Series Review: सोनी का शो तारा फ्रॉम सातारा नहीं देखा तो टीवी नहीं देखा!
डिजिटल रिव्यू: तारा फ्रॉम सातारा (टीवी सीरीज)
कलाकार: रोशनी वालिया, शीजान मोहम्मद, अश्विनी कौल, उर्वशी परदेशी, अमिता खोपकर और उपेंद्र लिमये आदि।
सृजक: रंजीत ठाकुर और हेमंत रूपरेल
निर्माता: फ्रेम्स प्रोडक्शन और आइडिया रैक
रेटिंग: ****
छोटे परदे का दायरा अब बड़ा हो चला है। पहले टीवी सीरीज टेलीविजन पर प्रसारित होती है, उसी रात या अगली सुबह तक नया एपीसोड ओटीटी पर आ जाता है। धीरे धीरे टेलीविजन के पारंपरिक दर्शकों में भी तय समय पर धारावाहिक देखने की बजाय अपनी सहूलियत के अनुसार इसे ओटीटी पर देखने की ललक बढ़ी है। सोनी टेलीविजन का शो तारा फ्रॉम सातारा भी टेलीविजन से निकलकर डिजिटल दुनिया तक चर्चा पाने वाला नया शो बन गया है।
तारा फ्रॉम सातारा ने गुरुवार को अपने प्रसारण का एक महीना पूरा किया। इस एक महीने ने इस शो ने वैसे ही लोकप्रियता हासिल कर ली है जैसी टीवीएफ की हाल के दिनों में बनाई सीरीज गुल्लक या उससे पहले ये मेरी फैमिली को मिली। पारिवारिक मूल्यों की स्थापना करती ये नई सीरीज उस संकल्प को भी दोहराती हैं कि डिजिटल दुनिया में मनोरंजन सिर्फ गंदी बात या सेक्रेड गेम्स से ही नहीं हो सकता। कंटेंट दमदार हो तो लोग वैसी सीरीज भी इन दिनों खूब देखते हैं, जिन पर दूरदर्शन टाइप सीरीज का टैग आसानी से तमाम समीक्षक चिपका देते हैं।
दूरदर्शन वाले दिनों यानी कि असल भारत की कहानी कहती सीरीज तारा फ्रॉम सातारा की कहानी स्थापित हो चुकी है। एक नृत्य शिक्षक की बेटी तारा अपने खिलंदड़ स्वभाव के चलते परेशानी का सबब बन चुकी है। बड़ी बहन अपने पिता की अर्जुन है औऱ तारा एकलव्य। दोनों की शख्सीयत का टकराव दरअसल नई सदी के युवाओं की सोच भी दर्शाता है। नई पीढ़ी भले माता पिता की सीखों को सुनने को तैयार न हो लेकिन वह जिम्मेदार है और अपने सपने पूरे करने के लिए सही रास्ता चुनना भी जानती है।
तारा फ्रॉम सातारा का सबसे मजबूत विभाग है इसके कलाकारों की अदाकारी। उपेंद्र लिमये जैसे अभिनेता को हिंदी टेलीविजन पर देखना ही सुख देता है। रोशनी वालिया की अपनी फैन फॉलोइंग रही है और इस बार उन्होंने ग्लैमर का मेकअप उतार जमीनी हकीकत की मिट्टी को मजबूती से थामा है। अमिता खोपेकर और उर्वशी परदेशी ने सीरियल की कहानी को मजबूत कंधे दिए हैं।
अदाकारी के अलावा सीरीज तारा फ्रॉम सातारा अपनी ताजगी और कहानी कहने के अनोखे अंदाज के लिए भी देखी जा सकती है। सुधार की गुंजाइश हर जगह होती है, वैसी ही यहां भी है। थोड़ा बैकग्राउंड म्यूजिक बेहतर हो सकता है और थोड़ा प्रकाश संयोजन में मेहनत की जरूरत है। महीने भर का हो चुका ये शो आपकी दिन भर की थकान दूर करने का बिल्कुल सही इंतजाम है।