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Agni: मिलिए देश की पहली महिला फायरफाइटर हर्षिणी से, ‘अग्नि’ मे संयमी खेर के रोल में इन्हीं का दिख रहा रुआब
Fri, 06 Dec 2024 02:48 PM IST
अंजू बाजपेई
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Published by: अंजू बाजपेई
Updated Fri, 06 Dec 2024 02:48 PM IST
सार
भारत की पहली महिला फायरफाइटर हर्षिणी कान्हेकर ने लैंगिक मानदंडों को चुनौती देते हुए पुरुष प्रधान क्षेत्र में एक नई पहचान बनाई है। हाल ही में रिलीज हुई फिल्म 'अग्नि' में संयमी खेर का किरदार उनसे प्रेरित हैं। जानिए हर्षिणी की कहानी..
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हर्षिणी कान्हेकर
- फोटो : इंस्टाग्राम@harshinikanhekar
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विस्तार
'रईस' फेम निर्देशक राहुल ढोलकिया की नई फिल्म 'अग्नि' 6 दिसंबर को ओटीटी पर रिलीज हुई है। सीरीज में प्रतीक गांधी और संयमी खैर जैसे कलाकार फायर फाइटर्स का किरदार निभा रहे हैं। फिल्म में संयमी ने जो किरदार निभाया है वो देश की पहली महिला फायरफाइटर हर्षिणी कान्हेकर से प्रेरित है। इस खबर में जानिए हर्षिणी कान्हेकर के बारे में…
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भारत की पहली महिला फायर फाइटर हैं हर्षिणी
हर्षिणी कान्हेकर ने लैंगिक मानदंडों को चुनौती देते हुए पुरुष प्रधान क्षेत्र में एक नई पहचान बनाई है। हर्षिणी भारत की पहली महिला फायर फाइटर हैं, जिनका कार्य बुलंद हौंसले को दर्शाता है। उनके इस सफर ने देश भर की महिलाओं को प्रेरित किया है, जो रूढ़िवादिता को तोड़ती है और साबित करती है कि दृढ़ संकल्प किसी भी पेशे में पुरुष हो या महिला एक होता है।
हर्षिणी कान्हेकर ने लैंगिक मानदंडों को चुनौती देते हुए पुरुष प्रधान क्षेत्र में एक नई पहचान बनाई है। हर्षिणी भारत की पहली महिला फायर फाइटर हैं, जिनका कार्य बुलंद हौंसले को दर्शाता है। उनके इस सफर ने देश भर की महिलाओं को प्रेरित किया है, जो रूढ़िवादिता को तोड़ती है और साबित करती है कि दृढ़ संकल्प किसी भी पेशे में पुरुष हो या महिला एक होता है।
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कड़ी मेहनत करती हैं, पैरामेडिक्स की भी जानकार
फायर फाइटर के तौर पर हर्षिणी की जिंदगी का ज्यादातर समय कड़ी मेहनत और ड्रिल एक्टिविटिज में जाता है। बचाव कार्य के दौरान इस्तेमाल होने वाले भारी उपकरणों को संभालने और उठाने में भी वो पूरी तरह से कुशल हैं। इसके अलावा हर्षिनी को भारी वाहनों, पैरामेडिक्स, नगर नियोजन और बचाव तकनीक की भी खास जानकारी है।
फायर फाइटर के तौर पर हर्षिणी की जिंदगी का ज्यादातर समय कड़ी मेहनत और ड्रिल एक्टिविटिज में जाता है। बचाव कार्य के दौरान इस्तेमाल होने वाले भारी उपकरणों को संभालने और उठाने में भी वो पूरी तरह से कुशल हैं। इसके अलावा हर्षिनी को भारी वाहनों, पैरामेडिक्स, नगर नियोजन और बचाव तकनीक की भी खास जानकारी है।
साहस और दृढ़ संकल्प की मिसाल
साहस और दृढ़ संकल्प का पर्याय बन चुकी हर्षिनी ने 2002 में देश की पहली महिला फायर फाइटर के रूप में अपने सफर से भारत में एक नई पहचान बनाई है। पिछले दो दशकों से उनका जीवन रूढ़ियों को चुनौती देने और पुरुष-प्रधान पेशे में कई बाधाओं को तोड़ने का एक प्रमाण रहा है। दो दशक पहले तक, भारत में अग्निशमन की दुनिया में केवल पुरुषों का ही वर्चस्व था। उनके माता-पिता का अटूट समर्थन चुनौतीपूर्ण वातावरण में काम करने की आकांक्षा रखने वाली बेटियों के लिए प्रोत्साहन का एक शानदार उदाहरण है।
साहस और दृढ़ संकल्प का पर्याय बन चुकी हर्षिनी ने 2002 में देश की पहली महिला फायर फाइटर के रूप में अपने सफर से भारत में एक नई पहचान बनाई है। पिछले दो दशकों से उनका जीवन रूढ़ियों को चुनौती देने और पुरुष-प्रधान पेशे में कई बाधाओं को तोड़ने का एक प्रमाण रहा है। दो दशक पहले तक, भारत में अग्निशमन की दुनिया में केवल पुरुषों का ही वर्चस्व था। उनके माता-पिता का अटूट समर्थन चुनौतीपूर्ण वातावरण में काम करने की आकांक्षा रखने वाली बेटियों के लिए प्रोत्साहन का एक शानदार उदाहरण है।
पूरा हुआ हर्षिणी का सपना
हर्षिणी ने अपने जीवन में फायरफाइटर के तौर पर कई चुनौतियों का सामना किया है। हर्षिणी का सपना था कि वो सशस्त्र बल में शामिल हों और सेना की वर्दी पहनें, लेकिन भाग्य से वो एक फायर फाइटर बनीं। 26 साल की उम्र में उन्होंने फायर और आपातकालीन सेवाओं के एक कोर्स में प्रवेश लिया। इस कोर्स को पास करने के बाद हर्षिणी ने ऑयल एंड नैचुरल गैस कमिशन में फायर इंजीनियर बनीं। वह पहली भारतीय महिला हैं, जिन्होंने साल 2002 में इस कोर्स में दाखिला लिया। इतना ही नहीं, वे पहली महिला बनीं जिन्होंने इस कोर्स में एडमिशन के बाद उसे पास किया और आगे बढ़ीं।
हर्षिणी ने अपने जीवन में फायरफाइटर के तौर पर कई चुनौतियों का सामना किया है। हर्षिणी का सपना था कि वो सशस्त्र बल में शामिल हों और सेना की वर्दी पहनें, लेकिन भाग्य से वो एक फायर फाइटर बनीं। 26 साल की उम्र में उन्होंने फायर और आपातकालीन सेवाओं के एक कोर्स में प्रवेश लिया। इस कोर्स को पास करने के बाद हर्षिणी ने ऑयल एंड नैचुरल गैस कमिशन में फायर इंजीनियर बनीं। वह पहली भारतीय महिला हैं, जिन्होंने साल 2002 में इस कोर्स में दाखिला लिया। इतना ही नहीं, वे पहली महिला बनीं जिन्होंने इस कोर्स में एडमिशन के बाद उसे पास किया और आगे बढ़ीं।
महिलाओं की रोल मॉडल हैं हर्षिणी
2006 में हर्षिनी ओएनजीसी में शामिल हो गईं और आखिरकार, वह अब वरिष्ठ अग्निशमन अधिकारी के पद तक पहुंच गई हैं। उन्होंने मुम्बई, कोलकाता और दिल्ली में आग बुझाने का काम किया और तो और एक टिन फैक्ट्री में छह घंटे तक चले अपने महत्वपूर्ण ऑपरेशन के लिए प्रशंसा अर्जित की। उन्होंने बाढ़, इमारत ढहने, नदी के उफान और वन्यजीव हमलों के दौरान नागरिकों को बचाया है, जिससे सार्वजनिक सुरक्षा के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता प्रदर्शित होती है। आज हर्षिनी पूरे भारत में महिलाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा बन गई हैं।
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2006 में हर्षिनी ओएनजीसी में शामिल हो गईं और आखिरकार, वह अब वरिष्ठ अग्निशमन अधिकारी के पद तक पहुंच गई हैं। उन्होंने मुम्बई, कोलकाता और दिल्ली में आग बुझाने का काम किया और तो और एक टिन फैक्ट्री में छह घंटे तक चले अपने महत्वपूर्ण ऑपरेशन के लिए प्रशंसा अर्जित की। उन्होंने बाढ़, इमारत ढहने, नदी के उफान और वन्यजीव हमलों के दौरान नागरिकों को बचाया है, जिससे सार्वजनिक सुरक्षा के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता प्रदर्शित होती है। आज हर्षिनी पूरे भारत में महिलाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा बन गई हैं।
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