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Hindi News ›   Entertainment ›   Bollywood ›   Pravisht Mishra talk about Mahatma Gandhi during his new show Barrister Babu

अभिनेता प्रविष्ट मिश्रा ने समझाए बापू के समय के हालात, लंदन से आया नया बैरिस्टर बाबू

Tue, 25 Feb 2020 10:53 PM IST
anand anand अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई Published by: anand anand Updated Tue, 25 Feb 2020 10:53 PM IST
सार

  • धारावाहिक बैरिस्टर बाबू में शीर्षक चरित्र निभा रहे प्रविष्ट मिश्रा छोटे परदे के मशहूर कलाकार हैं
  • बैरिस्टर बाबू की कहानी आज से सौ साल पहले की है

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Pravisht Mishra talk about Mahatma Gandhi during his new show Barrister Babu
Barrister Babu - फोटो : amar ujala mumbai

विस्तार

दक्षिण अफ्रीका से आकर भारत की आजादी की लड़ाई की बागडोर संभालने वाले असल बैरिस्टर बाबू यानी कि महात्मा गांधी ने देश में सामाजिक कुरीतियों और छुआछूत के खिलाफ लंबी लड़ाई लड़ी। उसी कालखंड की एक कहानी इन दिनों छोटे परदे पर चल रही है, बैरिस्टर बाबू। इस कहानी का नायक भी वकील है और लंदन से आकर भारत में सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ लड़ाई लड़ रहा है।

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धारावाहिक बैरिस्टर बाबू में शीर्षक चरित्र निभा रहे प्रविष्ट मिश्रा छोटे परदे के मशहूर कलाकार हैं। अपने किरदार की तुलना महात्मा गांधी के कामों से किए जाने पर प्रविष्ट कहते हैं, “ये बात काफी हद तक सही है लेकिन कुछ इसमें थोड़ा अंतर हैं। गांधी जी सामाजिक आंदोलनों के साथ साथ आजादी की लड़ाई में भी सक्रिय हुए थे। मेरा किरदार बैरिस्टर है। वह भी विदेश से आता है। वह देश को आजाद तो देखना चाहता है लेकिन वह आजादी की लड़ाई में वैसे सक्रिय नहीं होता है। उसकी सोच है कि सबसे पहले हमारे परिवार और आस-पास की औरतें आजाद हों। अनिरुद्ध का मानना है कि जो सोच उसकी है वही सोच पूरे हिंदुस्तान की हो। आगे चलकर ऐसा होता भी है तभी यह देश आजाद हो पाया।”

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Pravisht Mishra talk about Mahatma Gandhi during his new show Barrister Babu
Pravisht Mishra - फोटो : amar ujala mumbai

बैरिस्टर बाबू की कहानी आज से सौ साल पहले की है। उस वक्त की किस अहम बात पर ये शो रचा गया? इस सवाल के जवाब में प्रविष्ट कहते हैं, “यह सौ साल पहले के बंगाल के तुलसीपुर की कहानी है। आजादी से पहले की बात चलने पर आमतौर से हमारा ध्यान सिर्फ आजादी की लड़ाई पर जाता है। ये उस समय के समाजिक ढांचे की तरफ ध्यान दिलाता है। सामाजिक समस्याओं का समाधान सिर्फ तर्क से है इसीलिए शो की टैगलाइन भी 'तर्क से फर्क' रखी गई है। शो का किरदार बौन्दिता जोकि एक बच्ची है, अपने तर्कों, सवालों और जिज्ञासा से सामाजिक खामियों को तार-तार करती है। बैरिस्टर बाबू की लड़ाई सामाजिक सोच से है।”

और कितना मुश्किल रहा 100 साल पुरानी कहानी को परदे पर जीना? “सौ साल पहले के किरदार को पेश करने में कुछ चीजें बहुत मुश्किल थी। हमें नहीं पता था कि उस समय लोग बात कैसे करते थे। शूट के दौरान हमारे जो रीटेक हुए वह इसलिए हुए क्योंकि निर्देशक के अनुसार कई बार अभिनय आज जैसा प्रतीत होने लगता है। हमें एकदम सटीक नहीं पता था कि उस दौर का इंसान रहते हुए हम वो बातें किस लहजे में कहनी हैं।”

इसके अलावा प्रविष्ट ये भी बताते हैं कि तब की कहानी की किन बातों ने उन्हें शूट के समय झकझोर दिया। वह कहते हैं, “एक सीन है जहां नीची जाति का एक व्यक्ति उच्च जाति के घर पानी पी लेता है इसके बाद  पूरे पानी को फेंक दिया जाता है। मेरे किरदार यानी अनिरुद्ध को यह बात बिल्कुल समझ नहीं आई और ना ही मुझे। दुख इस बात का है कि मौजूदा दौर में भी इस तरह के भेदभाव हमारे समाज में बचे हुए हैं। मैंने खुद भी ऐसी चीजें देखी हैं।”

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