{"_id":"678000b303b9a9381b054a2d","slug":"famous-singer-p-jayachandran-passes-away-at-the-age-of-80-2025-01-09","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"P Jayachandran: मशहूर सिंगर जयचंद्रन का 80 साल की उम्र में निधन, 16000 से ज्यादा गा चुके थे गाने","category":{"title":"Entertainment","title_hn":"मनोरंजन","slug":"entertainment"}}
P Jayachandran: मशहूर सिंगर जयचंद्रन का 80 साल की उम्र में निधन, 16000 से ज्यादा गा चुके थे गाने
Thu, 09 Jan 2025 10:30 PM IST
मोहम्मद फायक अंसारी
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Published by: मोहम्मद फायक अंसारी
Updated Thu, 09 Jan 2025 10:30 PM IST
सार
मशहूर पी जयचंद्रन का 80 साल की उम्र में निधन हो गया। निजी अस्पताल में इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली।
विज्ञापन
पी जयचंद्रन
- फोटो : पीटीआई
विस्तार
मशहूर सिंगर पी जयचंद्रन का निधन हो गया। वह 80 वर्ष के थे। जयचंद्रन का निधन निजी अस्पताल में इलाज के दौरान हुआ। उन्हें गुरुवार को उनके घर पर गिरने के बाद अस्पताल भर्ती कराया गया था। वह लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे।
विज्ञापन
Trending Videos
16000 से ज्यादा गाए थे गाने
जयचंद्रन ने मलयालम, तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और हिंदी में 16,000 से अधिक गाने गाए थे। उन्हें भारतीय संगीत के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए कई पुरस्कारों से नावाज गया था। इनमें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और केरल सरकार का जे सी डैनियल पुरस्कार शामिल है।
Mahendra Kapoor: मनोज कुमार वीरों की कहानी सुनाते फिर डैडी देशभक्ति गीत गाते थे, रफी साहब को गुरु मानते थे
जयचंद्रन ने मलयालम, तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और हिंदी में 16,000 से अधिक गाने गाए थे। उन्हें भारतीय संगीत के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए कई पुरस्कारों से नावाज गया था। इनमें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और केरल सरकार का जे सी डैनियल पुरस्कार शामिल है।
Mahendra Kapoor: मनोज कुमार वीरों की कहानी सुनाते फिर डैडी देशभक्ति गीत गाते थे, रफी साहब को गुरु मानते थे
विज्ञापन
इस गाने के लिए मिला राष्ट्रीय पुरस्कार
फिल्म श्री नारायण गुरु में 'शिव शंकर शरण सर्व विभो' के उनके प्रदर्शन ने उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार दिलाया। इरिनजालकुडा के क्राइस्ट कॉलेज से जूलॉजी में स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने चेन्नई में एक निजी फर्म में भी काम किया।
फिल्म श्री नारायण गुरु में 'शिव शंकर शरण सर्व विभो' के उनके प्रदर्शन ने उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार दिलाया। इरिनजालकुडा के क्राइस्ट कॉलेज से जूलॉजी में स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने चेन्नई में एक निजी फर्म में भी काम किया।
ऐसे शुरू हुआ फिल्मों में सफल
इस दौरान निर्माता शोभना परमेश्वरन नायर और निर्देशक ए विंसेंट ने चेन्नई में एक संगीत शो में उनके प्रदर्शन को देखा और उन्हें एक फिल्म में गाने का मौका दिया। इस तरह 1965 में फिल्म 'कुंजली मरक्कर' के लिए प्रख्यात गीतकार पी भास्करन द्वारा लिखे गए गीत 'ओरु मुल्लाप्पू मलयुमई' से उनकी शुरुआत हुई। हालांकि, उनका पहला रिलीज किया गया गाना 'कालिथोजान' नाम की फिल्म का 'मंजालयिल मुंगीथोर्थी' था।