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Renukaswamy Murder Case: दर्शन की जमानत रद्द होने पर एक्ट्रेस राम्या का बयान, बोलीं- न्याय सभी के लिए बराबर
Thu, 14 Aug 2025 08:08 PM IST
हिमांशु सोनी
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Published by: हिमांशु सोनी
Updated Thu, 14 Aug 2025 08:08 PM IST
सार
Ramya on Darshan Bail Rejected: कन्नड़ अभिनेता दर्शन की जमानत सुप्रीम कोर्ट की ओर से खारिज कर दी गई। रेणुकास्वामी मर्डर केस में फंसे दर्शन को लेकर पूर्व सांसद राम्या ने क्या कुछ कहा है, चलिए आपको बताते हैं।
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दर्शन, पवित्रा और राम्या
- फोटो : एक्स
विस्तार
दक्षिण भारतीय सिनेमा के चर्चित अभिनेता दर्शन एक बार फिर सुर्खियों में हैं। सुप्रीम कोर्ट ने रेणुकास्वामी हत्याकांड मामले में दर्शन और अभिनेत्री पवित्रा गौड़ा की जमानत को रद्द कर दिया है। अब इसी मामले पर राम्या उर्फ दिव्या स्पंदना ने अपनी राय दी है।
अभिनेत्री और पूर्व सांसद राम्या का बयान
अभिनेत्री और पूर्व सांसद राम्या उर्फ दिव्या स्पंदना ने इस पर खुलकर प्रतिक्रिया दी। इंस्टाग्राम पर साझा किए गए अपने बयान में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय की सराहना करते हुए लिखा कि 'यह फैसला एक सशक्त संदेश है, कानून सबके लिए एक जैसा है।' उन्होंने न्यायपालिका में विश्वास बनाए रखने की बात कहते हुए लोगों से अपील की कि वो न्याय की प्रक्रिया में भरोसा रखें और कानून को अपने हाथ में न लें।
ये खबर भी पढ़ें: Shilpa Shirodkar: शिल्पा शिरोडकर की कार को बस ने मारी टक्कर, शिकायत दर्ज, एक्ट्रेस बोलीं- 'कुछ भी हो सकता था'
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राम्या ने दिया मैसेज
राम्या ने अपने पोस्ट में यह भी कहा कि इंसाफ की राह भले ही कठिन और लंबी हो, लेकिन आखिरकार न्याय मिलता है। उन्होंने युवाओं और अपने फॉलोअर्स से आग्रह किया कि वो संवैधानिक रास्ता अपनाएं और हिंसा या बदले की भावना को त्यागें।
रेणुकास्वामी हत्याकांड का मामला
यह मामला वर्ष 2024 के जून महीने का है, जब बेंगलुरु में 33 वर्षीय युवक रेणुकास्वामी, जो कथित रूप से अभिनेत्री पवित्रा गौड़ा का फैन था, लापता हो गया था। पुलिस के अनुसार, रेणुकास्वामी पर यह आरोप था कि उसने गौड़ा को आपत्तिजनक संदेश भेजे थे। इसके बाद उसे कथित तौर पर दर्शन और उनके साथियों ने अगवा कर एक गोदाम में तीन दिनों तक बंधक बनाकर रखा और बेरहमी से प्रताड़ित किया गया।
तीन दिन की यातना के बाद उसकी मौत हो गई और शव को बेंगलुरु की एक नाली में फेंक दिया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने हत्या, अपहरण और साजिश की धाराओं में केस दर्ज किया और कई लोगों को गिरफ्तार भी किया।
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
इस मामले में पहले कर्नाटक हाईकोर्ट ने दर्शन और पवित्रा को जमानत दे दी थी, जिस पर पीड़ित पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। जस्टिस जेबी पारदीवाला और आर महादेवन की पीठ ने जमानत आदेश को खारिज करते हुए टिप्पणी की कि हाईकोर्ट का आदेश कानूनी दृष्टिकोण से कई खामियों से भरा हुआ था। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि दर्शन और दूसरे आरोपियों को तुरंत हिरासत में लिया जाए और ट्रायल को प्राथमिकता के आधार पर चलाया जाए ताकि पीड़ित को न्याय मिल सके।
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अभिनेत्री और पूर्व सांसद राम्या का बयान
अभिनेत्री और पूर्व सांसद राम्या उर्फ दिव्या स्पंदना ने इस पर खुलकर प्रतिक्रिया दी। इंस्टाग्राम पर साझा किए गए अपने बयान में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय की सराहना करते हुए लिखा कि 'यह फैसला एक सशक्त संदेश है, कानून सबके लिए एक जैसा है।' उन्होंने न्यायपालिका में विश्वास बनाए रखने की बात कहते हुए लोगों से अपील की कि वो न्याय की प्रक्रिया में भरोसा रखें और कानून को अपने हाथ में न लें।
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राम्या ने दिया मैसेज
राम्या ने अपने पोस्ट में यह भी कहा कि इंसाफ की राह भले ही कठिन और लंबी हो, लेकिन आखिरकार न्याय मिलता है। उन्होंने युवाओं और अपने फॉलोअर्स से आग्रह किया कि वो संवैधानिक रास्ता अपनाएं और हिंसा या बदले की भावना को त्यागें।
रेणुकास्वामी हत्याकांड का मामला
यह मामला वर्ष 2024 के जून महीने का है, जब बेंगलुरु में 33 वर्षीय युवक रेणुकास्वामी, जो कथित रूप से अभिनेत्री पवित्रा गौड़ा का फैन था, लापता हो गया था। पुलिस के अनुसार, रेणुकास्वामी पर यह आरोप था कि उसने गौड़ा को आपत्तिजनक संदेश भेजे थे। इसके बाद उसे कथित तौर पर दर्शन और उनके साथियों ने अगवा कर एक गोदाम में तीन दिनों तक बंधक बनाकर रखा और बेरहमी से प्रताड़ित किया गया।
तीन दिन की यातना के बाद उसकी मौत हो गई और शव को बेंगलुरु की एक नाली में फेंक दिया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने हत्या, अपहरण और साजिश की धाराओं में केस दर्ज किया और कई लोगों को गिरफ्तार भी किया।
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
इस मामले में पहले कर्नाटक हाईकोर्ट ने दर्शन और पवित्रा को जमानत दे दी थी, जिस पर पीड़ित पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। जस्टिस जेबी पारदीवाला और आर महादेवन की पीठ ने जमानत आदेश को खारिज करते हुए टिप्पणी की कि हाईकोर्ट का आदेश कानूनी दृष्टिकोण से कई खामियों से भरा हुआ था। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि दर्शन और दूसरे आरोपियों को तुरंत हिरासत में लिया जाए और ट्रायल को प्राथमिकता के आधार पर चलाया जाए ताकि पीड़ित को न्याय मिल सके।