{"_id":"3c803d52fd891d0f54a34773bff05620","slug":"sahi-kapor-s-birthday","type":"story","status":"publish","title_hn":"हैप्पी बर्थडेः 'हैंडसम' शशि कपूर की वो मासूम मुस्कुराहट ","category":{"title":"Bollywood","title_hn":"बॉलीवुड","slug":"bollywood"}}
हैप्पी बर्थडेः 'हैंडसम' शशि कपूर की वो मासूम मुस्कुराहट
मधु पाल
Updated Tue, 18 Mar 2014 12:45 PM IST
विज्ञापन
उनके परिवार के बाक़ी सदस्यों जैसे उनके बड़े भाई दिवंगत शम्मी कपूर, उनके भतीजे ऋषि कपूर, उनके पोते रणबीर कपूर, पोती करीना कपूर वग़ैरह से कई फ़िल्मी कार्यक्रमों को कवर करने के दौरान मेरी मुलाक़ात हो चुकी है। लेकिन शशि कपूर से मैं कभी नहीं मिली थी।
विज्ञापन
वो बहुत कम घर से बाहर निकलते हैं और उन्हें हाल में सार्वजनिक समारोहों में यदा-कदा ही देखा गया है। मेरे ज़ेहन में उनका फ़िल्मी चेहरा ही अंकित था। असल शशि कपूर कैसे हैं ये मेरे लिए हमेशा एक पहेली ही थी। तो इस बार मैंने ठान लिया कि उनके जन्मदिन 18 मार्च से पहले मैं उनसे मुलाक़ात करूंगी।
विज्ञापन
वो बहुत कम घर से बाहर निकलते हैं और उन्हें हाल में सार्वजनिक समारोहों में यदा-कदा ही देखा गया है। मेरे ज़ेहन में उनका फ़िल्मी चेहरा ही अंकित था।
मुलाक़ात का मिशन
मैंने उनके जुहू स्थित घर पर कई चक्कर लगाए। लेकिन गेट पर तैनात गार्ड्स ने मुझे बताया कि शशि कपूर किसी से नहीं मिलते और घर से बाहर भी बहुत कम निकलते हैं इसलिए मुलाक़ात संभव नहीं है। लेकिन मैंने हार नहीं मानी। आख़िरकार एक बार उनकी बिल्डिंग के गार्ड ने मुझे शशि जी के निकट सहयोगी अमरेज सिंह से मिला ही दिया।
विज्ञापन
अमरेज जी ने मुझसे कहा, "साहब की सेहत ठीक नहीं रहती। वो किसी से ज़्यादा बातचीत करते ही नहीं इंटरव्यू भी नहीं देते। फिर आप मिलकर क्या करेंगी।"मैंने उन्हें समझाया कि इंटरव्यू संभव नहीं भी हुआ तो भी उन्हें जन्मदिन की शुभकामना तो दे ही सकती हूं।
उम्मीद की किरण
आख़िर अमरेज सिंह ने हमें बताया कि शशि कपूर अपने नियमित चेकअप के लिए अस्पताल गए हैं। जब वो लौट कर आएंगे तब उनसे पूछ कर बताएंगे कि हम उनसे मिल सकते हैं या नहीं।उन्होंने हमें शशि कपूर के घर के सामने स्थित पृथ्वी थिएटर में इंतज़ार करने को कहा। मुलाक़ात की पक्की गारंटी ना होने के बावजूद मैंने इंतज़ार करने का फ़ैसला किया और अपनी सहयोगी सुप्रिया सोगले को भी बुला लिया।
जब शशि कपूर को देखा
दो घंटे के इंतज़ार के बाद हमे एक गाड़ी को शशि कपूर के घर आते देखा। मन में उम्मीद बंधी। मैं सोचने लगे कि अब शशि कपूर से मुलाक़ात होगी। मन में उनकी फ़िल्मों के दृश्य कौंधने लगे।
'दीवार' में नीतू सिंह का साथ का उनका गाना, "कह दूं तुम्हें या चुप रहूं" हो या मुमताज़ के साथ उनका गाना "ले जाएंगे ले जाएंगे दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे" जैसे गानों के ख़ूबसूरत शशि कपूर की छवि सामने आने लगी।
लेकिन गाड़ी के रुकते ही जो नज़ारा देखा उससे मुझे धक्का सा लगा। गाड़ी के रुकते ही एक बुज़ुर्गवार को दो लोगों ने सहारा देकर गाड़ी से नीचे उतारा। 76 साल का ये बुज़ुर्ग शख़्स था 60 और 70 के दशक का वो हैंडसम हीरो जिसकी लड़कियां दीवानी हुआ करती थीं।
मैं यक़ीन नहीं कर पा रही थी। उसके बाद शशि कपूर को व्हील चेयर पर बैठाया गया। मैं उन्हें देख ही रही थी कि तभी आवाज़ आई कि मैडम मिल लीजिए साहब से।
संक्षिप्त मुलाक़ात
मैं उनके पास गई और अभिवादन करके उन्हें बताया कि मैं बीबीसी से मधु पाल हूं। शायद उन्हें सुनाई नहीं पड़ा। उन्होंने कहा, "क्या।"तब मैंने थोड़ा ज़ोर से कहा, "मैं बीबीसी से हूं।
आपको जन्मदिन की बहुत-बहुत शुभकामनाएं।" फिर मैंने उन्हें एक गुलदस्ता भेंट किया। शशि कपूर के चेहरे पर बाल सुलभ मुस्कुराहट आ गई। इतने दिनों बाद कोई पत्रकार उनसे मिलने पहुंचा।
ये जानकर वो ख़ुश हो गए। उन्होंने बहुत हौले से कहा, "शुक्रिया। आपसे मिलकर अच्छा लगा। मैं बीबीसी से कई बार मिल चुका हूं। हमारा पुराना नाता है।"उसके बाद उन्हें अंदर ले जाया गया। उन्होंने हमसे हाथ हिलाकर विदा ली।
धर्मेंद्र और अमिताभ से होती है मुलाक़ात