Film Funding Row: निर्माता अदूर गोपालकृष्णन के समर्थन में आए श्रीकुमारन थम्पी, कहा- 'कैमरा कोई खिलौना नहीं'
Film Funding Row: निर्माता अदूर गोपालकृष्णन ने हाल ही में कहा के केरल स्टेट फिल्म डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (केएसएफडीसी) की तरफ से दी जा रही धनराशि का खास फायदा नहीं हो पा रहा है। इसे कम करना चाहिए। उनकी इस बात पर कवि और निर्माता श्रीकुमारन थम्पी ने समर्थन जताया है।
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फिल्म निर्माता अदूर गोपालकृष्णन ने बीते दिनों एक कार्यक्रम में कहा कि केरल सरकार जो निर्माताओं को फिल्म बनाने के लिए 1.5 करोड़ रुपये देती है, इसका बहुत अच्छा परिणाम सामने नहीं आ रहा है। उन्होंने धनराशि कम करने की बात कही, जिस पर जमकर विवाद हो रहा है। तमाम लोगों ने गोपालकृष्णन की इस बात की आलोचना की। मगर, इस विरोध के बीच कवि और निर्माता श्रीकुमारन थम्पी ने अदूर गोपालकृष्णन के समर्थन में आए हैं।
निर्माता श्रीकुमारन थम्पी ने लिया अदूर गोपालकृष्णन का पक्ष
केरल सरकार हाशिए पर रहने वाले वर्गों के फिल्म निर्माताओं को फिल्म बनाने के लिए 1.5 करोड़ रुपये देती है। फिल्म निर्माता अदूर गोपालकृष्णन ने बीते रविवार को एक कार्यक्रम में कहा कि केरल स्टेट फिल्म डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (केएसएफडीसी) की तरफ से दिए जा रहे पैसे से कुछ खास फायदा नहीं हो पा रहा है। अदूर गोपालकृष्णन की इस बात पर जहां जमकर आलोचना हो रही है, वहीं वरिष्ठ मलयालम कवि, गीतकार और फिल्म निर्माता श्रीकुमारन थम्पी ने मंगलवार को उनका जोरदार समर्थन किया।
थम्पी बोले- 'गोपालकृष्णन ने क्या गलत कहा'?
गोपालकृष्णन का बचाव करते हुए, थम्पी ने कहा कि वे दादासाहेब फाल्के पुरस्कार विजेता महान फिल्म निर्माताओं में से एक हैं। साथ ही गोपालकृष्णन की हालिया टिप्पणियों की आलोचनाओं पर भी उन्होंने सवाल उठाया। थम्पी ने , 'उनके बयानों में क्या गलत है? सरकार हाशिए पर पड़े वर्गों के फिल्म निर्माताओं को बढ़ावा देने के लिए 1.5 करोड़ रुपये दे रही है। यह जनता का पैसा है'।
'सुझाव देना अनुचित नहीं है'
उन्होंने आगे कहा कि इस तरह की धनराशि वितरित करने से पहले पात्रता का आकलन करने का सुझाव देना अनुचित नहीं है। उन्होंने पूछा, 'हम जनता का पैसा यूं ही नहीं दे सकते। यह कहने में क्या गलत है कि फिल्म निर्माण में जरूरी प्रशिक्षण देने के बाद ही धनराशि प्रदान की जानी चाहिए'? थम्पी ने यह भी स्पष्ट किया कि गोपालकृष्णन ने महिला या दलित फिल्म निर्माताओं का नाम नहीं लिया। उन्होंने सिर्फ इतना कहा था कि सरकारी अनुदान पाने वालों को सिनेमा के बारे में पर्याप्त जानकारी होनी चाहिए। कैमरा कोई खिलौना नहीं है'।