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Ramchandra Pal: कौन थे म्यूजिक निर्देशक रामचंद्र पाल, जिनके हुनर को मिली बॉम्बे टॉकिज से पहचान

Tue, 21 Jan 2025 07:00 AM IST
अंजू बाजपेई एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: अंजू बाजपेई Updated Tue, 21 Jan 2025 07:00 AM IST
सार

संगीत निर्देशक रामचंद्र पाल की आज पुण्यतिथी है। संगीत प्रतिभा के धनी रामचंद्र पाल ने कई फिल्मों में अपने सदाबहार गीतों और अभिनय से दशकों तक सिनेमा पर राज किया है। आइए जानते हैं आखिर कौन थे रामचंद्र पाल। 
 

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Ramchandra Pal Death Anniversary on 21 January music director actor know more details inside
रामचंद्र पाल की आज है पुण्यतिथी - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

पहले जमाने में बहुत कम ही लोग प्रसिद्ध हो पाते थे। उनके हुनर की वजह से उन्हें कुछ समय तक शोहरत हासिल होती थी, लेकिन बाद में वह समय के साथ ओझल होते गए। उन्हीं में से एक थे संगीतकार रामचंद्र पाल, जिन्हें आज शायद ही कोई जानता होगा। आइए आपको बताते हैं कौन थे रामचंद्र पाल, जिन्होंने अपने काम से अपना नाम बनाया।
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राम चंद्र पाल का जन्म
रामचंद्र पाल का जन्म 1909 में कोलकाला में हुआ था। उस समय उनके संगीत की काफी चर्चा हुई और उनका भी नाम मशहूर हुआ, लेकिन समय के साथ उनके संगीत के साथ ही उनका नाम भी गुमनामी की दुनिया में छिप गया। 'नाचो-नाचो प्यारे....' गाना उस समय काफी प्रसिद्ध हुआ था, जिसका संगीत रामचंद्र ने ही तैयार किया था।
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हिमांशु रॉय की तलाश हुई खत्म
हिमांशु रॉय एक निर्देशक थे और उन्हें अपनी फिल्म के लिए एक अलग संगीत की तलाश थी। कथित तौर पर हिमांशु को फिल्म प्रेम सागर के निर्देशक नरोत्तम दास से रामचंद्र पाल की खूबी के बारे में पता चला और इसके बाद रामचंद्र ने बतौर संगीतकार बॉम्बे टॉकिज में अपना करियर शुरू किया। इस तरह से वह बॉम्बे टॉकिज से जुड़े और खूब नाम कमाया।
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वास्तव में डॉक्टर थे रामचंद्र पाल
कथित तौर पर रामचंद्र वास्तव में एक मेडिकल डॉक्टर थे। 1909 में जन्मे रामचंद्र पाल कई क्षमताओं के साथ फिल्म उद्योग में आए और अपनी किस्मत आजमाई। उन्होंने कई फिल्मों में अभिनय किया साथ ही कई फिल्मों में संगीत भी दिया। अपनी मेहनत और लगन से वह बॉलीवुड अभिनेता होने के साथ ही एक संगाीत निर्देशक भी बन गए।

संगीत करियर
कथित तौर पर उन्होंने बादल खान से संगीत की शिक्षा ली थी। शुरुआत में उन्होंने तमिल फिल्म बिल्वा मंगल और पहली हिंदी फिल्म प्रेम सागर से अपने संगीत करियर की शुरुआत की। इसके अलावा रजनी और इंदिरा उनकी बंगाली फिल्में थीं। बिल्वा मंगल पहली ऐसी हिंदी फिल्म थी, जिसका साउथ में रीमेक किया गया था। प्रेम सागर के बाद से ही रामचंद्र बॉम्बे टॉकिज से जुड़े और उनकी किस्मत चमक गई।
 

अभिनेता के रूप में करियर
एक अभिनेता के रूप में उन्होंने तीन फिल्में कीं, जिसमें मनमोहन (1936), डेक्कन क्वीन (1936) और आजाद (1940) शामिल हैं। उन्होंने अपने फिल्म बैनर पाल फिल्म्स के तहत राज नंदिनी (1962) नाम की फिल्म का निर्माण और निर्देशन किया। हालांकि, इसे कभी रिलीज नहीं किया गया। उन्होंने 20 फिल्मों के लिए संगीत दिया और सात फिल्मों में 15 गाने भी गाए। 
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