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Khalid Ka Shivaji: फिल्म 'खालिद का शिवाजी' को बैन करने की मांग, CBFC को हिंदू संगठन ने भेजा पत्र

Tue, 05 Aug 2025 04:02 PM IST
हिमांशु सोनी एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: हिमांशु सोनी Updated Tue, 05 Aug 2025 04:02 PM IST
सार

Khalid Ka Shivaji Movie Controversy: मराठी फिल्म 'खालिद का शिवाजी' को लेकर हिंदू संगठनों ने अब फिल्म बोर्ड को लेटर लिखा है ताकि फिल्म पर बैन लगाया जा सकते। मूवी को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। 

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खालिद का शिवाजी - फोटो : एक्स

विस्तार

मुंबई में एक स्थानीय हिन्दू संगठन ने महाराष्ट्र की आने वाली मराठी फिल्म 'खालिद का शिवाजी' पर आपत्ति जताते हुए इसे सेंसर बोर्ड के पास बैन करने की मांग की है। ये फिल्म 8 अगस्त को रिलीज होने वाली है और इसमें छत्रपति शिवाजी महाराज के इतिहास को गलत तरीके से पेश करने का आरोप लगाया गया है। चलिए आपको बताते हैं क्या है पूरा मामला। 
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फिल्म को लेकर क्यों उठा विवाद?
पुणे स्थित हिंदू महासंघ ने सेंसर बोर्ड और फिल्म के निर्माताओं को अपने विरोध का पत्र भेजा है। संगठन के अध्यक्ष आनंद दवे ने कहा कि फिल्म में छत्रपति शिवाजी महाराज को एक सेक्युलर शासक के रूप में दिखाया गया है, जो उनकी असल पहचान के खिलाफ है। उन्होंने साफ किया कि अगर ये फिल्म प्रतिबंधित नहीं हुई तो वो थिएटर्स त थिएटर्स के बाहर विरोध प्रदर्शन करेंगे।
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आनंद दवे ने सभी पुणे के सिनेमाघरों से आग्रह किया है कि वो इस फिल्म को नहीं दिखाएं। साथ ही उन्होंने ये भी चेतावनी दी कि अगर ये फिल्म ग्रामीण इलाकों में दिखाई गई तो वो वहां जाकर छत्रपति शिवाजी महाराज के सही इतिहास के बारे में जागरूकता अभियान चलाएंगे।

हिंदू महासंघ का दावा 
हिंदू महासंघ का ये भी दावा है कि इस फिल्म के जरिए इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है। उनका मानना है कि छत्रपति शिवाजी महाराज हिंदू और मराठा समुदाय के हैं और 'खालिद का शिवाजी' जैसा शीर्षक उनकी विरासत के लिए अस्वीकार्य है।


फिल्म का निर्देशन 
फिल्म का निर्देशन राज मोरे ने किया है। 'खालिद का शिवाजी' की कहानी एक मुस्लिम लड़के की है, जो जीवन के अनुभवों के जरिए छत्रपति शिवाजी महाराज के बारे में सीखता है। फिल्म में इतिहास के एक अलग नजरिए को दिखाने का प्रयास किया गया है, जो विवादों का कारण बना है।

इस विवाद ने महाराष्ट्र में सांस्कृतिक और राजनीतिक बहस को जन्म दिया है। जहां एक ओर फिल्म के निर्माता इसे एक नए दृष्टिकोण से इतिहास पेश करने का प्रयास बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर हिंदू संगठनों का मानना है कि यs फिल्म ऐतिहासिक तथ्य और भावनाओं का अपमान करती है।
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