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Ziad Rahbani: लेबनान के संगीतकार जियाद रहबानी को जनता ने दी श्रद्धांजलि, देश की राजनीति पर करते थे तंज
Tue, 29 Jul 2025 12:30 PM IST
सिराजुद्दीन
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Published by: सिराजुद्दीन
Updated Tue, 29 Jul 2025 12:30 PM IST
सार
Ziad Rahbani: युवा पीढ़ी ने रहबानी के नाटकों को ऑनलाइन सुना और विरोध आंदोलनों में उनके संगीत का आनंद लिया। उन्होंने अपना लेखन जारी रखा, और लेबनान के राजनीतिक ठहराव पर अपनी निराशा जाहिर की।
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जियाद रहबानी
- फोटो : एक्स
विस्तार
सोमवार को लेबनान में सैकड़ों लोगों ने संगीतकार और आलोचक जियाद रहबानी को श्रद्धांजलि दी। 26 जुलाई को 69 साल की उम्र में उनका निधन हो गया। इस दौरान अरब दुनिया की सबसे मशहूर गायकों में से एक उनकी मां फेयरुज भी नजर आईं। रहबानी का निधन किस वजह से हुआ, अभी इसका पता नहीं चल पाया है।
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रहबानी के निधन से अरब के लोगों को सदमा लगा
रहबानी के निधन से अरब जगत को गहरा सदमा पहुंचा है। रहबानी की रचनाएं लेबनान में 1975 से लेकर 1990 तक चले गृहयुद्ध के दौरान अराजकता को दिखाती थीं। उनके फैंस इसे पसंद करते थे। रहबानी ने अपनी मां के कुछ मशहूर गानों की भी रचना की।
रहबानी के निधन से अरब जगत को गहरा सदमा पहुंचा है। रहबानी की रचनाएं लेबनान में 1975 से लेकर 1990 तक चले गृहयुद्ध के दौरान अराजकता को दिखाती थीं। उनके फैंस इसे पसंद करते थे। रहबानी ने अपनी मां के कुछ मशहूर गानों की भी रचना की।
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जियाद रहबानी
- फोटो : एक्स
राजनीतिक हस्तियों ने श्रद्धांजलि दी
लेबनान के राजनीतिक अधिकारियों और कलाकारों ने रहबानी के निधन की घोषणा के बाद उन्हें श्रद्धांजलि दी। वामपंथी ग्रीक ऑर्थोडॉक्स रहबानी अपने काम में अक्सर लेबनान के सांप्रदायिक विभाजन का मजाक उड़ाते थे।
गृहयुद्ध के दौरान पली-बढ़ी रीम हैदर ने कहा कि रहबानी के गीत और उनके संदेश ही थे जिनसे वह और दूसरे लोग उस समय जुड़े थे जब 'कोई राष्ट्र नहीं था जिससे जुड़ा जा सके।'
यह खबर भी पढ़ें: Saiyaara: 'सैयारा' के लिए पहली पसंद नहीं थे अहान-अनीत, इस मशहूर जोड़ी के साथ बनने वाली थी फिल्म
लेबनान के राजनीतिक अधिकारियों और कलाकारों ने रहबानी के निधन की घोषणा के बाद उन्हें श्रद्धांजलि दी। वामपंथी ग्रीक ऑर्थोडॉक्स रहबानी अपने काम में अक्सर लेबनान के सांप्रदायिक विभाजन का मजाक उड़ाते थे।
गृहयुद्ध के दौरान पली-बढ़ी रीम हैदर ने कहा कि रहबानी के गीत और उनके संदेश ही थे जिनसे वह और दूसरे लोग उस समय जुड़े थे जब 'कोई राष्ट्र नहीं था जिससे जुड़ा जा सके।'
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रहबानी की मां लोगों की नजरों से दूर थीं
90 साल की फेयरुज कई वर्षों से लोगों की नजरों से दूर थीं। काला चश्मा और काला घूंघट पहने, उन्होंने श्रद्धांजलि देने आए लोगों का स्वागत किया। फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ उनकी मुलाकात की तस्वीरें सामने आने के बाद से उन्हें सार्वजनिक रूप से नहीं देखा गया। इमैनुएल मैक्रों साल 2020 में उन्हें फ्रांस का सर्वोच्च सम्मान पदक देने के लिए उनके आवास पर आए थे।
90 साल की फेयरुज कई वर्षों से लोगों की नजरों से दूर थीं। काला चश्मा और काला घूंघट पहने, उन्होंने श्रद्धांजलि देने आए लोगों का स्वागत किया। फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ उनकी मुलाकात की तस्वीरें सामने आने के बाद से उन्हें सार्वजनिक रूप से नहीं देखा गया। इमैनुएल मैक्रों साल 2020 में उन्हें फ्रांस का सर्वोच्च सम्मान पदक देने के लिए उनके आवास पर आए थे।
विरोध आंदोलनों में बजते थे रहबानी के संगीत
रहबानी भी अपने आखिरी दिनों में कम ही बाहर निकलते थे। हालांकि उनका प्रभाव कभी कम नहीं हुआ। युवा पीढ़ी ने उनके नाटकों को ऑनलाइन फिर से सुना और विरोध आंदोलनों में उनके संगीत का आनंद लिया। उन्होंने अपना लेखन जारी रखा, और लेबनान के राजनीतिक ठहराव पर अपनी निराशा जाहिर की।
रहबानी भी अपने आखिरी दिनों में कम ही बाहर निकलते थे। हालांकि उनका प्रभाव कभी कम नहीं हुआ। युवा पीढ़ी ने उनके नाटकों को ऑनलाइन फिर से सुना और विरोध आंदोलनों में उनके संगीत का आनंद लिया। उन्होंने अपना लेखन जारी रखा, और लेबनान के राजनीतिक ठहराव पर अपनी निराशा जाहिर की।