Samwad 2025: मनोज मुंतशिर के निशाने पर कुमार विश्वास, तैमूर विवाद पर बोले- बच्चे पर राजनीति करना छोटी सोच
Amar Ujala Samwad 2025: अमर उजाला संवाद के दूसरे दिन गीतकार व लेखक मनोज मुंतशिर शुक्ला ने शिरकत की। इस दौरान उन्होंने अपने विवादों पर भी चुप्पी तोड़ी। साथ ही उन्होंने कवि कुमार विश्वास पर सीधा हमला बोला और तैमूर विवाद पर भी बात की।
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अमर उजाला के दो दिवसीय वैचारिक संगम संवाद कार्यक्रम का आगाज गुरुवार से लखनऊ में गोमती नगर के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में हुआ। आज शुक्रवार को संवाद के दूसरे दिन गीतकार व लेखक मनोज मुंतशिर शुक्ला ने शिरकत की। इस दौरान उन्होंने अपने विवादों पर भी चुप्पी तोड़ी। साथ ही उन्होंने कवि कुमार विश्वास पर सीधा हमला बोला और तैमूर विवाद पर भी बात की।
कुमार विश्वास पर क्या बोले मनोज
मनोज से उनकी 'नफरती चिंटू' वाली टिप्पणी पर सवाल किया गया कि जैसे आप श्रीराम के भक्त हैं और भी बड़े कवि हैं, जो श्रीराम के बारे में बात करते हैं, लेकिन आप उन्हें नफरती चिंटू कह देते हैं, ऐसा क्यों? इस पर जवाब देते हुए मनोज मुंतशिर ने कहा, ' मैंने बहुत विशेष संदर्भ में यह बात कही थी। यहां बात मेरे बड़े भाई की हो रही है, जो कि एक बहुत बड़े कवि (कुमार विश्वास) हैं, वो श्रीराम पर जो शो करते हैं, वो अद्भुत होता है, मुझे लगता नहीं है कि भगवान श्रीराम पर मैं उनसे अच्छा कुछ देखता या कुछ सुनता हूं, जो वह बोलते हैं, वो बहुत अच्छा लगता है। मैं उनका शो कुछ सीखने के लिए देखता हूं, लेकिन यह भी सच है कि आप कुछ लोगों को खुश करने या तालियां बटोरने के लिए यह नहीं कह सकते कि आप इसे हीरो बनाना चाहते हैं तो हम तो इसे खलनायक भी नहीं बनने देंगे।'
बच्चे को राजनीति का विषय बनाना गलत
मनोज ने आगे कहा अगर आप किसी बच्चे (तैमूर अली खान) को राजनीति का विषय बनाएंगे तो यह आपकी छोटी सोच है। इसमें श्रीराम का दर्शन नहीं नजर आता। किसी के घर (शत्रुघ्न सिन्हा) की अंदरूनी बातों में आप किस तरह दाखिल हो जाते हैं? किसी परिवार में उसकी बेटी दुखती रग है, आप वहां नहीं जा सकते। अगर इसके जवाब में मैंने कह दिया कि कोई दीवाना कहता है, कोई चिंटू कहता है तो क्या गलत कहा।
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मनोज का निडर अंदाज
मनोज ने डर के बारे में भी बात की। जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें डर नहीं लगता कि वह मंच पर इतना खुलकर किसी के बारे में भी बोल देते हैं। इस पर उन्होंने कहा, जब छोटेलाल मास्टर ड से डर पढ़ा रहे थे, उस समय हम पेड़ पर चढ़कर अ से अमरुद खा रहे थे। हमें किसी से डर नहीं लगता, जो सच होता है, हम खुलकर बोलते हैं।'