Mukesh Khanna: मुकेश खन्ना के शो में पहुंचे कुमार सानू, सुनाई मुंबई में पहली कमाई से लेकर संघर्ष तक की कहानी
मुकेश खन्ना के शो में कुमार सानू ने खुलासा किया कि वे अपने भाई से 1100 सौ रुपये लेकर मुंबई आए थे। यहां उन्होंने पहले होटलों में गाने गाना शुरू किया। इसके बाद एक दिन उन्हें जगजीत सिंह ने गाते सुना और यहीं से जीवन नई दिशा में मुड़ गया।
विस्तार
अभिनेता कुमार सानू फिल्म इंडस्ट्री के लोकप्रिय गायकों में शुमार हैं। उन्होंने कई हिट गानों को अपनी सुरीली आवाज से सजाया है। हाल ही में गायक अपने संघर्ष की कहानी सुनाते नजर आए। दरअसल, कुमार सानू अभिनेता मुकेश खन्ना के शो में पहुंचे। यहां अभिनेता ने कुमार सानू से उनके पहले वेतन से लेकर उनकी पारिवारिक पृ्ष्ठभूमि एवं संघर्ष की कहानी के बारे में सवाल किए। सुनिए कैसी रही कुमार सानू की मुंबई में यात्रा
बंगाल के संगीत घराने से रखते हैं ताल्लुक
मुकेश खन्ना ने अपने यूट्यूब चैनल पर यह पूरा इंटरव्यू साझा किया है। सबसे पहले उन्होंने सवाल किया, 'आप कहां से आए'? इसके जवाब में कुमार सानू ने कहा, 'मैं मूल रूप से बंगाल से हूं। मेरा परिवार क्लासिकल परिवार था। म्यूजिकल फैमिली से हूं तो घर में वही संगीत का माहौल रहा। मैं 1886 के करीब मुंबई आया'। मुकेश खन्ना ने पूछा, 'मैंने सुना है कि म्यूजिक वर्ल्ड और एक्टिंग वर्ल्ड के संघर्ष में काफी अंतर है। म्यूजिक वर्ल्ड में संघर्ष थोड़ा ज्यादा है। क्या आपको भी शुरुआत से संघर्ष करना पड़ा'?
1100 सौ रुपये लेकर आए थे मायानगरी
कुमार सानू ने जवाब देते हुए कहा, 'लोग समझते हैं कि कुमार सानू आए और आकर तुरंत गाना गाया 'आशिकी' में और फेमस हो गए। कितना जल्दी जल्दी सब हो गया। लेकिन, नहीं...। मुझे ऐसा लगता है कि बिना स्ट्रगल के कोई आर्टिस्ट ठहर नहीं पाएगा। और अच्छा भी नहीं लगेगा। संघर्ष आपको जीवन जीना सिखाता है। मैंने भी संघर्ष किया। जिंदगी में एक गोल होना चाहिए। संघर्ष करते हुए गोल से नहीं भटकना चाहिए'। मुकेश खन्ना ने पूछा, 'आप बचपन से ही बड़े-बड़े लोगों को देखते आए हो। आप संगीत घराने से हो, उसके अनुभव से आपको मुंबई में हेल्प मिली? इस पर गायक ने कहा, 'मुंबई आकर गरीबी को लेकर मुझे बहुत दिक्कत नहीं हुई। मैं थोड़े बहुत पैसे में गुजारा कर लेता था। किराए पर रहता था। बड़े भाई से 1100 रुपये लिए थे, वो पैसा लेकर मैं मुंबई आया। मुझे छठे दिन ही मुंबई में काम मिल गया। मैं एक मेस में रहकर खाना वहीं खाता था'। गायक ने आगे बताया कि उन्हें काम कैसे मिला।
होटल में गाया पहला गाना और मिली इतनी टिप
कुमार सानू ने बताया कि वे एक होटल में गए थे, जहां लोग बैठे होते थे और वहां सिंगर गाने गाते थे। गायक ने बताया, 'मैंने होटल में जाकर बताया कि मैं भी गाना गाता हूं। उन्होंने मुझे गाना गाने का मौका दे दिया। मैं माइक लेकर गया। लोगों की भीड़ थी। मैंने किशोर दा का गाना गाया और पहले ही गाने में मुझे 1400 रुपये का टिप मिली। फिर और गाने गाता रहा तो और टिप आती रही और फिर इसी तरह पहले ही दिन करीब चार-साढ़े चार हजार रुपये टिप आ गई। देखकर मालिक प्रभावित हो गए कि ये तो दूध देने वाली गाय है। इसी तरह मुझे 10 हजार रुपये महीने की पगार पर नौकरी पर रख लिया'। कुमार सानू ने बता, 'मैंने एक चीज ये इरादा पक्का रखा कि मुझे फिल्मों में जाना है। मैं उससे भटका नहीं। मैं कलकत्ता में बतौर किशोर कुमार सिंगर स्टेज पर गाना गाता था। मैं उस समय वहां हाइएस्ट पेड सिंगर था। उस समय मेरे मन में जो था कि मैं किशोर दा कि तरह बनूं तो वह रहा। मुंबई आकर मैंने होटलों में गाने गाए। फिर एक से निकला तो दूसरे में गया। पहले होटल में मैंने करीब डेढ़ साल गाने गाए'।
जगजीत सिंह ने दिलाया काम
कुमार सानू ने आगे कहा, 'फिल्मों में गाने के अपने लक्ष्य पर टिका रहा। होटल में गाकर मैं जो पैसा कमाता था, उससे स्टूडियो में जाकर किशोर दा के गाने कैसेट में रिकॉर्ड करता था। दूसरों को सुनाने के लिए कि ये मेरा गाना है सुनिए। अपना कैसेट बना-बनाकर लोगों को मिलने पर सुनाते थे। उसी में ये हुआ कि मैं एक दिन गाना गा रहा था और उस टाइम जगजीत सिंह वहां पर आ गए। मुझे गाना गाते देख उन्होंने पूछा कौन गा रहा है ये? किसी ने बताया कि कलकत्ता से एक लड़का आया है। वो बोले बुलाओ उन्हें। मैं तो खुश हो गया। इनका गाना गाकर तो मैं बड़ा हुआ हूं। उन्हें सामने देखकर मैं हक्का-बक्का रह गया। पैर छुए उनके। उन्होंने बोला कल मोतीमहल में आ जाओ। वो उनका घर था। यह बहुत जल्दी हुआ'।
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पहले गाने के लिए मिले थे इतने रुपये
कुमार सानू ने बताया, 'मैं वहां गया तो वो मुझे लेकर गए, उनकी फिएट गाड़ी थी, उस गाड़ी में मुझे बिठाकर लेकर गए और मेरा पहला गाना रिकॉर्ड किया। मुझे पता नहीं था कि ये मुझे कहां लेकर जा रहे हैं। जब अंदर गया तो देखा लता जी का बड़ा-बड़ा पोस्टर है। फिर बड़े-बड़े माइक हैं। उस वॉल्व सिस्टम माइक में मैंने पहला गाना गया। गाना सुनकर वो बहुत खुश थे। उन्होंने डेढ़ हजार रुपये मुझे हाथ में दिया। वह मुंबई में मेरी पहली कमाई थी। मैं लेना नहीं चाह रहा था, लेकिन वो बोले लेना तो पड़ेगा'।
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दारू को नहीं लगाया कभी हाथ
कुमार सानू ने बताया कि होटलों में जब वे गाते थे तो वहां लोग दारू पार्टी किया करते थे। उन्हें भी पिलाने की कोशिश की जाती, लेकिन उन्होंने कभी शराब को हाथ नहीं लगाया। कुमार सानू ने कहा, ' हम दारू वाली जगह पर रहते थे। लोग चाहते थे कि एक सिप तो ले ले। दोस्ती के लिए एक पैग ले ले। मैं टालता रहता था, मैंने कभी दारू नहीं पी। इसका भी एक कारण था। मेरे पिताजी की जो फैमिली थी, उसमें जो बाबा के मझले भाई दारू पीते थे। उनकी वजह से हमारा परिवार सड़क पर आ गया था। हमें पापा ने हमेशा वही सिखाया कि इस चीज को कभी हाथ नहीं लगाना तो मेरे दिमाग में बस वही बात बैठी रही'।
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