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'बहुत दुख हुआ था'; शक्ति सामंत की 100वीं जयंती पर छलका बेटे का दर्द, कहा- 'वे पद्मश्री के हकदार थे'
Wed, 14 Jan 2026 01:04 PM IST
ज्योति राघव
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Published by: ज्योति राघव
Updated Wed, 14 Jan 2026 01:04 PM IST
सार
Shakti Samanta 100th Birth Anniversary: आज 13 जनवरी को निर्माता-निर्देशक शक्ति सामंत की 100वीं जयंती है। इस अवसर पर उनके बेटे ने अपने दिवंगत पिता को याद करते हुए कुछ बातें साझा की हैं।
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शक्ति सामंत-आशिम सामंत
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
दिवंगत निर्माता-निर्देशक शक्ति सामंत ने 'आराधना', 'अमर प्रेम' और 'कश्मीर की कली' जैसी बेहतरीन फिल्में बनाईं। आज 13 जनवरी को शक्ति सामंत की बर्थ एनिवर्सरी है। इस मौके पर अपने पिता को याद करते हुए शक्ति सामंत के बेटे आशिम सामंत का कहना है कि इन फिल्मों की तारीफ और सफलता के बावजूद उनके पिता को पद्म श्री जैसा कोई राष्ट्रीय सम्मान नहीं मिला।
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इन फिल्मों के लिए मशहूर थे शक्ति सामंत
न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, मंगलवार को अपने पिता की 100वीं जयंती पर सिनेमा में उनके योगदान को याद करते हुए आशिम सामंत ने कहा कि दिवंगत निर्देशक बहुमुखी प्रतिभा के कहानीकार थे, जो अलग-अलग जॉनर में आसानी से काम करते थे। उनकी पहली हिंदी फिल्म 'बहू' हो, क्राइम थ्रिलर 'हावड़ा ब्रिज', रोमांटिक थ्रिलर 'चाइना टाउन' और 'एन इवनिंग इन पेरिस' हो या 'आराधना', 'अमर प्रेम' और 'कश्मीर की कली' जैसी रोमांटिक फिल्में हों।
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शक्ति सामंत के बेटे बोले- 'वे नेशनल सम्मान के हकदार थे'
आशिम ने पीटीआई को दिए इंटरव्यू में कहा, 'मेरे पापा पद्म श्री या पद्म विभूषण जैसे नेशनल सम्मान के हकदार थे। मुझे बताया गया है कि ऐसी चीजों के लिए पॉलिटिकली दबाव डालना पड़ता है। वह ऐसे इंसान नहीं थे, जो ऐसी चीजों के लिए पूछते। अगर उन्हें यह खुद मिल जाता, तो ठीक था, लेकिन वह इसके लिए पूछने वाले नहीं थे। अगर उनका यही रवैया था, तो यह सही रवैया था'।
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साल 2009 में दुनिया को कहा अलविदा
आशिम के मुताबिक, डायरेक्टर को पहचान न मिलने से दुख हुआ था। उन्होंने आगे कहा, 'सोचिए, 'अमर प्रेम' को म्यूजिक अवॉर्ड नहीं मिला और उसकी जगह किसी दूसरी फिल्म को अवॉर्ड मिल गया। यह बात ही बहुत कुछ कहती है। उन्होंने एक बार कहा था कि उन्हें (दादासाहेब) फाल्के अवॉर्ड मिलना चाहिए था'। 13 जनवरी 1926 को जन्मे शक्ति सामंत ने 9 अप्रैल 2009 को 83 साल की उम्र में इस दुनिया को अलविदा कह दिया था। वे अपने जमाने के टॉप डायरेक्टर्स में से एक थे। वे अपनी कमर्शियल फिल्मों के लिए जाने जाते थे, जिनमें समाज में महिलाओं की हालत, लालच और भ्रष्टाचार जैसे सामाजिक मुद्दों पर फोकस किया जाता था।