फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Entertainment ›   Movie Review ›   film review of raabta starring sushant singh rajput and kriti sanon

Movie Review: काम चलाऊ कैमेस्ट्री और तर्कहीन कहानी है 'राब्ता'

Sun, 11 Jun 2017 07:41 AM IST
रवि बुले
रवि बुले Updated Sun, 11 Jun 2017 07:41 AM IST
विज्ञापन
film review of raabta starring sushant singh rajput and kriti sanon
राब्ता

फिल्मों का भी पुनर्जन्म होता है। वही कहानी, वही सीन, वही काले-गहरे रहस्य और अंत में वही ट्विस्ट। देखा-सुना सब लौट-लौट कर आता है। आप नयापन ढूंढते रह जाते हैं। राब्ता का मामला ऐसा ही है। अगर आपको सुशांत सिंह राजपूत पसंद नहीं तो फिल्म देखना भारी लगेगा।

विज्ञापन


राजाओं के जमाने की शताब्दियों पुरानी बातें तो मॉडर्न जमाने के हंगरी में भारतीय हीरो-हीरोइन-खलनायक। सब चुंचु का मुरब्बा बन जाता है। पुनर्जन्म की कहानी के 21वीं सदी से कनेक्शन में कई बातें तर्कहीन लगती हैं।
विज्ञापन


पिछले साल ही दर्शकों ने पुनर्जन्म वाली मिर्जिया को हवा में उड़ा दिया था मगर राब्ता को सुशांत-कृति का रोमांस, कुछ हठीली-कॉमिक बातें और बुडापेस्ट के लोकेशन बचाते हैं। फिर भी फिल्म कहीं-कहीं दादा-परदादा के जमाने की लगती है आप उससे कनेक्ट नहीं कर पाते।

विज्ञापन
विज्ञापन

इस तरह होता है 'सायरा' से प्यार

film review of raabta starring sushant singh rajput and kriti sanon
राब्ता
हमेशा बकबक करने वाले शिव (सुशांत सिंह राजपूत) का दावा है, ‘लड़की तो मैं ही ले जाऊंगा।’ उसे लगता है कि हर लड़की उससे फ्लर्ट करने के लिए बनी है। इसी सोच के साथ दिलफेंक अंदाज में बढ़ते-बतियाते उसे बुडापेस्ट में सायरा (कृति सैनन) मिलती है और देखते-देखते दोनों में प्यार हो जाता है।

यह रोमांस और चुबचुबली बातें सरल रेखा-सी आगे बढ़ रही होती हैं कि खलनायक (जिम सारभ) की एंट्री होती है। अकूत संपत्ति का मालिक शराब कारोबारी। जो अक्सर हेलीकॉप्टर में उड़ता है। अचानक आप पाते हैं कि रोमांस की जगह खलनायक की दीवानगी ने ले ली और नायिका का अपहरण कर लिया। तब पुनर्जन्म का ट्रेक शुरू हो जाता है और एक जांबाज योद्धा को एक बहादुर राजकुमारी से प्यार हो जाता है। परंतु योद्धा के लिए राजकुमारी को पाना आसान नहीं।

भयंकर युद्ध में प्यार बलिदान मांगता है और सदियों बाद उसकी रंगत फिर नए जमाने में बिखरती है। क्लाइमेक्स समेत आप कुछ तर्कहीन बातें पचा सकें और सिर्फ सुशांत-कृति की कैमेस्ट्री से काम चला सकें तो राब्ता आपके लिए है। पुनर्जन्म के कथानकों वाली मधुमति, महल, नील कमल, कुदरत, कर्ज और करन-अर्जुन जैसी फिल्मों से राब्ता कहीं पीछे है। सुशांत अच्छे ऐक्टर हैं परंतु कृति को सहज होने के लिए कोशिशें करनी पड़ी है।

जिम सारभ नीरजा में जितने फिट थे, यहां उतने ही कहानी और संदर्भों से बाहर हैं। इन सबके बीच दीपिका पादुकोण की झलक में चमक नहीं दिखती। निर्देशक के रूप में दिनेश विजन की यह पहली फिल्म है। यहां उनकी दृष्टि उतनी नहीं उभरती जितनी तकनीक, कैमरे और लोकेशन का कमाल।
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें Entertainment News से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। मनोरंजन जगत की अन्य खबरें जैसे Bollywood News, लाइव टीवी न्यूज़, लेटेस्ट Hollywood News और Movie Reviews आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed