किशोर कुमार पुण्यतिथि: क्यों लगा था गानों पर प्रतिबंध? पढ़िए खंडवा के लाल की शरारतों के दिलचस्प किस्से
Kishore Kumar Death Anniversary: दिग्गज गायक, अभिनेता-निर्देशक किशोर कुमार हमारे बीच नहीं हैं। मगर, सुरीली आवाज से सजे उनके गाने आज भी खूब चाव से सुने जाते हैं। आज 13 अक्तूबर को पुण्यतिथि पर पढ़िए उनसे जुड़े दिलचस्प किस्से...
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किशोर कुमार! मध्य प्रदेश के खंडवा से ताल्लुक रखने वाले इस शख्स ने अपनी सुरीली आवाज से दुनिया को दीवाना बना दिया। अभिनय में भी कमाल किया और फिल्म निर्माण में भी हाथ आजमाया। बहुमुखी प्रतिभा के धनी किशोर कुमार इंसान भी शानदार थे। वे हरफनमौला किस्म के थे। अगले ही पल क्या करेंगे कोई अंदाजा नहीं लगा सकता था। दूसरों को हंसाने में मानो उन्हें महारत था। गाने की रिकॉर्डिंग के दौरान वे कुछ ऐसा कह दिया करते कि लोग पेट पकड़कर हंसने लगते। कई बार ऐसे फैसले कर लेते कि लोग चौंक जाया करते। ऐसे ही थे किशोर दा। दुनिया आज उन्हें गायिकी के लिए जानती है, मगर हैरानी होगी कि उन्होंने इसकी कोई तालीम नहीं ली थी। यह उनके पास ईश्वरीय उपहार था। आज उनकी पुण्यतिथि है। पढ़िए उनकी शरारतों वाले दिलचस्प किस्से
किशोर कुमार 'खंडवा वाले'
बॉलीवुड के सदाबहार गायक किशोर कुमार ने 'जिंदगी एक सफर है सुहाना', 'एक लड़की भीगी भागी सी', 'मेरे महबूब कयामत होगी' जैसे शानदार गानों को अपनी आवाज दी। उनका जन्म 4 अगस्त 1929 को मध्य प्रदेश के खंडवा में एक बंगाली ब्राह्मण परिवार में हुआ था। किशोर कुमार का असली नाम आभास कुमार गांगुली था। उनके पिता कुंजालाल गांगुली एक मशहूर वकील थे। मां गौरी देवी गृहिणी थीं। भाई-बहनों में सबसे छोटे किशोर बचपन से संगीत और हास्य-रस दोनों में रुचि रखते थे। उन्हें गाने का बहुत शौक था। अभिनय में भी दिलचस्पी थी। सिनेमा की दुनिया में कई गायक आए और और गए, लेकिन किशोर कुमार की आवाज का जादू आज भी बरकरार है। किशोर कुमार ने मायानगरी में अच्छा मुकाम बनाया, मगर अपनी जड़ों को कभी नहीं भूले। वे अक्सर अपना परिचय 'किशोर कुमार खंडवा वाले' कहकर दिया करते थे।
बिना संगीत शिक्षा के बने लोकप्रिय गायक
किशोर कुमार, दिग्गज एक्टर अशोक कुमार के भाई थे। अशोक कुमार ने बतौर अभिनेता अच्छी पहचान बना ली थी। वे चाहते थे कि भाई किशोर भी एक्टर के रूप में अपनी पहचान बनाएं। खुद किशोर कुमार को अदाकारी की बजाय पार्श्वगायक बनने की चाह थी, जबकि उन्होंने संगीत की प्रारंभिक शिक्षा नहीं ली थी। बिना किसी ट्रेनिंग के उन्होंने आगे चलकर संगीत की दुनिया में जो मुकाम हासिल किया, वह दूसरों के लिए सपना हो सकता है। किशोर कुमार ने गायिकी और अभिनय दोनों में पहचान बनाई। धीरे-धीरे वे डॉयरेक्टर, प्रोड्यूसर और लेखक भी बन गए।
फिल्म से बचने को हो गए थे गंजे
किशोर कुमार मस्तमौला किस्म के इंसान थे। बचपन से ही नटखट थे। यह अंदाज इंडस्ट्री में खास मुकाम हासिल कर लेने के बाद भी बरकरार रहा। उनकी शरारतों के कई किस्से हैं। किशोर कुमार वही काम करते थे, जो उनका अपना मन करता। अपने इसी मनमौजी स्वभाव के चलते उन्होंने 'आनंद' फिल्म साइन नहीं की थी।
राजेश खन्ना की यह सुपरहिट फिल्म 'आनंद' एक ऐसे इंसान की कहानी थी, जिसकी मौत सामने खड़ी है, लेकिन वह जिंदादिली से हर लम्हा जीता है। निर्देशक ऋषिकेश मुखर्जी इसमें किशोर कुमार को लेना चाहते थे।
गीतकार गुलजार ने अपने संस्मरण 'एक्चुअली… आई मेट देम' में इस दिलचस्प किस्से का जिक्र किया है। किशोर कुमार का मन अभिनय में कम और सिंगिंग में ज्यादा रमता था। वे अक्सर एक्टिंग से बचने के बहाने ढूंढते थे। 'आनंद' फिल्म की चर्चाओं के दौरान, जब वे पूरी तरह फिल्म से पीछे नहीं हट पा रहे थे, तो एक दिन लुक-डिस्कशन मीटिंग से ठीक पहले उन्होंने अपना सिर मुंडवा लिया। वे गंजे होकर ऋषिकेश मुखर्जी के ऑफिस में नाचते-गाते पहुंचे और बोले, 'अब ऋषि दा क्या करेंगे?'। इस अजीबोगरीब हरकत के बाद ऋषिकेश मुखर्जी ने सुपरस्टार राजेश खन्ना को साइन किया।
घर में लगवा रखी थी सीक्रेट सीढ़ी
अपनी बायोग्राफी में गुलजार ने किशोर कुमार की शरारत का एक और रोचक किस्सा भी साझा किया है। किशोर कुमार ने घर में अलमारी के पीछे एक गुप्त सीढ़ी लगवा रखी थी। एक बार एक नामी आर्टिस्ट किशोर दा से मिलने उनके घर पर पहुंचे। लेकिन, किशोर कुमार मीटिंग के मूड में नहीं थे। मुलाकात से बचने के लिए उन्होंने अलमारी खोली, अंदर कदम रखा और सीक्रेट सीढ़ी से गायब हो गए।
चाय से जुड़ा किस्सा सुन आ जाएगी हंसी
किशोर कुमार अक्सर अपनी शरारतों और हरफनमौला स्वभाव से निर्माताओं को मुश्किल में डाल देते थे। एक बार किशोर कुमार ने चाय की मांग के लिए 'भरोसा' नामक एक फिल्म के गाने की रिकॉर्डिंग रोक दी थी। लंबे इंतजार के बाद जब आखिर चाय आई तो उन्होंने एक घूंट नहीं पीया और रिकॉर्डिंग करने के लिए आगे बढ़ गए। दरअसल, किशोर कुमार के लिए चाय महत्वपूर्ण नहीं थी। उन्होंने सारा नाटक निर्माता के पैसे खर्च कराने और सभी संगीतकारों और कर्मचारियों के लिए चाय मंगवाने के लिए किया था।
भूल गए थे कौन है डायरेक्टर?
किशोर कुमार बेहद मनमौजी थे। वो क्या करेंगे ये कोई नहीं जानता था। उनके बेटे अमित ने एक इंटरव्यू में पिता से जुड़ा किस्सा साझा करते हुए बताया था, 'एक बार जब उनकी फिल्म की शूटिंग खत्म हुई और यूनिट के लोग उनसे पैसे मांगने आए तो किशोर बोले ये इतना ज्यादा कैसे हो गया, इतना तो नहीं होना चाहिए, ये समझता क्या है अपने आप को डायरेक्टर, ऐसा तो नहीं होगा, मैं प्रोड्यूसर हूं चलो भगाओ इस डायरेक्टर को इतना ज्यादा खर्चा कर रहा है, कौन है डायरेक्टर?' इस पर सबने कहा -'आप ही तो हैं'। किशोर बोले, 'हां अरे वो तो मैं ही हूं'।
मसूर की दाल देख बना लिया मसूरी जाने का प्लान
किशोर दा को बाजार जाकर छोटी- छोटी चीजें, तरह तरह के आइटम खरीदने का शौक था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक बार वे ऐसे ही बाजार गए, जहां अचानक मसूर की दाल देखकर उन्होंने तुरंत 'मसूरी' घूमने का प्लान बना लिया।
किशोर कुमार दूसरों को हंसाने में भी माहिर थी। फिल्म 'पड़ोसन' के हिट गीत 'चतुर नार' की रिकॉर्डिंग में पूरे 12 घंटे लग गए। इसमें से तीन घंटे तो किशोर दा की बातों पर हंस हंस कर सब का पेट दर्द हो गया।
क्यों लगा था किशोर कुमार के गानों पर प्रतिबंध?
सुरीली आवाज के धनी किशोर कुमार के गानों के दीवानों की कमी नहीं। क्या आप यकीन करेंगे कि ऐसे सिंगर के गानों पर कभी प्रतिबंध लगा दिया गया था। जी हां, ऐसा हुआ था किशोर कुमार की एक शर्त के चलते। विक्की लालवानी के साथ एक बातचीत में अमित कुमार ने इस बारे में बात करते हुए कहा था, 'साल 1976 में आपातकाल के दौरान सरकार ने कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों की योजना बनाई थी। इनमें कलाकारों को भाग लेना था। एक दिन फोन आया कि किशोर कुमार को दिल्ली के फ्लाइंग क्लब के एक शो में शामिल होना है। सरकारी अधिकारी ने कहा, 'हम प्लेन टिकट भेज रहे हैं, परसों आइए'। किशोर कुमार का जवाब था, 'मैं ऐसे नहीं आ सकता। आप को किसी को भेजना पड़ेगा'। उनके इस जवाब को लेकर अधिकारी चिढ़ गए और जवाब मिला, 'तो हम आपको बैन कर देंगे'। वही हुआ महज आठ घंटे के भीतर देशभर में किशोर कुमार के गानों पर प्रतिबंध लग गया।
प्रतिबंध के बाद यात्रा पर निकल गए थे किशोर दा
किशोर के गाने रेडियो और दूरदर्शन से हट गए। निर्माता-निर्देशकों को इशारा दिया गया कि जो फिल्में बन भी रही थीं, उसमें किशोर कुमार होंगे तो उनके गाने रिलीज नहीं होने दिए जाएंगे। अमित कुमार ने कहा, 'यह कोई अनऑफिशियल बैन नहीं था, यह ऑफिशियल बैन था'। इस प्रतिबंध पर शायद कोई और होता तो तनाव में आ जाता। मगर, वे किशोर कुमार थे। अपने मस्त अंदाज में रहे। बैन के बाद उन्होंने कहा, चलो केप कोमोरिन (कन्याकुमारी) चलते हैं। वे दक्षिण भारत की यात्रा पर निकल पड़े। विवेकानंद रॉक पर बैठकर घंटों अकेले समय बिताते, ऊटी और बैंगलोर घूमते रहे। यह प्रतिबंध करीब पांच महीने चला।
किशोर कुमार का फिल्मी करियर
उन्होंने फिल्म ‘दोस्ती’, ‘हकीकत’, ‘दूर गगन की छांव में’ जैसी फिल्मों में अभिनय किया। लेकिन ‘दूर गगन की छांव में’ को लेकर बहुत उम्मीद थी। इस फिल्म में सिंगिंग और अभिनय दोनों के साथ-साथ निर्देशन भी किया। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर हिट साबित हुई और दर्शकों का प्यार मिला।
बेटे की शादी टूटी तो पड़ा दिल का दौरा
1981 में उनके बेटे अमित कुमार की शादी तय हुई थी। लेकिन शादी के दस दिन पहले यह खबर आई कि दुल्हन पहले से विवाहित थी। कार्ड छप चुके थे। इस घटना ने किशोर दा को गहरी मानसिक पीड़ा दी। उन्होंने तुरंत कोलकाता जाने का निर्णय लिया, जिस दिन शादी होनी थी—24 जनवरी। वहीं जाकर उन्हें दिल का दौरा पड़ा और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। दिल का दौरा आने के बाद उनकी सेहत में तब सुधार नहीं हुआ। इसके बाद बाकी उम्र में वे दोबारा पूरी तरह सक्रिय नहीं हो पाए। स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याएं बढ़ती रहीं, जिससे उनकी शारीरिक स्थिति बिगड़ती गई। बता दें कि 1987 में किशोर कुमार का निधन अपने बडे़ भाई और सुपरस्टार अशोक कुमार के 76वें जन्मदिन पर हुआ था। अशोक कुमार का जन्म 13 अक्तूबर 1911 को हुआ था।
'दूध जलेबी खाएंगे खंडवा में बस जाएंगे'
किशोर दा को अपनी मातृभूमि खंडवा से बेहद लगाव था। जब भी मौका मिलता, वे अक्सर वहां जाते थे। किशोर कुमार अक्सर कहा करते थे, 'दूध जलेबी खाएंगे और खंडवा में बस जाएंगे'। हालांकि, उनकी यह ख्वाहिश अधूरी रह गई। उनका निधन मुंबई में हुआ। हालांकि, निधन के बाद उनका पार्थिव शरीर खंडवा लाया गया। वहीं, उनका अंतिम संस्कार किया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, किशोर कुमार का जन्मदिन हो या उनकी पुण्यतिथि, दोनों ही मौकों पर खंडवा में उनकी समाधि पर उनके प्रशंसक उन्हें दूध जलेबी का भोग लगाते हैं। किशोर दा जब भी खंडवा आते थे तो अपने दोस्तों के साथ शहर की गलियों, चौपालों पर गप्पें लड़ाते थे। खंडवा में उनकी ज्यादातर महफिलें जलेबी की दुकान पर ही सजती थीं।
किशोर कुमार की निजी जिंदगी
किशोर कुमार ने कुल चार शादियां की थीं। पहली शादी उन्होंने 1950 में गायिका रूमा गुहा ठाकुरता से की, जिससे उन्हें बेटा अमित कुमार हुआ, लेकिन ये रिश्ता 1958 में खत्म हो गया। दूसरी शादी 1960 में अभिनेत्री मधुबाला से की, जो उस वक्त गंभीर बीमारी से जूझ रही थीं; उनका साथ 1969 में मधुबाला की मौत तक रहा। तीसरी बार उन्होंने 1976 में योगिता बाली से शादी की, लेकिन दो साल में ही 1978 में तलाक हो गया। चौथी और आखिरी शादी 1980 में लीना चंद्रावरकर से की, जो उनके अंतिम समय तक उनके साथ रहीं।