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Samwad 2025: संवाद में बोले सुनील शेट्टी- इंडस्ट्री का होकर भी इसका हिस्सा नहीं; शाम 6 बजे के बाद परिवार जरूरी

Tue, 10 Jun 2025 11:45 AM IST
ज्योति राघव एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: ज्योति राघव Updated Tue, 10 Jun 2025 11:45 AM IST
सार

Amar Ujala Samwad Uttarakhand: अमर उजाला के प्रतिष्ठित कार्यक्रम संवाद का आयोजन राजधानी देहरादून में किया जा रहा है। मंगलवार को कार्यक्रम में अभिनेता सुनील शेट्टी ने 'सिनेमा, फिटनेस और कारोबार' विषय पर चर्चा की।

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Uttarakhand Samwad 2025: suniel shetty talks about cinema fitness and business at Amarujala Samwad in Dehradun
सुनील शेट्टी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आज मंगलवार 10 जून को देहरादून में अमर उजाला संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इसमें खेल, राजनीति, अध्यात्म एवं सिनेमा सहित अलग-अलग क्षेत्र से जुड़े दिग्गज शामिल हुए हैं। अभिनेता सुनील शेट्टी ने भी संवाद में शिरकत की। यहां उन्होंने 'सिनेमा, फिटनेस और कारोबार' विषय पर बात रखी। जानिए उन्होंने क्या कहा?

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संवाद में अभिनेता सुनील शेट्टी को स्टैंडिंग ओवेशन दिया गया। इसके बाद बातचीत की शुरुआत उनकी पृष्ठभूमि पर चर्चा के साथ हुई। उनके पिता के बारे में बात की गईं। इसके बाद पूछा गया कि देहरादून से आपकी क्या यादें रही हैं?
सुनील शेट्टी ने कहा, 'देहरादून के बारे में जितना कहूं कम ही है। यह शिक्षा का हब है। इस शहर ने सैनिक दिए हैं, जो भारत मां के लिए अपनी जान नौछावर कर चुके हैं। यह वीरों की भूमि है। यहां की खुशबू अलग ही है। यहां के लोग बहुत अच्छे हैं। मेरे बेटे की पहली फिल्म यहां शूट हुई थी। मेरी अपनी फिल्म 'बॉर्डर की शूटिंग यहां हुई और बॉर्डर 2 की भी हो रही है'।

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आपका बचपन कैसा रहा। क्या आपको लगता है कि वह आपकी लाइफ का स्वर्णिम दौर था?
उस वक्त की तुलना नहीं कर सकता। मुझे लगता है किबच्चे सुनकर नहीं सीखते, देखकर सीखते हैं। बच्चे 10 चीजें सुनेंगे, लेकिन ध्यान नहीं देंगे। जब आप उन्हें करके दिखाते हैं, तब वो सीखते हैं। मेरे पिताजी के लिए परिवार सब कुछ था। उन्होंने परिवार के लिए बहुत कुछ किया। मैं भी आज कुछ भी करता हूं तो मेरे लिए परिवार मायने रखता है। मैं इस (बॉलीवुड) इंडस्ट्री का हिस्सा होकर भी इंडस्ट्री का हिस्सा नहीं हूं। मैं शाम छह बजे के बाद परिवार के साथ ही रहता हूं। दुनिया में बहुत सारा पैसा है, लेकिन आपको तय करना है कि आपको क्या करना है। मैं आज भी कुछ करता हूं तो मेरा परिवार मुझे बहुत मायने रखता है। मेरे पिताजी से यह सीख मुझे मिली।

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क्या आपने भी ऐसा किया है कि घर के अंदर पानी गिराकर, उस पर डिटर्जेंट गिराकर उस पर फिसले हैं। क्या ये सच है?
सुनील शेट्टी ने कहा, 'हां, बिल्कुल ऐसा किया है। यह सफाई का एक हिस्सा था। मैं अकेला नहीं करता था पूरा स्टाफ ऐसा करता था, पिताजी के होटल का। सफाई के साथ-साथ मस्ती होती थी'।

Uttarakhand Samwad 2025: suniel shetty talks about cinema fitness and business at Amarujala Samwad in Dehradun
सुनील शेट्टी - फोटो : अमर उजाला

आपके पिताजी ने ऐसा क्या सिखाया जो आपका लाइफ लेसन बन गया?
सच्चाई का पाठ। जब आप सच्चे और ईमानदार होते हैं तो आपके अंदर डर नाम की चीज नहीं होती। जब आपको पता होता है कि इंटेन्शनली आप कुछ गलत नहीं कर रहे तो डर नहीं होता है। आप सोचते हो कि मैं यह काम कर सकता हूं, क्योंकि मैं ईमानदार हूं तो आप उस चीज को हासिल कर लेते हो। यह मेरे पिताजी ने सिखाया। आपको डरने और हिचकिचाने की जरूरत नहीं है। उदाहरण दूं तो मुंबई के कमाठीपुरा जैसी जगह पर 400 बच्चियां फसी हुई थीं। उन्हें कैसे निकाला जाए। हमने सोच लिया कि उन्हें निकालेंगे। लेकिन पुलिस का साथ होना जरूरी था। लेकिन, हमने सोच लिया कि नहीं हो जाएगा। तब हमारा इरादा नेक था। 400 बच्चियों को यह कहा गया कि आपको चुप रहना है। उन बच्चियों ने वादा निभाया। पुलिस, गृह मंत्रालय, मुख्यमंत्री को जब बताया गया तो उन्होंने भी महसूस किया कि यह नेक काम है। तो उस काम में हमें सभी का साथ मिला। जब आप सकारात्मक चीजें सोचते हैं तो नकारात्मक चीजें आपके साथ नहीं होतीं। ऐसा पहले कभी हुआ नहीं है शायद। हमारे अंदर डर नहीं था, क्योंकि हमारी इंटेन्शन साफ थी। यह छोटी-छोटी चीजें हैं, लेकिन बहुत महत्वपूर्ण हो सकती हैं।

एक्टिंग का पहला ब्रेक आपके पास किस तरह से आया था? क्या उत्सुकता थी? माता-पिता की क्या प्रतिक्रिया थी?
एक्टिंग का ऑफर इसलिए आया, क्योंकि मैं मार्शल आर्टिस्ट था। जिंदगी में एक स्टेज आती है हमेशा। जैसा कि लोग बोलते हैं कि फिल्में चल नहीं रहीं तो मुझे लगता है कि कुछ बड़ा होने वाला है। जब मुझे फिल्मों का पहला ऑफर हुआ तो वह दौर था जब डीवीडी पर फिल्में आने लगी थीं। लोगों ने सोचा कि कोई थिएटर जाएगा नहीं, और लोग घर बैठे-बैठे फिल्में देखेंगे। उस परिवर्तन के दौर में एक्शन बहुत चल रहा था। मैं मार्शल आर्ट बैकग्राउंड से आता हूं। किसी ने मुझे स्टेज पर लाइव देखा। उन्होंने मुझे ऑफर किया। एक टफ दौर में मुझे मौका मिला, क्योंकि एक्शन ही है जो मास तक पहुंचता है। मुझे मौका मिला। मैंने पिताजी को जाकर बताया। उन्होंने कहा कि ध्यान देकर काम करोगे। रेस्टोरेंट के बारे में और बाकी चीजों के बारे में भूल जाओगे। लेकिन एक बात याद रखना कि एक छोटे से गांव का लड़का, मैंगलोर से जब निकलेगा तो पहले अपने गांव, अपने कौम के बारे में सोचकर स्टेप लेना। मैंने तभी तय किया कि मैं अपनी जिंदगी में कितना भी हासिल करूंगा मैं नहीं जानता हूं, लेकिन जब निकलूंगा तो एक गुडविल के साथ निकलूंगा। लोग कहें कि यह बहुत ईमानदार इंसान है।

उस समय एक्शन फिल्में बहुत आ रही थीं। क्या आपको ऐसा लगा कि मैं रोमांस वाले रोल भी कर सकता हूं, तो वैसे रोल भी मेरी तरफ आने चाहिए।
एक्टर ने कहा, 'बिल्कुल ऐसा लगता था। एक्शन फिल्में सक्सेसफुल थीं। खासतौर से जब बेटी हुई और बेटी, मां और पत्नी फिल्में देखते थे और मैं घर जाकर पूछता कि कैसी लगी फिल्म तो मुझे बहुत अच्छा लगा। साथ ही मैं ये भी देखता कि घर में सिरदर्द की गोलियां बहुत हैं, क्योंकि एक्शन देखकर सबके सिर में दर्द होने लगता था। जब सिरदर्द की गोलियां ज्यादा इस्तेमाल होने लगीं तब मुझे अहसास हुआ कि कुछ और करना चाहिए। तब मैंने गोपी किशन, धड़कन और हेराफेरी जैसी फिल्में करने की कोशिश की। मेरी बहुत सारी फिल्में नहीं चलीं। मैं हारा। ट्रांजीशन लोगों को पसंद नहीं आया, लेकिन लगातार ट्राई करने के बाद मैं कहीं न कहीं जाकर सेटल हो गया।

Uttarakhand Samwad 2025: suniel shetty talks about cinema fitness and business at Amarujala Samwad in Dehradun
संवाद में सुनील शेट्टी - फोटो : अमर उजाला

आपको सब अन्ना कहते हैं। अन्ना का मतलब बड़ा भाई होता है। आपका बड़ा भाई कौन है?
मेरे कजिन ब्रदर हैं सुधीर शेट्टी। हम सब होटल लाइन से आते हैं। वे पहले थे, जिन्होंने रियल एस्टेट का बिजनेस शुरू किया और बहुत सफल हुए। वे 21 या 22 के थे तब उनके पिताजी गुजर गए थे। उन्होंने सफल बिजनेस किया। उन्होंने अपना मार्ग बदलकर कुछ और भी किया। 

आप पढ़ाई के लिए बाहर जा सकते थे। मगर, उस मौके पर आपने कहा कि मेरी बहन जाएगी बाहर पढ़ने। आज से 45 साल पहने आपकी बहन बाहर गई थीं पढ़ने। आपको अपने देश में अपने मां-बाबा के साथ रहना था। यह फैसला कैसे लिया?
पिताजी के पास बजट सीमित था। पिताजी हमेशा कहते थे कि बेटियों को पढ़ाना बहुत जरूरी है। मेरी दो बहने हैं। वे (पिताजी) दो बच्चों की पढ़ाई एफोर्ड कर सकते थे। ये भी वजह थी कि मैं भारत, अपने मां-बाप को छोड़ना नहीं चाहता था। मैं भी बिजनेस में कुछ करना चाहता था। 

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सुनील शेट्टी - फोटो : अमर उजाला

कभी आप पुराने घर, गलियों में जाते हो तो लगता है कि मुझसे अमीर यहां की यादें हैं?
बिल्कुल लगता है। छोटे घरों में दरवाजे एक-दूसरे के लिए खुले रहते हैं। बड़ी इमारतों में हमें नहीं पता होता कि पड़ोस में कौन रहता है। जैकी दादा हमेशा एक जरूरी बात बताते हैं- जब वो एक खोली (कमरे) में रहते थे तो मां खांसती थीं तो उन्हें पता चल जाता था कि उन्हें दवा-पानी की जरूरत है। जब वो पांच बेडरूम के फ्लैट में चले गए तो एक ही घर में रहते हुए मां खांसते-खांसते गुजर गईं और उन्हें पता नहीं चला। ...हम जिंदगी में बड़ा घर, बड़ी गाड़ी चाहते हैं, लेकिन यह मायने नहीं रखता। परिवार के साथ मिलजुलकर रहना सबसे जरूरी है।

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सुनील शेट्टी - फोटो : अमर उजाला

क्या बेटे अहान के साथ ऐसी चर्चा होती है कि यह सीन ऐसे करना चाहिए?
नहीं, उसकी अपनी पर्सनैलिटी बाहर आना बहुत जरूरी है। मैंने हमेशा उससे यही कहा कि फेलियर से डरना मत। फेल हुए तो दोबारा कोशिश करना। कुछ और कर लेना, लेकिन टूटना मत। आजकल के बच्चों को एंजाइटी और डिप्रेशन बहुत जल्दी आ जाता है। मोबाइल फोन पर रहते हैं। बच्चे वर्चुअल वर्ल्ड में जी रहे हैं। रियल वर्ल्ड में नहीं जी रहे हैं। आप बस रियल रहें और असफलता से मत डरो। लोग बोल देते हैं कि फ्लॉप एक्टर है। मेरी फिल्म फ्लॉप हुईं, मैं तो फ्लॉप नहीं हुआ।

कौन सी चीज हमारे देश को उजाले की तरफ ले जाएगी?
शिक्षा, शिक्षा और शिक्षा। हमारी कोशिश यही होनी चाहिए कि सबको एजुकेशन मिले। सबका शिक्षित होना बहुत जरूरी है। सेहत बहुत जरूरी है।

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सुनील शेट्टी - फोटो : अमर उजाला

90 का वो दशक, जब आप फिटनेस को फिल्मों में लेकर आए थे। आज बहुत से इंफ्लुएंस हेल्थ टिप्स देते हैं। सुनील शेट्टी के हेल्थ का क्या मंत्र था, जो आज भी वो फॉलो करते हैं?
निरंतरता। सोमवार से शनिवार तक, मैं वर्कआउट करता हूं। नींद, अच्छा और सादा खाना। साढ़े छह बजे तक खाना। लोग जिम और प्रोटीन शेक के बारे में बात करते हैं। पहले यह फैसला लेना है कि हमें जिम जाना है। इसमें कंसिस्टेंसी बहुत जरूरी है। मैं तब भी प्योर खाना खाता था, मां के हाथ का खाना। मां के हाथ से प्यार में घी ज्यादा डल जाता था, उसके लिए वर्कआउट करना। सीजन वाले फल खाना। मैं आज 64 का हूं और मैं अगर फिट हूं तो मैं बहुत साधारण चीजें करता हूं। मैं कभी प्रोटीन शेक नहीं लेता। मुझे वह अपने खाने में अपनी खुराक में मिल जाता है। लोग जिम और प्रोटीन शेक के बारे में बात करते हैं, लेकिन निरंतरता और अनुशासन जरूरी है। सोमवार से शनिवार कसरत जरूरी है। हर कीमत पर नींद जरूरी है। साढ़े छह-सात बजे से पहले खाना खत्म कर देना जरूरी है। सीजनल फल-सब्जियां खाएं। जो फल-सब्जियां सर्दियों में मिलती हैं, वो गर्मियों में खा रहे हैं तो फायदा नहीं है। मैं कभी प्रोटीन शेक नहीं लेता। मैं नहीं जानता कि वह अच्छा है या बुरा। स्वस्थ रहना बीमार रहने से ज्यादा सस्ता है।

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सुनील शेट्टी - फोटो : अमर उजाला

जो स्टार्टअप शुरू कर रहा है और वो आपको अप्रोच करना चाहे तो?
मुझसे अभिनय और कारोबार, दोनों ही नहीं हुआ यानी मुझे इनमें बहुत नाकामियां मिलीं, लेकिन मैंने इससे काफी सीखा। मैंने अच्छे लोगों में निवेश किया। उन्होंने तरक्की की तो मैंने भी तरक्की की। कामयाबी उनकी है, श्रेय भले ही मुझे मिलता हो। मेरे पास बहुत मजबूत टीम है। कोई मेरे पास आता है तो मैं उसे रास्ता दिखाता हूं। एक परिवर्तनकारी विचार होना जरूरी है। स्टार्टअप शुरू करने वाले के पास उतना ही जुनून होना चाहिए, जितना जुनून आप पर पैसे लगाने वाले में होता है।  बता दूं कि स्टार्टअप के लिए बहुत धैर्य की जरूरत है। मैं ट्रेडिशनल बिजनेस में यकीन रखता हूं। स्टार्टअप से एक चीज समझ में आ गई है कि कुछ साल में समझ आता है कि यह काम करने के लायक है कि नहीं। अभिनेता ने अपने काम को लेकर कहा, 'आप अगर अपने काम से अपने बच्चे की तरह प्यार नहीं करेंगे तो काम भी आपको प्यार नहीं करेगा'। 

टेलीविजन पर अक्सर लोग आपकी मिमिक्री करते हैं। क्या कहेंगे? 
घर चलता है उनका। आर्टिस्ट हैं। उन्हें शुभकामनाएं।

आप आज संवाद में आए, कैसा रहा पूरा सफर?
मुझे जब बुलाया गया तो मैं स्पीकर्स को देखकर डर गया था। फिर लगा कि यहां के लोगों के बीच रहकर बहुत कुछ सीखने को मिलेगा। मैंने इसे अवसर के रूप में लिया। आने वाले प्रोजेक्ट पर सुनील शेट्टी ने कहा, 'वेलकम टू द जंगल' आएगी। 'हेराफेरी 3' बन रही है या नहीं, वह मुझे नहीं पता। 'हंटर' मेरा अमेजन के साथ शो है, वह आएगा।

एंटरप्रिन्योर के रूप में आपका सबसे बड़ा चैलेंज क्या था? आपने कैसे उसका सामना कैसे किया?
मेरे लिए तो सबकुछ आसान था, क्योंकि पिताजी के रेस्टोरेंट थे। सबकुछ पहले से स्थापित था। मुझे बस मेहनत करनी थी। बतौर अभिनेता मैंने एंटरप्रिन्योरशिप ट्राई की, लेकिन मैं असफल रहा, क्योंकि मैं टाइम नहीं दे सका। मगर, आज अवसर बहुत हैं। कठिन वक्त में ही हमें मौके मिलते हैं।

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