पर्दे पर दिखेगी याकूब मेमन की फांसी की कहानी
सिनेमा में ख्वाबों की जगह हकीकत ले रही है। फिल्मकार सपनों की सौदागरी के स्थान पर देश-काल की सच्चाई को प्राथमिकता दे रहे हैं। यही वजह है कि बड़े बैनरों समेत कम जाने पहचाने निर्माता-निर्देशक भी ऐसी कहानियां ला रहे हैं।
इन दिनों सिनेमा देसी जमीन में जड़े जमा रहा है। निर्देशक नए विषय खोज रहे हैं और कंटेंट को कहानियों में पिरोया जा रहा है। राष्ट्रीय के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर का घटनाक्रम भी फिल्मी कहानियों का आधार बन रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति से लेकर खूंखार आतंकवादी सरगना ओसामा बिन लादेन तक बॉलीवुड फिल्मों के विषय बन चुके हैं। तमाम बोयोपिक फिल्मों के साथ इधर उड़ता पंजाब और शोरगुल जैसी फिल्मों की चर्चाओं के बाद इधर जल्द ही तीन और फिल्में रिलीज के लिए तैयार है जिनमें या तो ड्रग्स की समस्या है या राजनीतिक टोन के बीच समाज की अंदरूनी तह की उथल-पुथल। एक नजर डालते हैं इन फिल्मों पर, जो जुलाई में रिलीज होंगी।
ये है जजमेंटः फांसी पर फिल्म
एक आतंकी को फांसी की सजा पर आधारित यह फिल्म (ये है जजमेंटः हेंग्ड टिल डेथ) कठिनाइयों से रिलीज तक पहुंची। निर्माता का दावा है कि फिल्म उन्होंने 1993 के मुंबई धमाकों के दोषी याकूब मेमन की फांसी के घटनाक्रम से प्रेरित होकर बनाई थी। परंतु सेंसर बोर्ड ने मंजूरी नहीं दी। तीन बार रिजेक्ट किया। बोर्ड को मेमन के नाम और उससे जुड़े हर सीन पर आपत्ति थी। अंततः निर्माताओं को नाम और तमाम संदर्भ हटाने पड़े। निर्देशक मन कुमार के अनुसार, ‘हमने ये तथ्य हटा लिए कि आतंकी को उसके जन्मदिन पर फांसी दी गई। हिरासत में उसके द्वारा इंटरव्यू देने की बात भी अब फिल्म में नहीं है।’
फिल्म में मुख्य भूमिका निभा रहे ऐक्टर निशांत कुमार का दावा है कि ‘मैंने रोल की तैयारी के लिए याकूब का इंटरव्यू देखा और फिल्म उसकी सजा से प्रेरित है।’ मन कुमार का कहना है कि फिल्म आतंकी की फांसी पर केंद्रित है और इसका उसके जीवन से कोई संबंध नहीं। निर्देशक के अनुसार देश में सद्भावना संदेश देने के लिए उन्होनें बनाई है और यह किसी कानून का उल्लंघन नहीं करेगी।
एम क्रीमः ड्रग्स की तलाश में युवा
यह शहरी युवाओं की कहानी है, जो समाज में अपनी पहचान की तलाश में हैं। युनिवर्सिटी में पढ़ने वाले छात्रों का एक समूह एम क्रीम नाम के ऐसे ड्रग की तलाश में निकलता है जो उन्हें ‘अल्टीमेट उड़ान’ दे सकता है। लेखक-निर्देशक आग्नेय सिंह की यह फिल्म युवाओं को लक्ष्य करके बनाई गई है और इसे दस अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं। आग्नेय कहते हैं, ‘मैंने युवाओं की नब्ज पढ़ने की कोशिश की है। यह चार दोस्तों की रोड ट्रिप है। जो दिल्ली से देहरादून जा रहे हैं। उन्हें एक रहस्यमयी ड्रग, एम क्रीम की तलाश है। जिसके आनंद का कोई मुकाबला नहीं।’
इस यात्रा के दौरान ये युवा देश-समाज के कुछ मुद्दों से दो-चार होते हैं और फिल्म दर्शकों के सामने कुछ अहम सवाल खड़े करती है। फिल्म युवाओं से भी प्रश्न करती है कि आज बागी या क्रांतिकारी होने का वास्तविक अर्थ क्या है? आग्नेय की फिल्म में सेक्सुअल कंटेंट और तीखी पॉलिटिक्स भी है जिससे कुछ लोगों की भौंहे तन सकती हैं। फिल्म में इम्माद शाह, इरा दुबे, अरिता घोष, राघव चानना, बैरी जॉन और टॉम आल्टर जैसे अभिनेता हैं।
ओबामा-ओसामा की नई कॉमेडी
बराक ओबामा और ओसामा बिन लादेन के किरदार बॉलीवुड फिल्मों में फंस गए रे ओबामा से लेकर तेरे बिन लादेन और इसकी सीक्वल तेरे बिन लादेनः डेड ऑर अलाइव में दिख चुके हैं। अब दोनों फिर साथ दिखने को तैयार हैं। परंतु इस बार केवल उनके नाम का उपयोग है। निर्माता जयविंदर सिंह भाटी की फिल्म का टाइटल हैः वैन ओबामा लव्ड ओसामा (जब ओबामा ने ओसामा से प्यार किया)। यह दो हीरो की कहानी है। जहां राजनीति उनका फायदा उठाती है। दोनों अपनी-अपनी प्रेमिकाओं को पाना चाहते हैं।
एक हीरो ईसाई है और दूसरा मुस्लिम। उनकी प्रेमिकाओं के पिता इन नायकों के सामने शर्त रखते हैं कि चुनाव में अपने-अपने धर्म के लोगों के वोट दिलाओ। फिल्म का ट्रीटमेंट कॉमेडी है मगर संदेश साफ है। निर्देशन सुधीर कुमार शर्मा का है। निशान, पारुल चौहान, विक्की चौधरी, दिव्या शर्मा, विजेंद्र कालरा, मोहित बघेल और मनोश बख्शी फिल्म में हैं। पिछले दिनों गुजर गए कॉमेडियन मुश्ताक खान फिल्म में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते नजर आएंगे।