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Cine Talkies 2022: आधुनिक ‘आसुरी’ शक्तियों के जिक्र पर खूब बजी तालियां, सिनेमा में संस्कार भारती की बड़ी दखल

Sat, 14 May 2022 05:36 PM IST
वर्तिका तोलानी अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई Published by: वर्तिका तोलानी Updated Sat, 14 May 2022 05:36 PM IST
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Sanskar Bharti Cine Talkies 2022 begins in Mumbai Prithviraj Director Chandra Prakash Dwivedi wins applause
Cine Talkies 2022 - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

संस्कार भारती ने भारतीय सिनेमा में भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की पहल यहां मुंबई यूनीवर्सिटी में हुए 'सिने टॉकीज 2022' के साथ कर दी। इस आयोजन का उद्घाटन केंद्रीय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने किया। कार्यक्रम के दौरान कुछ वक्ताओं ने देश में सदियों से प्रचलित मुहावरों से मुस्लिम शासकों के नाम हटाने की जिद की। यहां पहुंचे थे फिल्म ‘पृथ्वीराज’ के निर्देशक चंद्र प्रकाश द्विवेदी और अपने जमाने की दिलकश अदाकारा आशा पारेख को सुनने। चंद्र प्रकाश का भाषण हमेशा की तरह ओजस्वी रहा।

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अभिनेत्री आशा पारेख ने इस मौके पर कहा, ‘हमारा देश विभिन्न भाषाओं, कलाओं, संस्कृतियों, समाजों और लोक कलाओं से ताने-बाने से बना है। अगर मैं पुराने और अपने दौर के  सिनेमा का उल्लेख करूं तो मुझे कहना होगा कि उस दौर का सिनेमा मनोरंजन केंद्रित हुआ करता था। लेकिन आज की फिल्मों में भाईचारे और सकारात्मक चरित्रों की बात की जाती है। सिनेमा ने हमारे बीच मौजूद सामाजिक अवरोधों को दूर करने में बेहद अहम भूमिका निभाई है।’

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संस्कार भारती ने भारत की आजादी की 75वीं वर्षगांठ और देश की स्वतंत्रता में भारतीय सिनेमा के योगदान का जश्न मना रही है। इस संबंध में आयोजित दो दिवसीय संगोष्ठी 'सिने टॉकीज-आजादी का अमृत महोत्सव' की शुरुआत सिनेमा से जुड़ी कई सुनहरी यादों और रुचिकर संवादों के साथ हुई। इस अवसर पर फिल्म 'पृथ्वीराज’ के निर्देशक डॉ. चंद्र प्रकाश द्विवेदी ने कहा, ‘जिस तरह से आदिकाल में कोई अच्छा आयोजन होता था, तो आसुरी शक्तियां उसे नष्ट करने पहुंच जाती थी। ठीक आज भी ऐसा ही हो रहा है। जब भी देश भक्ति पर कोई फिल्म बनती है तो आज की आसुरी शक्तियां उसका विरोध करती हैं। लेकिन आसुरी शक्तियां न तब कामयाब हुई थी और न ही आज कामयाब होंगी।

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इन दिनों अपने गीतों से अधिक अपने विचारों को लेकर चर्चा में रहने वाले गीतकार मनोज मुंतशिर अपने चिर परिचित तेवर में यहां भी दिखे। वह बोले, ‘पहले सिनेमा गलत लोगों के हाथ में चला गया था। सलीम अनारकली की बेगैरत मोहब्बत पर फिल्में बनती थीं। अकबर को महान बताया गया। जो जीता वही सिकंदर जैसे मुहावरे चल निकले जिन्होंने देश के दर्शकों को गुमराह किया। जो सिकंदर भारत से हार कर गया था वह जो जीता वो सिकंदर कैसे हो सकता है? चंद्रगुप्त ने 21 लड़ाइयां जीती। जो जीता वही चंद्रगुप्त होना चाहिए। अक्षय कुमार की अगली फिल्म ‘रामसेतु’ प्रेम के सबसे बड़े प्रतीक पर है। राम ने सीता से प्रेम के लिए राम सेतु का निर्माण कर दिया। सिनेमा अब सही लोगों के हाथ में आया है और अब ‘अच्छी फिल्में’ बननी शुरू हो गई हैं।’

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