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पुण्यतिथि विशेष: कभी पहलवान बनने का था सपना पर बने गायक, रफी साहब तक थे इनके फैन; कैसे जेल पहुंचे मन्ना डे?

Sat, 24 Oct 2026 06:30 AM IST
राजश्री वर्मा एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: राजश्री वर्मा Updated Sat, 24 Oct 2026 06:30 AM IST
सार

  • मन्ना डे एक भारतीय पार्श्व गायक, संगीत निर्देशक और संगीतकार थे।
  • जिन्होंने 50-60 के दशक में कई बड़े स्टारों को आवाज दी। 
  • 24 अक्तूबर को उनकी 13वीं पुण्यतिथि है और इस मौके पर जानते हैं उनकी जिंदगी से जुड़ी कुछ खास बातें।

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Manna Dey Death Anniversary Famous Singer Song Career Life Family And Unknown Facts
मन्ना डे - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिंदी सिनेमा के सुनहरे दौर में जब मोहम्मद रफी, मुकेश और किशोर कुमार जैसे गायकों की आवाज का जादू छाया हुआ था, तब एक ऐसा गायक भी था जिसकी गायकी किसी एक शैली या अभिनेता की मोहताज नहीं थी। वह कभी शास्त्रीय संगीत की कठिन बंदिशों को सहज बना देता, कभी हंसते-हंसाते गीतों से श्रोताओं को गुदगुदाया और कभी जिंदगी की ऐसी पहेली सुनाता कि सुनने वाला सोच में पड़ जाता। यह आवाज थी मन्ना डे की।
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एक चतुर नार बड़ी होशियार...,ए मेरी जोहरा जबीं, तुझे मालूम नहीं... ऐसे कई यादगार और सदाबहार गाने मन्ना डे ने हिंदी सिनेमा को दिए। सिर्फ इतना ही नहीं, आज भी मन्ना डे के खूबसूरत गाने लोगों की जुबान पर चढ़े रहते हैं। बता दें कि 24 अक्तूबर को लीजेंडरी प्लेबैक सिंगर मन्ना डे की 13वीं पुण्यतिथि है, तो ऐसे में चलिए जानते हैं उनकी जिंदगी से जुड़ी कुछ खास बातें...
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Manna Dey Death Anniversary Famous Singer Song Career Life Family And Unknown Facts
मन्ना डे के गानों के पीछे के दिलचस्प किस्से - फोटो : एक्स
पहलवान बनना चाहते थे मन्ना डे!
भारतीय संगीत का यह महान कलाकार कभी पहलवानी में अपना भविष्य बनाना चाहता था। 1 मई, 1919 को कलकत्ता में जन्मे मन्ना डे का असली नाम प्रबोध चन्द्र डे था। बचपन से उन्हें कुश्ती और मुक्केबाजी का शौक था। कॉलेज के दिनों में उन्होंने पहलवानी का प्रशिक्षण लिया और ऑल बंगाल कुश्ती प्रतियोगिता के फाइनल तक पहुंचे।

अपनी आत्मकथा मेमोरीज कम अलाइव में उन्होंने बताया कि वह देश के श्रेष्ठ पहलवानों में शामिल होना चाहते थे। लेकिन कमजोर होती नजर उनके रास्ते की बाधा बन गई। चश्मा पहनकर कुश्ती लड़ने के दौरान कई दुर्घटनाएं हुईं। एक मुकाबले में चश्मे का कांच टूटकर उनकी आंखों के नीचे की त्वचा में धंस गया। आखिरकार उन्हें खेल और संगीत में से एक को चुनना पड़ा। उन्होंने संगीत चुना और भारतीय सिनेमा को एक अनमोल आवाज मिल गई।
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मन्ना डे - फोटो : अमर उजाला
क्लास की मेज बजाकर गाते थे गाने
मन्ना डे बचपन से ही शरारती और मिलनसार स्वभाव के थे। स्कॉटिश चर्च कॉलेज में पढ़ाई के दौरान वे खाली समय में क्लास की मेज को तबले की तरह बजाते और गाने गाते थे। उनकी गायकी इतनी अच्छी थी कि उन्होंने लगातार तीन साल तक कॉलेजों के बीच होने वाली अलग-अलग गायन प्रतियोगिताओं में पहला स्थान हासिल किया।

मन्ना डे को संगीत की पहली शिक्षा उनके चाचा कृष्ण चंद्र डे ने दी, जो जाने-माने गायक और संगीतकार थे। इसके बाद उन्होंने उस्ताद अमान अली खान और उस्ताद अब्दुल रहमान खान जैसे बड़े संगीत गुरुओं से संगीत सीखा। शास्त्रीय संगीत की इसी गहरी समझ ने मन्ना डे की आवाज और गायकी को खास पहचान दिलाई।
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आज है मन्ना डे की जयंती - फोटो : एक्स
इस फिल्म से शुरू किया करियर
साल 1942 में मन्ना डे अपने चाचा कृष्ण चंद्र डे के साथ बंबई पहुंचे। शुरुआत में उन्होंने अपने चाचा और बाद में सचिन देव बर्मन के सहायक के रूप में काम किया। 1943 की फिल्म 'तमन्ना' से उन्होंने प्लेबैक सिंगिंग की शुरुआत की। इसमें उन्होंने सुरैया के साथ मिलकर गीत गाया।

लेकिन उन्हें पहचान दिलाने वाले शुरुआती महत्वपूर्ण गीतों में 1950 की फिल्म मशाल का 'ऊपर गगन विशाल' शामिल था। इसका संगीत एस. डी. बर्मन ने तैयार किया था। दिलचस्प बात यह है कि फिल्म संगीत में सफलता मिलने के बाद भी मन्ना डे ने शास्त्रीय संगीत सीखना नहीं छोड़ा। वह लगातार रियाज और प्रशिक्षण को महत्व देते रहे।

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मन्ना डे की गायकी के रफी साहब भी थे दीवाने  - फोटो : एक्स
जब मोहम्मद रफी ने की मन्ना डे की तारीफ
मन्ना डे की गायकी के बड़े-बड़े गायक भी प्रशंसक थे। कई रिपोर्टों के अनुसार कहा जाता है कि मशहूर गायक मोहम्मद रफी ने एक बार उनकी तारीफ करते हुए कहा था कि दुनिया मेरे गाने सुनती है, लेकिन मैं मन्ना डे के गाने सुनता हूं।

'एक चतुर नार' ने दिखाया गायकी का अनोखा अंदाज
1968 की फिल्म पड़ोसन का गीत 'एक चतुर नार' हिंदी सिनेमा के सबसे मनोरंजक संगीत मुकाबलों में गिना जाता है। इस गीत में मन्ना डे ने महमूद के किरदार के लिए आवाज दी, जबकि किशोर कुमार ने सुनील दत्त के किरदार की ओर से गायन किया। मन्ना डे की शास्त्रीय संगीत पर पकड़ और किशोर कुमार की चुलबुली अदायगी ने इसे यादगार बना दिया।

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मन्ना डे - फोटो : अमर उजाला
राजेश खन्ना के फैन थे मन्ना डे
  • मन्ना डे के सबसे यादगार गीतों में 1971 की फिल्म आनंद का 'जिंदगी कैसी है पहेली' शामिल है।
  • सलिल चौधरी के संगीत और योगेश के शब्दों वाला यह गीत राजेश खन्ना पर फिल्माया गया था।
  • मन्ना डे ने एक बातचीत में राजेश खन्ना की गीतों को पर्दे पर जीवंत करने की क्षमता की प्रशंसा की थी।
  • उनका मानना था कि किसी गीत की सफलता में अभिनेता के फिल्मांकन का भी बड़ा योगदान होता है।
  • बता दें कि मन्ना डे ने छह दशकों से अधिक लंबे संगीत करियर में हिंदी, बांग्ला और कई अन्य भारतीय भाषाओं में 3,500 से अधिक गीत रिकॉर्ड किए।

जब जेल पहुंच गए थे मन्ना डे
संगीत की दुनिया के इस महान कलाकार को सब पूजते थे, लेकिन एक समय ऐसा आया कि जब उनके जेल जाने की नौबत तक आ गई। दरअसल, वह लखनऊ में एक प्रोग्राम में परफॉर्मेंस करने पहुंचे थे। चारबाग रेलवे स्टेशन के पास एक संगीत समारोह का आयोजन होना था, लेकिन कार्यक्रम से पहले आयोजक गायब हो गए और दर्शक इंतजार करते रहे।

भड़के लोगों ने पुलिस में शिकायत की। कार्यक्रम में मन्ना डे को बतौर मेहमान बुलाया गया था और पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया, जिसके बाद उनसे पूछताछ की गई। अन्य गायकों और रंगकर्मियों ने मामले को सुलझाने में पुलिस की मदद की। इसके बाद मन्ना डे को राहत मिली।

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मन्ना डे - फोटो : सोशल मीडिया
पत्नी के निधन के बाद अकेले पड़ गए थे मन्ना डे
मन्ना डे की पत्नी सुलोचना कुमरन का जनवरी 2012 में कैंसर के कारण निधन हो गया था। दोनों की शादी 18 दिसंबर, 1953 को हुई थी। करीब छह दशक तक दोनों एक-दूसरे के साथ रहे। फिर बढ़ती उम्र के साथ उनका स्वास्थ्य कमजोर होने लगा था। जून 2013 में फेफड़ों में संक्रमण और सांस लेने में परेशानी के कारण उन्हें बेंगलुरु के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनकी हालत गंभीर होने के कारण उन्हें आईसीयू में रखा गया। अस्पताल में कई महीनों तक उनका इलाज चलता रहा। आखिरकार 24 अक्टूबर, 2013 को उनका निधन हो गया। मन्ना ने पत्नी के निधन के लगभग 21 महीने बाद दुनिया को अलविदा कह दिया।
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