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Aankh Micholi Review: सहज अंदाज में रिश्तों के अहमियत की बड़ी बात, भारतीय नारी की उदारता का अनोखा चित्रण

Fri, 03 Nov 2023 10:53 AM IST
Virendra Mishra वीरेंद्र मिश्र
Updated Fri, 03 Nov 2023 10:53 AM IST
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Aankh Micholi Review paresh rawal sharman joshi mrunal thakur Abhimanyu Dasani Umesh Shukla divya dutta film
आंख मिचोली रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
Movie Review
आंख मिचोली
कलाकार
परेश रावल , शरमन जोशी , अभिमन्यु दसानी , मृणाल ठाकुर , दिव्या दत्ता , विजय राज , दर्शन जरीवाला , अभिषेक बनर्जी और ग्रुशा कपूर व अन्य
लेखक
जीतेन्द्र परमार
निर्देशक
उमेश शुक्ला
निर्माता
आशीष वाघ और उमेश शुक्ला
रिलीज
03 नवंबर 2023
रेटिंग
3/5

हर मां बाप का सपना होता है कि किसी तरह से उनके बच्चों की जिंदगी संवर जाए।  इसके लिए अगर जीवन में झूठ भी बोलना पड़े, तो इसमें उनको झिझक नहीं होती है, क्योंकि सवाल बच्चों के भविष्य का होता है।  लेकिन इसके लिए मन में आत्मग्लानि भी होती है और जीवन भर  इस बात का डर लगा रहता है कि अगर झूठ पकड़ा गया तो क्या होगा ? 'ओह माय गॉड', 'आल इज वेल',  '102 नॉट आउट' जैसी फिल्मों का निर्देशन कर चुके उमेश शुक्ला  एक बार फिर दर्शकों के चेहरे पर 'आंख मिचोली' के जरिए मुस्कान लाने जा रहे हैं।  उमेश शुक्ला की फिल्मों की खसियत यह होती है कि अपनी फिल्मों के माध्यम से बहुत ही सहज अंदाज में बहुत बड़ा संदेश दे देते हैं।   

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Aankh Micholi Review paresh rawal sharman joshi mrunal thakur Abhimanyu Dasani Umesh Shukla divya dutta film
आंख मिचोली रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

फिल्म 'आंख मिचोली' एक ऐसे अतरंगी परिवार की है जो पंजाब के होशियारपुर में खूब प्रसिद्ध है। नवजोत सिंह को भूलने की बीमारी है, उसके बड़े बेटे युवराज सिंह को सुनाई नहीं देता, छोटा बेटा हरभजन सिंह हकलाता है, बेटी पारो सिंह को रात में दिखाई नहीं देता है। क्योंकि  उसे नाइट ब्लाइंडनेस की बीमारी है। नवजोत सिंह अपनी बेटी पारो सिंह की शादी  के लिए एक एनआरआई लड़के रोहित पटेल से शादी की बात चलाते हैं।  स्वीट्जरलैंड से रोहित पटेल अपने मामा और मामी के साथ पंजाब के होशियारपुर में लड़की को देखने के लिए आते हैं। नवजोत सिंह तय करते हैं कि लड़के वालों को अपनी बेटी की बीमारी के बारे में नहीं बताएंगे, वरना रिश्ता टूट जाएगा, लेकिन पारो सिंह झूठ की बुनियाद पर शादी नहीं करना चाहती है। पारो शादी के लिए इस बात पर राजी होती है कि शादी से पहले उसके पिता लड़के वालों को उसकी बीमारी के बारे में बता देंगे।

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आंख मिचोली रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

रोहित पटेल अपने मामा और मामी के साथ होशियारपुर  जिस ट्रेन से लड़की देखने आते हैं, वह ट्रेन पांच घंटे लेट हो जाती है और नवजोत सिंह के घर लड़की को देखने के लिए शाम को पहुंचते हैं। अब समस्या यह है कि पारो को शाम के बाद  दिखाई देता नहीं है। पारो के घर वाले ट्रेनिंग देते हैं कि जब लड़के वाले आएंगे तो उनसे कैसे मिलना है ताकि उन्हें इस बात का संदेश ना हो कि लड़की को दिखाई नहीं देता है। खैर, किसी तरह से पारो इस इम्तिहान में पास हो जाती है और एक हफ्ते के बाद शादी की तारिख तय हो जाती है। नवजोत सिंह का छोटा बेटा हरभजन सिंह लड़के वालों को रेलवे स्टेशन पर छोड़कर चला आता है।  कुछ देर के बाद लड़के वाले फिर वापस आ जाते हैं क्योंकि जिस ट्रेन से उनकी वापसी थी, वह ट्रेन कैंसिल हो गई ।  लड़के के मामा कहते हैं कि कोई होटल अगर आस पास है तो वहां रूक जाएंगे। तभी पारो की भाभी सलाह देती है कि होटल में क्यों रुकना ? इतनी बड़ी हवेली है, इसी हवेली में रूक जाते हैं।  कहानी में नया ट्विस्ट तब आता है जब पता चलता है कि लड़का दिन में नहीं देख सकता है। 

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आंख मिचोली रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

फिल्म के निर्देशक उमेश शुक्ला  ने जीतेन्द्र परमार की लिखी  कहानी को इस तरह से पेश किया है कि कहीं भी बोरियत महसूस नहीं होती है। रोहित पटेल के  मामा और मामी को हमेशा इस बात का डर रहता है कि कहीं रोहित का झूठ ना पकड़ा जाए और नवजोत सिंह को हमेशा डर लगा रहता है कि कहीं उनका झूठ ना पकड़ा जाए। दर्शकों के बीच हमेशा इस बात की उत्सुकता बनी रहती है कि पारो कब रोहित पटेल का चेहरा देखे। क्योंकि यह वही रोहित पटेल है, जिससे पारो स्विट्जरलैंड में मिल चुकी थी और मन ही मन  उसे चाहने लगी थी।  लेकिन रोहित पटेल से कभी उसका आमना सामना नहीं हुआ था। कहते हैं पति और पत्नी जिंदगी के दो पहिये के समान होते हैं। अगर जिंदगी में पति और पत्नी के बीच सही तालमेल रहे तो जिंदगी कभी नीरस नहीं होती है।  उमेश शुक्ला  ने अपनी इस फिल्म के माध्यम से यही बात कहने की कोशिश की है। नवजोत सिंह ने अपने बड़े बेटे की शादी ऐसे ही झूठ बोलकर किया था जैसे इस बार अपनी बेटी की शादी करने जा रहे हैं।  और, उनका झूठ आठ साल के बाद पकड़ा जाता है।  इसलिए पारो की भाभी नहीं चाहती है कि पारो की शादी झूठ की बुनियाद पर हो।  वह बार - बार पारो से कहती रहती है कि रोहित से सही बात बतादें। 

Aankh Micholi Review paresh rawal sharman joshi mrunal thakur Abhimanyu Dasani Umesh Shukla divya dutta film
आंख मिचोली रिव्यू - फोटो : Instagram

अगर शादी के बाद पति या पत्नी में से किसी एक को  कुछ हो जाए तो क्या दोनों एक दूसरे को स्वीकार करेंगे? शायद हां, क्योंकि हमारे समाज में शादी का बंधन साथ जन्मों का बंधन होता है। इसी सोच के तहत नवजोत सिंह अपने बड़े बेटे की शादी करवातें हैं। पहले से प्लानिंग के तहत बेटे से एक्सीडेंट होने का नाटक करवाते हैं और अपनी बहु को बताते हैं कि एक्सीडेंट की वजह से उनके सुनने की शक्ति खत्म हो गई। हमारे भारतीय नारी की उदारता यह देखिये कि वह अपने पति को इस अवस्था में भी स्वीकार कर लेती है। लेकिन जब उसे बाद में सच्चाई का पता चलता है तो उसका दिल टूट जाता है। उसका मानना यह है कि किसी भी रिश्ते की बुनियाद झूठ पर नहीं टिकी होनी चाहिए।

Aankh Micholi Review paresh rawal sharman joshi mrunal thakur Abhimanyu Dasani Umesh Shukla divya dutta film
आंख मिचोली रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

किसी फिल्म में अगर परेश रावल जैसे सितारें हो तो पूरी फिल्म अकेले अपने कंधे पर होल्ड कर लेते हैं। लेकिन इस फिल्म में उमेश शुक्ला ने हर किरदार को अपनी प्रतिभा दिखाने का भरपूर मौका दिया है।  नवजोत सिंह की भूमिका में परेश रावल ने फिल्म में अपनी गहरी छाप छोड़ी है, तो वहीं युवराज सिंह की भूमिका में शरमन जोशी, हरभजन सिंह की भूमिका में अभिषेक बनर्जी, पारो सिंह की भूमिका में मृणाल ठाकुर, भाभी की भूमिका में दिव्या दत्ता, मामा की भूमिका  दर्शन जरीवाला, मामी की भूमिका में ग्रुशा  कपूर और ज्वेलर की भूमिका में विजय राज की दमदार अदाकरी नजर आई है।  रोहित पटेल की भूमिका में अभिमन्यु दसानी थोड़े कमजोर दिखे हैं।  मृणाल ठाकुर  के साथ उनके जितने भी दृश्य हैं, उन दृश्यों में नजर सिर्फ मृणाल ठाकुर ने परफार्मेस पर आकर टिकती है।  समीर आर्य की सिनेमैटोग्राफी सामन्य है,वैसे भी जब सिनेमा के दिग्गज सितारों को पर्दे पर परफॉर्म करते देखते हैं तो वहां कैमरा किस एंगल पर लगा है, उस तरफ ध्यान कम ही जाता है।  फिल्म थोड़ी लंबी जरूर है, लेकिन फिल्म के एडिटर स्टीवन एच बर्नार्ड ने फिल्म के दृश्यों को ऐसा सजाया है कि कहीं इस बात का अहसास नहीं हुआ कि किसी दृश्य पर कैंची चलाने की जरूरत थी।  सचिन - जिगर के संगीत निर्देशन में इस फिल्म में चार गाने हैं।  मीका सिंह का गाया टाइटल सांग 'आंख मिचोली' के अलावा बाकी गाने सामान्य हैं।  

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