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कभी सिनेमा का हिस्सा नहीं बनना चाहते थे गुलजार, बोले- ‘फिल्में देखता था लेकिन…’

Thu, 09 Oct 2025 01:12 PM IST
सिराजुद्दीन एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: सिराजुद्दीन Updated Thu, 09 Oct 2025 01:12 PM IST
सार

Gulzar On Cinema: गुलजार ने साहित्य और सिनेमा पर बात की है। उन्होंने भारतीय संगीत को वैश्विक स्तर पर पहुंचाने का श्रेय एआर रहमान को दिया है।

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Gulzar Never wanted to come in cinema he was interested in Books and literature
गुलजार - फोटो : एक्स

विस्तार

गुलजार बॉलीवुड के बेहतरीन गीतकार हैं। उन्होंने 'किताब', 'किनारा' और 'मौसम' जैसी फिल्मों का निर्देशन भी किया है। हाल ही में उन्होंने लोगों को यह कह कर हैरान कर दिया है कि उनका रुझान फिल्मों की तरफ नहीं था। उनका पहला प्यार साहित्य है।
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बुधवार शाम फिल्म निर्माता सुभाष घई के फिल्म संस्थान व्हिसलिंग वुड्स में आयोजित एक कार्यक्रम में गुलजार ने कहा कि एक पाठक के रूप में और एक लेखक बनने का सपना देखने वाले व्यक्ति के रूप में उनका रुझान किताबों की तरफ था।
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गुलजार को सिनेमा में नहीं थी रुचि
गुलजार ने कहा 'मैं कभी सिनेमा में नहीं आना चाहता था और मैं सिनेमा के लिए लिखना भी नहीं चाहता था। मैं इसके लिए मना कर देता था। मुझे किताबों का बहुत शौक था।' 
गुलजार ने कहा 'मैं फिल्में देखता था लेकिन मुझे सिनेमा से उतना प्यार नहीं था कि मैं निर्देशक बनता। यह तब शुरू हुआ जब मैं सिनेमा में आया।'
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संगीत और कविता अहम हैं
गुलजार ने कहा 'संगीत और कविता अहम हैं, सिनेमा में ये हमारे साथ हैं क्योंकि ये हमारी संस्कृति का हिस्सा हैं। ये पीढ़ियों से चली आ रही हैं। दोनों माध्यम आज भी याद किए जाते हैं।'

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Gulzar Never wanted to come in cinema he was interested in Books and literature
गुलजार - फोटो : एक्स @FilmHistoryPic
एआर रहमान की तारीफ की
गुलजार ने भारतीय संगीत को विश्व स्तर पर लोकप्रिय बनाने का श्रेय एआर रहमान को दिया। उन्होंने कहा 'शुरुआत में, जब हम फिल्मों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भेजते थे, तो फिल्मों से गाने हटा दिए जाते थे। लेकिन आज भारतीय संगीत अपने चरम पर पहुंच गया है और गाने जोड़ने की मांग बढ़ रही है। इसका श्रेय एआर रहमान को जाता है।
गुलजार ने एआर रहमान के साथ 'जय हो', 'छैय्या छैय्या' और 'तेरे बिना' जैसे गीतों पर काम किया है।

गीतकार के रूप में करियर की शुरुआत
आजादी से पहले के पंजाब (अब पाकिस्तान में) में सम्पूर्ण सिंह कालरा के रूप में जन्मे गुलजार को भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े कहानीकारों में से एक माना जाता है। गुलजार ने 'रावी पार', 'त्रिवेणी' और 'बोस्की का पंचतंत्र' जैसी किताबें लिखी हैं।
उन्होंने 1956 में अपने करियर की शुरुआत की और बिमल रॉय की 'बंदिनी' (1963) से गीतकार के रूप में अपनी शुरुआत की, जिसमें उन्होंने 'मोरा गोरा अंग लई ले' गीत लिखा।
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