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उलझाऊ है रक्त का थ्रिल

Mon, 30 Sep 2013 04:38 PM IST
अमर उजाला मुंबई/ रवि बुले
अमर उजाला मुंबई/ रवि बुले Updated Mon, 30 Sep 2013 04:38 PM IST
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film review of rakt

जिंदगी में कभी ऐसे मोड़ भी आते हैं जब रक्त संबंधों में कोई ऊष्मा बची नहीं रह जाती और वे सिर्फ ‘रिकॉर्ड के लिए’ होते हैं। कुछ फिल्में भी इसी श्रेणी में आती हैं। जो सिर्फ शुक्रवार को रिलीज होने के कारण किताबों में दर्ज रहती हैं।

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निर्देशक जोड़ी अदि ईरानी और शिवा रिंदन की ‘रक्त’ भी ऐसी ही समझिए। रक्त साइको थ्रिलर है, जो निर्देशकों की नाकामी के कारण पूरे दो घंटे यहां-वहां भटकती है। अंत भी ऐसा कि दर्शक सोच में पड़ जाता है। सवाल पैदा होता है कि क्या निर्देशक जोड़ी को कहानी की कोई समझ है भी?

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फिल्म एक गोद ली हुई बच्ची के अपनी मां के प्रति ‘ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसॉर्डर’ की कहानी है। इस बच्ची को ‘सिंगल मदर’ से इतना प्यार है कि वह किसी और व्यक्ति को उसके नजदीक नहीं देख सकती। नतीजा यह कि उसकी सुपरस्टार हीरोइन मां सोनिया (श्वेता भारद्वाज) हमेशा उसकी ही देख-रेख करती रहती है।
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कहानी में ट्विस्ट तब आता है जब सोनिया की फिल्म का निर्देशक उससे प्यार कर बैठता है। मां का प्यार बंटने से नाराज नन्हीं सुहानी निर्देशक के सिर पर हथौड़ा मार कर उसकी हत्या कर देती है! मां इल्जाम अपने सिर लेती है और जेल चली जाती है।

देखें रक्त का ट्रेलर



साल गुजरते हैं। बोर्डिंग स्कूल में पढ़ती हुई सुहानी (शीना शाहबादी) बड़ी होती है। मां के लिए उसका प्यार पहले जैसा ही रहता है। इस चक्कर में वह दो खून और करती है...! आखिर में एक युवराज (गुलशन ग्रोवर) सोनिया की जिंदगी में आता है और सुहानी के राज जान जाता है।

युवराज मनोचिकित्सक है। क्या वह सुहानी को ठीक कर सकेगा या फिर सुहानी ही उसे ठिकाने लगा देगी...? अगर आप इस सवाल का जवाब जानना चाहें तो ‘रक्त’ देखें।
फिल्म की कहानी पूरी तरह बिखरी हुई है।

उसमें कसावट नहीं है और इक्का-दुक्का मौकों को छोड़ कर कलाकारों का अभिनय भी नहीं बांधता। विवेक ओबेराय और जाएद खान स्टारर ‘मिशन इस्तांबुल’ (2008) से कैरियर शुरू करने वाली श्वेता भारद्वाज पांच साल बाद भी स्टार्टिंग पॉइंट पर खड़ी हैं।


यही हाल ‘नदिया के पार’ (1982) जैसी फिल्म के लिए याद की जाने वाली साधना सिंह की बेटी शीना का है। टीनेज प्रेग्नेंसी पर 2009 में बनी ‘तेरे संग’ (निर्देशकः सतीश कौशिक) से शीना ने फिल्मी दुनिया में कदम रखा था। ‘रक्त’ दोनों अभिनेत्रियों को स्थापित करने के उद्देश्य से बनाई गई है, लेकिन इससे बात बनती नजर नहीं आती।

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