Samwad 2025: ‘सपना था किसी रोल में यूनिफॉर्म पहनूं’, इमरान ने बताया ‘ग्राउंड जीरो’ के सेट पर हुई कैसी तकलीफ
Amar Ujala Samwad 2025 Event Lucknow: अमर उजाला के दो दिवसीय वैचारिक संगम संवाद कार्यक्रम का आगाज आज गुरुवार से लखनऊ में गोमती नगर के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में हो चुका है। यहां अभिनेता इमरान हाशमी और फिल्म निर्माता तेजस प्रभा विजय देओस्कर ने भी शिरकत की।
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साल 2025 के पहले अमर उजाला संवाद का आगाज हो चुका है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के गोमतीनगर स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में अमर उजाला संवाद कार्यक्रम की शुरुआत हुई है। आज गुरुवार को अभिनेता इमरान हाशमी और फिल्म निर्माता तेजस प्रभा विजय देओस्कर मंच पर पहुंचे। इस दौरान उन्होंने अपनी आने वाली फिल्म 'ग्राउंड जीरो' के बारे में भी बात की। सेशन में जवान के सहस, पराक्रम और बलिदान की बात हुए। सेशन की शुरुआत में मंच पर 'ग्राउंड जीरो' का ट्रेलर दिखाया गया। इमरान पहली बार इस जॉनर की फिल्म में नजर आ रहे हैं, जिसका निर्देशन तेजस प्रभा विजय देओस्कर ने किया है।
सेशन की शुरुआत करते हुए इमरान हाशमी ने लखनऊ के लोगों का आभार जताया। इमरान ने कहा, मैं पिछले 20 दिन से लखनऊ में शूटिंग कर रहा हूं एक फिल्म के लिए और जब भी आता हूं, यहां के लोगों का प्यार, अदब और लोगों की मेहमान नवाजी से दिल खुश हो जाता है। हमेशा अच्छी यादों को बटोर कर वापस जाता हूं।
आर्मी ऑफिसर का किरदार निभाने के बारे में बात करते हुए इमरान ने कहा कि ये हमेशा एक एक्टर के लिस्ट के होता है। रिज्यूम में कि हमने एक ऑफिसर का रोल प्ले किया है। पिछले 20 सालों से मेरे भी चाहत थी कि मैं एक ऐसी कहानी और एक ऐसे स्पेस का हिस्सा बनूं, जो इंस्पिरेशनल हो पैट्रियोटिक हो। 2017 में मैं राजस्थान गया था बीएसएफ के बॉर्डर पर वहां के जवानों से और उनसे बात करके एक दिन ऐसा लगा कि मुझे ऐसा किरदार मिल जाए और एक ऐसी कहानी तो बस मेरा करियर बन जाएगा। और एक लैंडमार्क रोल रह जाएगा।
मेरी खुशकिस्मती है कि सात साल बाद विजय ने मुझे यह रोल दिया और एक ऐसे ऑपरेशन और किरदार, नरेंद्र नाथ धर दुबे जी की जो लाइफ स्टोरी है, वह काफी इंस्पिरेशनल है। यह बहुत सारे एक्टर्स ने कहा है कि जब एक बार आप वह वर्दी पहन लेते हैं तो अपने आप में ही डिसिप्लिन आ जाता है। दुबे जी की जो लाइफ है, जिस तरह उन्होंने और उनके ऑफिसर्स ने इस ऑपरेशन को लीड किया तो यह एक एक्टर के लिए बहुत बड़ी जिम्मेदारी है कि हम उसे स्क्रीन पर पेश करें। वो आधे से ज्यादा काम हो गया था, जब ऑनस्क्रीन मैंने वो यूनिफॉर्म पहन लिया था।
मिशन के लिए यह फिल्म सबसे अच्छी श्रद्धांजलि
नरेंद्र नाथ धर दुबे ने फिल्म के बारे में बात करते हुए कहा कि उन्हें कभी उम्मीद नहीं थी कि बड़े पर्दे पर इस तरह बीएसएफ की कहानी दिखाई जाएगी। नौ साल से इस पर काम हो रहा था और अब यह इतने बड़े पटल पर बनी है और दर्शकों के सामने आएगी तो मुझे नहीं लगता कि इस मिशन के लिए इस फिल्म से अच्छी कोई श्रद्धांजलि हो सकती थी।
कैसे आया इस कहानी पर फिल्म बनाने का विचार?
फिल्म के निर्देशक तेजस प्रभा विजय देओस्कर ने कहा, 'इस फिल्म को बनने में नौ साल लगे और इस नौ साल की भी एक अलग कहानी बन सकती है, क्योंकि इस दौरान भी इतनी चीज हुई, लेकिन मैं खुद को खुशनसीब समझता हूं कि यह कहानी मुझ तक पहुंची कि ये इतना बड़ा मिशन बहुत ही कम लोगों को पता था और हमारे इस फिल्म के जो दो लेखक हैं- संचित और प्रियदर्शी, उन्होंने इस कहानी के ऊपर थोड़ा काम किया था और दुबे सर के साथ उनका संपर्क था।'
कैसे की इस फिल्म में किरदार निभाने की तैयारी?
जब आप किसी फिल्में बीएसएफ ऑफिसर का रोल निभा रहे हैं तो उसके लिए आप में फिजिकल टास्क होना और डिसिप्लिन बॉडी लैंग्वेज का होना बहुत जरूरी है उसके लिए थोड़ी तैयारी करनी पड़ती है की कसरत करनी है मुझे इस रोल के लिए ज्यादा खाना पड़ा है इसमें मुझे थोड़ी सी दिक्कत हुई। कश्मीर सबसे सेंसिटिव जगह में से एक है, क्योंकि जिस तरह से हिडन अटैक होते हैं और ड्रोन अटैक होते हैं, वह हमारे फिल्म में भी दिखाया गया है कि 70 जवानों की मौत हो गई तो ऐसे रोल निभाने से पहले वह साइकोलॉजिकल चीज भी खुद में लानी पड़ती है।
कैसी रही नरेंद्र के साथ इमरान की पहली मुलाकात
इमरान हाशमी ने नरेंद्र नाथ दुबे के साथ अपनी पहली मीटिंग के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा कि जब मैं उनसे मिला तो वह बहुत ही सहज व्यक्तित्व के साथ मिले। हम सिटीजन होने के तौर पर जिस तरह की चीजें देखते हैं और उनके समझौते हैं, उन्हें देखकर हम काफी हैरान हो जाते हैं, लेकिन उनके लिए यह केवल जॉब के अगले दिन की तरह होता है। वह कहते हैं कि हम बस अपनी ड्यूटी कर रहे हैं और अपने देश से प्यार करते हैं और उसी भावना को मुझे स्क्रीन पर पेश करना था। इसमें एक खास बात यह रही कि तेजस और मैं चाहते थे कि यह फिल्म असली कहानी पर ही हो, इसमें कुछ अलग से जोड़ा ना जाए, जैसा कि कई फिल्मों में होता है। यह जैसी है, उसे वैसे ही पेश किया जाए।
असली कहानी के साथ दिलचस्प कहानी कैसे बनी
इमरान ने कहा कि ट्रेलर में जब वो डायलॉग आता है कि दुबे जी जब बोलते हैं कि अब प्रहार होगा तो असल जिंदगी में यह डायलॉग नहीं बोला होगा, लेकिन यह एक चॉइस होती है कि कहां पर आप कहानी की वास्तविकता को बनाए रखते हुए दर्शकों के लिए भी उस सीन को खास बना सकते हैं, ताकि उसी समय लोगों को भी देशभक्ति की भावना का अहसास हो सके। वहीं नरेंद्र नाथ धर दुबे ने भी कहा कि इमरान बहुत अच्छे एक्टर हैं और जब मैंने ट्रेलर देखा तो मेरी उम्मीदों से ये काफी ज्यादा अच्छा था।
'ग्राउंड जीरो' में भी हुई शूटिंग
तेजस ने फिल्म की शूटिंग के बारे में बात करते हुए कहा कि कश्मीर में 28 दिन की शूटिंग की और कई ऐसी लोकेशन है, जिसके बारे में लोगों को पता नहीं है और एक टूरिस्ट की तरह हम वहां जा भी नहीं सकते। हम ऐसी जगह भी गए हैं। हम उस ग्राउंड जीरो पर भी जाकर आए, जहां ये ऑपरेशन हुआ था। टीम ने अच्छे से वहां ट्रेनिंग भी ली।
असली ग्रेनेड्स देख डर गए थे इमरान
हम किरदार निभाने के लिए बहुत कुछ सीखते हैं, जिससे दर्शकों का हमें प्यार मिले, लेकिन इस फिल्म के लिए ये बहुत अगर और खास रहा, क्योंकि इसके लिए हमें जो भी सीखना था, वो एक ऑफिसर के तौर पर सीखना था तो सब बेहद खास अनुभव रहा। इस दौरान तेजस ने शूटिंग का दिलचस्प किस्सा भी साझा किया। फिल्म की शूटिंग के लिए नकली ग्रेनेड्स का इस्तेमाल करना था, लेकिन वह असली नहीं लग रहे थे तो वहां मौजूद ऑफिसर ने से दूसरे ग्रेनेड्स दिए तो हमें लगा कि ये भी नकली हैं, लेकिन वो असली थे, जब हमें बता चला कि ये असली है तो इमरान तो डर गए और उन्होंने ग्रेनेड्स को हाथ लगाने से भी इनकार कर दिया। हालांकि, हमें कहा गया कि ये पूरी सेफ्टी के साथ रखे गए हैं तो बस किसी तरह वो सीन शूट हो गया।
38 साल बाद श्रीनगर में होगा किसी फिल्म का प्रीमियर
38 साल बाद श्रीनगर में किसी फिल्म का प्रीमियर होगा। इस रेड कार्पेट इवेंट के बारे में बात करते हुए इमरान ने कहा कि अब कश्मीर में हवाएं बदल रही हैं। मैं बॉलीवुड के और क्रूज को इन्वाइट करना चाहूंगा कि वो वहां जाकर अपनी फिल्मों की स्क्रीनिंग करें। वहां सेफ्टी जॉन है, वहां कोई खतरा नहीं है। मुझे कश्मीर में बहुत अच्छा लगा। मैं पहली बार श्रीनगर गया था।
इमरान ने किया जवानों के जज्बे को सलाम
जवानों के बारे में बात करते हुए इमरान ने कहा कि फिल्म में उनके संघर्ष को भी दिखाया गया है। उनके बारे में जानकर एक फक्र होता है। आजादी और सुरक्षा को हमारे देश में टेकन फॉर ग्रांटेड लेते हैं। हम भूल जाते हैं कि हमारे लिए कोई 40 डिग्री की गर्मी में और कोई -15 डिग्री की सर्दी में खड़ा हुआ है, तब हम यहां सुरक्षित हैं। कोई राजस्थान की गर्मी में रहते हैं और कोई सर्दी में, हम भूल जाते हैं कि उनका क्या योगदान है।
फिल्म के लिए गाने तैयार करना सबसे मुश्किल काम
तेजस ने कहा कि फिल्म बनाते हुए इसके लिए गाने तैयार करना काफी बड़ा चैलेंज था, क्योंकि सोचना ये था कि एक जवान की जिंदगी में गाने डाल रहे हैं, क्योंकि फिल्म के लिए भी ये जरूरी होते हैं। मैंने मजाक में दुबे सर से पूछा भी था कि आप कौन सा गाना गाते थे। हालांकि, वो मजाक में बातें थीं, लेकिन हमने जो इसमें गाने डाले हैं वो कहानी को आगे ले जाने वाले गाने हैं, जैसे अभी एक आया भी था और लोगों ने उसे सराहा भी है। हमने कहानी से जुड़े गाने डाले हैं, ऐसे गाने नहीं डाले, जो कहानी से कनेक्ट ही नहीं हो रहे हैं।