Aquaman 2 Movie Review: ममोआ ने आखिरी डीसीईयू फिल्म को बनाया दर्शनीय, पिता-पुत्र प्रेम की रोचक अंतर्धारा
मार्वल स्टूडियोज से आए दो दिग्गज फिल्मकार जेम्स गन और पीटर साफरान वार्नर ब्रदर्स के डीसी एक्सेंटेंड यूनिवर्स (डीसीईयू) को अब रिबूट करने वाले हैं। इन दोनों के वार्नर ब्रदर्स कंपनी की कमान संभालने के बाद डीसीईयू की जितनी भी फिल्में निर्माणाधीन रहीं, उनमें से जैसन ममोआ के लीड रोल वाली फिल्म ‘एक्वामैन एंड द लॉस्ट किंगडम’ आखिरी फिल्म है। डीसीईयू की पिछले साल रिलीज हुई फिल्म ‘ब्लैक एडम’ के बाद इस साल चार फिल्में रिलीज हुई। उनमें से ये आखिरी है। अब इस फिल्म सीरीज का नया रूप जैसा भी हो, जैसन ममोआ ने अपनी इस आखिरी ‘एक्वामैन’ फिल्म में उन सारे दर्शकों का मनोरंजन करने का भरपूर प्रयास किया है जो उनकी इस किरदार की पांच साल पहले रिलीज हुई पहली फिल्म के बाद से ही इसकी सीक्वल का इंतजार करते रहे हैं।
काल्पनिक कथा में पर्यावरण का असली दर्द
फिल्म ‘एक्वामैन एंड द लॉस्ट किंगडम’ धरती की मौजूदा हालत को एक काल्पनिक कथा से जोड़ती फिल्म है। ग्लोबल वार्मिंग से लेकर समुद्र में फेंके जा रहे कचरे तक को इस फिल्म की अंतर्कथा बनाया गया है। पता चलता है कि आदिकाल के एक ईंधन का प्रयोग करके शैतानी दिमाग वाला एक शख्स धरती का तापमान बढ़ा रहा है और अगर उसे जल्दी न रोका गया तो वह धरती का विनाश कर देगा। इसके साथ वैज्ञानिकों की एक जमात काम कर रही है जिन्हें बर्फ के नीचे की हलचलों का पता चलता है। गहरे समुद्र में शुरू होने वाली खोजबीन के दौरान ही एक ऐसा साम्राज्य सामने आता है जो समुद्र के अंदर बसी दुनिया का खोया हुआ इतिहास है। खोजपरक कहानी में भय का सम्मिश्रण इसके लेखक करते हैं। राजसी खून से रचे गए जादू में फंसा एक पूरा साम्राज्य जीवन पाने को बेताब है। इन्हें रोकने के लिए शत्रु सेना एक्वामैन के बेटे को हथियार बनाना चाहती है। लेकिन, एक्वामैन को मदद मिलती है अपने बिछड़े भाई से जिसके लिए रिश्ते, नाते, प्यार, वफा सब बातें ही दिखती है। किसी तरह दोनों भाई मिलते हैं। मामला किसी तरह सधता है और फिर मिलने का वादा करते दोनों भाई अलग अलग हो जाते हैं।
दर्शनीय कंप्यूटर ग्राफिक्स का असर
फिल्म ‘एक्वामैन एंड द लॉस्ट किंगडम’ को देखने की जो तीन प्रमुख वजहें हैं, उनमें से पहली है समुद्र के अंदर की दुनिया को रचने के लिए इसकी स्पेशल इफेक्ट्स टीम की मेहनत। परदे पर जो कुछ हो रहा है, वह सब कंप्यूटर की मदद से रचा गया है। ऐसा सोचते हुए भी फिल्म के दृश्य खूब आकर्षित करते हैं। खासकर अगर आप ये फिल्म थ्रीडी में देख रहे हैं। फिल्म की पटकथा में बहुत कुछ खास नहीं है लेकिन फिल्म की दृश्यावलियों को कुछ इस तरह आपस में पिरोया गया है कि धरती और जल के बीच पुल बने एक्वामैन का तिलिस्म दर्शकों के सिर चढ़कर बोलता है। ये बात सच है कि इतनी सारी सुपरहीरो की कहानियां देख देखकर दर्शक न सिर्फ मार्वल सिनेमैटिक यूनिवर्स की फिल्मों से बोर हो चले हैं, बल्कि डीसीईयू की पिछली कुछ फिल्मों की कहानियां भी दर्शकों को लुभा नहीं पाईं।
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जैसन ममोआ ने साधी पूरी फिल्म
जैसन ममोओ ने एक तरह से फिल्म ‘एक्वामैन एंड द लॉस्ट किंगडम’ अपने कंधों पर ढोई है। एक बेटे के रूप में अपने पिता के साथ के भावनात्मक दृश्यों के साथ ही एक्वामैन जब अपने बेटे को मछलियों से संवाद स्थापित करने की कोशिश करता दिखता है, तो सिनेमा में इस साल की सबसे लोकप्रिय थीम रही पिता-पुत्र संबंधों से दर्शकों का नाता फिर जुड़ता दिखता है। अपने भाई को कैद से निकालने की कोशिश करने की एक्वामैन की कोशिशें भी दर्शकों से रिश्ता बनाती हैं और जब दोनों भाइयों को उनकी मां एक साथ विदा करते हुए एक दूसरे का ख्याल रखने को कहती है तो एक हॉलीवुड फिल्म होते हुए भी इसमें भारतीय संवेदनाओं की अंतर्धारा साफ नजर आती है। धरती और पाताल की दुनिया के मिलने के क्लाइमेक्स के दृश्यों में एक प्रतिक्रियात्मक दृश्य भारतीय जनमानस का भी फिल्म में शायद इसीलिए ही रखा गया है। जैसन ममोआ अपनी इन कोशिशों में पूरी तरह सफल रहे हैं।
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संपूर्ण पारिवारिक मनोरंजक फिल्म
फिल्म ‘एक्वामैन एंड द लॉस्ट किंगडम’ की चर्चा अंबर हर्ड के कानूनी मामलों को लेकर भी लंबे समय से होती रही है। एक्वामैन की पत्नी के रूप में उनका किरदार हालांकि फिल्म में कुछ खास योगदान नहीं करता है लेकिन उनका इस फिल्म में होना अपने आप में किसी अजूबे से कम नहीं है। निकोल किडमैन जब भी परदे पर आती हैं, अपने साथ भावनाओं का एक ज्वार लेकर आती हैं। उनकी उपस्थिति न सिर्फ कहानी को गरिमा प्रदान करती है बल्कि उनका किरदार फिल्म की कहानी के पोल प्वाइंट भी बनाता चलता है जोकि पूरी फिल्म में बहुत ही गिनती के हैं। करीब दो घंटे चार मिनट की फिल्म ‘एक्वामैन एंड द लॉस्ट किंगडम’ डीसी कॉमिक्स पर बनी फिल्मों के शौकीनों के लिए इस क्रिसमस में परिवार के साथ देखे जा सकने लायक अच्छी फिल्म बन पड़ी है। इसके साथ रिलीज हुई हिंदी फिल्म ‘डंकी’ के आशानुरूप न होने और तेलुगू फिल्म ‘सालार’ के सिर्फ वयस्कों के लिए होने के चलते भी साल की आखिरी छुट्टियों में सिनेमाघरों में पूरे परिवार के साथ जाने का ये फिल्म बेहतर बहाना हो सकती है।
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