्कूली छात्रों के रूप में बढ़िया कलाकारों का चयन। बाबिल के छोटे भाई का किरदार कर रहे अमृत का काम गौर करने लायक है। कच्ची उम्र में जिस तरह की मस्ती वाला अंदाज कैमरे के सामने उन्होंने जिया है, वह उन्हें आने वाले दिनों में मदद कर सकता है। आध्या आनंद का काम प्रभावी है और मेधा राणा पर भी फिल्म देखते समय निगाहें अटकती हैं। फिल्म की कमजोरी ये भी है कि कहानी के रूमानी पहलुओं के बीज बोने के बाद इसकी पटकथा इनको पनपने का मौका नहीं दे पाती है। जैसा दो भाइयों के रिश्तों का तार बीच में ही कहीं छूट जाता है, वैसे ही ये रूमानी धागा भी उड़ान पाने से पहले ही सद्दी से कट जाता है। अभिनय के लिहाज से हर युवा कलाकार ने अच्छा प्रयास किया है लेकिन पटकथा की कमजोरी इसका असर स्थायी नहीं रहने देती। निनाद कामत फिल्म में भर्ती के सितारे लगते हैं और जूही चावला का फिल्म में होना न होना कोई खास मायने नहीं रखता।

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फ्राइडे नाइट प्लान रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

एक्सेल एंटरटेनमेंट की कमजोर फिल्म
एक्सेल एंटरटेनमेंट के नाम से रिलीज हुई फिल्म ‘फ्राइडे नाइट प्लान’ तकनीकी तौर पर कोई खास कमाल नहीं दिखाती है। फुटबॉल मैच वाले दृश्य में ही दिख जाता है कि फिल्म के सिनेमैटोग्राफर कृष मखीजा के पास अपना हुनर दिखाने की कोई अलग सोच नहीं हैं। फिल्म का संपादन और संगीत भी बहुत सामान्य है। 109 मिनट की ये फिल्म अपने समय के हिसाब से दर्शकों के निवेश पर कोई खास मनोरंजक रिटर्न देने में नाकाम है। फिल्म सिर्फ बाबिल के लिए देखनी हो तो अलग बात है नहीं तो इस वीकएंड देखने को सिनेमाघरों में कमाल की एक्शन थ्रिलर ‘इक्वलाइजर 3’ है और ओटीटी पर ‘स्कैम 2003’!

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