{"_id":"676da8d60c4bfe9d08023e09","slug":"doctors-web-series-review-by-pankaj-shukla-siddharth-p-malhotra-sharad-kelkar-jio-harleen-vivaan-viraf-aamir-2024-12-27","type":"wiki","status":"publish","title_hn":"Doctors Review: डॉक्टरों की अनसुनी भावुक कहानियां दिखाकर शरद, हरलीन ने जीते दिल, जियो की साल की बेहतरीन सीरीज","category":{"title":"Movie Reviews","title_hn":"मूवी रिव्यूज","slug":"movie-review"}}
Doctors Review: डॉक्टरों की अनसुनी भावुक कहानियां दिखाकर शरद, हरलीन ने जीते दिल, जियो की साल की बेहतरीन सीरीज
विज्ञापन
'डॉक्टर्स' रिव्यू
- फोटो : अमर उजाला
Movie Review
डॉक्टर्स
कलाकार
शरद केलकर
,
हरलीन सेठी
,
विराफ पटेल
,
टीना सिंह
,
विवान शाह
,
आमिर अली
,
सारा हाशमी
,
निहारिका दत्त
,
अभिशेख खान
और
वंश सेठी आदि
लेखक
सिद्धार्थ पी मल्होत्रा
,
शिबानी केशकामत
,
राधिका आनंद
,
साहिर रजा
और
भरत मिश्रा
निर्देशक
शाहिर रजा
निर्माता
ज्योति देशपांडे
,
सिद्धार्थ पी मल्होत्रा
और
सपना मल्होत्रा
रिलीज:
27 दिसंबर 2025
रेटिंग
3.5/5
अगर आपको टेलीविजन पर आया सीरियल ‘संजीवनी’ याद है तो आपको ये भी याद होगा कि भारत में चिकित्सा सेवा पद्धति और चिकित्सकों की रोजमर्रा की कामकाजी जिंदगी के बीच रास्ता तलाशती उनकी निजी जिंदगी की कहानियों पर फिल्में या सीरीज बहुत कम बनी हैं। ‘संजीवनी’ और ‘दिल मिल गए’ जैसे चिकित्सकीय धारावाहिक बनाने वाली कंपनी एलकेमी फिल्म्स अब लेकर आई है देश की पहली चिकित्सकीय वेब सीरीज ‘डॉक्टर्स’, जिसके बारे में न तो जियो सिनेमा ने ज्यादा प्रचार किया है और न ही इसके सितारों ने। बड़े ही गुपचुप तरीके से रिलीज हो रही वेब सीरीज‘डॉक्टर्स’ एक संवेदनशील कहानी है। इसमें रिश्तों की चीरफाड़ है, तानों के नश्तर हैं, दोस्ती का मरहम है और है प्रेम कहानी का छूने में अच्छा लगता फाहा भी।
विज्ञापन
'डॉक्टर्स' रिव्यू
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
वेब सीरीज ‘डॉक्टर्स’ एक ऐसे पंचसितारा अस्पताल और इसमें काम करने वाले डॉक्टरों की कहानी है जिसे शहर की पुलिस थाने पर हमला होने की सूरत में सरकारी अस्पताल से ज्यादा तवज्जो देती है। ये किस्सा हालांकि वेब सीरीज के बीच में आता है। सीरीज की शुरुआत उस रहस्य के साथ होती है कि अपने भाई को अपाहिज करने के लिए जिस डॉक्टर ईशान को डॉक्टर नित्या जिम्मेदार मानती है, उससे वह बदला कैसे लेगी? नित्या के बैच में और भी डॉक्टर हैं। रेजीडेंट डॉक्टरों की रोजमर्रा की जिंदगी की दिक्कतें दर्शाती इस सीरीज में एक वर्चुअल लैब भी है, जहां डॉक्टर ईशान अपनी गलती सुधारने के लिए लगातार प्रयोग कर रहा है। डॉ. अभि उसका मददगार है। और, देखने वाली बात ये होती है कि अब शायद नित्या को ईशान से प्यार है। कहानी आगे किस करवट बैठती है, इसके लिए सीरीज देखना मुनासिब होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
'डॉक्टर्स' रिव्यू
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
हर हफ्ते थोक के भाव ओटीटी पर आने वाली मनोरंजन सामग्री में से सबको देखना और उनका रिव्यू लिखना आसान नहीं। वेब सीरीज ‘डॉक्टर्स’ भी यूं ही हाशिये पर जानी थी, लेकिन एक बार इसका पहला एपिसोड देखने के बाद महसूस हुआ कि ये सीरीज जियो सिनेमा पर क्या कर रही है, इसे तो नेटफ्लिक्स पर होना चाहिए था। औसतन 35 मिनट के 10 एपिसोड वाली ये सीरीज इस वीकएंड पर बिंज वॉच के लिए परफेक्ट है। बस, अगर आपने किसी अपने को अस्पताल में इलाज के दौरान खोया है तो संभलकर देखिएगा क्योंकि सीरीज है ये बड़ी ही इमोशनल और इसके चलते आपकी आंखें बार बार भर आएंगी। सौतेले पिता का ऑपरेशन करते चिकित्सक पर सब यही शक करते हैं कि ये उसे मार देगा क्योंकि दोनों की पटती जो नहीं है। वह कहता भी है, ‘मैं भी इंसान हूं कोई मशीन नहीं कि हर काम परफेक्ट करता रहूं। गलती मुझसे भी हो सकती है।’
'डॉक्टर्स' रिव्यू
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
लेकिन, कितने लोग होंगे हमारे बीच जो किसी अस्पताल में किसी अपने को खोने पर इस बात को सोच भी पाते होंगे कि मरीजों का इलाज करने वाले भी विकट मानसिक परिस्थिति से गुजर रहे होते हैं। हम बस उन्हें वर्दी पहने डॉक्टर या नर्स के रूप में देखते हैं। भूल जाते हैं कि उस सफेद कोट के पीछे एक इंसान है जिसकी अपनी जिंदगी में प्रेमिका रूठी हुई हो सकती है। भाई अपाहिज हो सकता है। ड्रग्स की लत छुड़ाने की जद्दोजहद से वो गुजर रहा हो सकता है और ये भी कि किसी अपने साथी को बचाने के लिए वह उसका गुनाह अपने सिर ढो रहा हो सकता है। क्रिकेटर्स की अनैतिक मदद करने से लेकर दिमाग के ऑपरेशन के समय पसंदीदा गीत गाने तक की असल घटनाएं इस सीरीज में शामिल हैं। परदे पर जो ऑपरेशन दिखते हैं वे सब असली चिकित्सकों ने किए हैं। और, एक तरह से देखा जाए तो वेब सीरीज ‘डॉक्टर्स’ इसके रचयिता सिद्धार्थ पी मल्होत्रा की अपने डॉक्टर नाना को दी गई सच्ची श्रद्धांजलि है जो 96 साल की उम्र तक मरीजों का इलाज करते रहे। सिद्धार्थ ने ये सीरीज बहुत जतन से बनाई है, वैसे ही जैसे उन्होंने आमिर खान के बेटे जुनैद की पहली फिल्म ‘महाराज’ बनाई।
'डॉक्टर्स' रिव्यू
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
इस साल के आखिरी शुक्रवार को रिलीज हुई वेब सीरीज ‘डॉक्टर्स’ इस साल की बेहतरीन वेब सीरीज में शुमार होने का दम रखती है। सीरीज अपने मकसद में कामयाब है और चूंकि इसे लिखा आधा दर्जन के करीब लेखकों ने हैं तो कुछ बुनियादी बातें ये सीरीज दिखाने से चूक गई है। मसलन किसी आपराधिक मामले में एंबुलेंस से इमरजेंसी तक मरीजों के पहुंचने के बीच की होने वाली लिखापढ़ी भी जरूरी होती है। मेडिको लीगल केस में घायल और डॉक्टर के बीच पुलिस आती है और पुलिस ही जब घायल हो तो उसे पहले सरकारी अस्पाल लेकर जाने की बात आती है। यहां 19 लोग मारे जाते हैं और घायलों के पीछे पीछे प्रशासनिक अमले की चिड़िया चूं तक करती नहीं दिखती। मीडिया के जो कैमरे क्रिकेटर के एक्सीडेंट को कवर करने आए थे, वे पुलिस कर्मियों के शहीद होने पर क्यों नहीं आए?
'डॉक्टर्स' रिव्यू
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
वेब सीरीज ‘डॉक्टर्स’ की कहानी ठीक है, पटकथा रफ्तार से चलती है, संवाद भी कूल रखे गए हैं। लेकिन, राधिका आनंद को जानकारी होनी चाहिए कि सूबेदार फौज में होते हैं, पुलिस में नहीं। विवियन सिंह साही की सिनेमोग्राफी काबिले तारीफ है। उनका कैमरा दर्शकों को कहानी का हिस्सा पहले एपिसोड से ही बनाने में कामयाब रहता है। सीरीज का बैकग्राउंड म्यूजिक और संपादन आदि भी अच्छा है। अदाकारी में ये सीरीज शरद केलकर और हरलीन सेठी की है। शरद केलकर की दो तीन दिन की दाढ़ी उन्हें कूल लुक देती है लेकिन ऑपरेशन थियेटर में काम करने वाले डॉक्टर अमूमन दाढ़ी मूंछ सफाचट ही रखते हैं। हरलीन सेठी सीरीज दर सीरीज अपनी जगह बनाती चल रही हैं। विवान शाह और उनके बीच की केमिस्ट्री लाजवाब है। विराफ पटेल का अभिनय भी असरदार है। कुल मिलाकर बिंच वॉच लायक बन पड़ी वेब सीरीज ‘डॉक्टर्स’ को देखते समय इस बात की कसक बाकी रह जाती है कि इसकी छोटी छोटी कमियां दूर कर ली जातीं तो ये सीरीज ‘संजीवनी’ के आगे की बात हो सकती थी।