Busan Film Festival: बुसान पहुंची शूजीत सरकार की ये फिल्म, सौमित्र चटर्जी की अदाकारी देख भावुक हुए लोग
दिवंगत अभिनेता सौमित्र चटर्जी की आखिरी फिल्म डीप 6 बुसान फिल्म फेस्टिवल में प्रीमियर हुई, जिसे देख हर कोई भावुक हो गया।
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वरिष्ठ सिनेकलाकार सौमित्र चटर्जी की आखिरी और यादगार अदाकारी में शुमार हो चुकी फिल्म ‘डीप 6’ के बुसान फिल्म फेस्टिवल में हुए प्रदर्शन ने लोगों को एक फिर भावुक कर दिया। फिल्म ‘डीप 6’ को इस फेस्टिवल के दौरान अभी सोमवार तक वहां दिखाया जाएगा और इस फिल्म का प्रदर्शन फेस्टिवल के ‘ए विंडो ऑन एशिय़न सिनेमा’ सेक्शन के तहत हो रहा है। साल 2011 के कोलकाता की राजनीतिक, सांस्कृतिक व भौगोलिक पृष्ठभूमि पर बनी फिल्मकार शूजित सरकार की फिल्म ‘डीप 6’ का प्रीमियर बुसान इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में शनिवार को हुआ। फिल्म की निर्देशक मधुजा मुखर्जी इस फिल्म के प्रदर्शन के बाद होने वाले सवाल जवाब सेशन में हिस्सा लेने के लिए बुसान में ही हैं।
फिल्म ‘डीप 6’ का निर्माण राइजिंग सन फिल्म्स ने किया है। रॉनी लाहिड़ी और शूजीत सरकार की ये कंपनी इसके पहले भी लीक से इतर विषयों पर ‘पीकू’, ‘विकी डोनर’, ‘गुलाबो सुताबो’, ‘पिंक’, ‘अक्टूबर’ और ‘मद्रास कैफे’ जैसी फिल्में बना चुकी है। कंपनी की एक फिल्म ‘सरदार ऊधम’ इसी महीने सीधे ओटीटी पर रिलीज होने के लिए तैयार हो चुकी है। इस फिल्म का प्रीमियर प्राइम वीडियोपर 16 अक्तूबर को होगा।
साल 2011 के कोलकाता की पृष्ठभूमि पर बनी फिल्म ‘डीप 6’ में तिलोत्मा शोम, चंदन रॉय सान्याल, सुमीत ठाकुर, माया घोष, सुमंत मुखर्जी के अलावा सौमित्र चटर्जी ने भी काम किया है। सौमित्र चटर्जी के देहावसान के ठीक पहले शूट की गई फिल्म ‘डीप 6’ उनकी आखिरी फिल्मों में शामिल है। फिल्म ‘डीप 6’ को बुसान फिल्म फेस्टिवल के लिए चुने जाने के बारे में शूजित सरकार कहते हैं, ’देश और एशिया की बेहतरीन सिनेमा के बीच फिल्म ‘डीप 6’ को भी बुसान फिल्म फेस्टिवल के लिए चयनित किए जाने को लेकर में प्रफुल्लित और सम्मानित महसूसकर रहा हूं। मधुजा को मैं बरसों से जानता हूं और उनके व अपने एक और मित्र अविक मुखोपाध्याय के साथ काम करना मेरा सौभाग्य रहा है। फिल्म ‘डीप 6’ के लिए हम सबका दृष्टिकोण एक जैसा रहा, ये सबसे अहम बात है।’
वहीं फिल्म की निर्देशक मधुजा कहती हैं, ‘ये एक साधारण महिला की असाधारण कहानी है। मितुल नाम की इस महिलाका किरदार बहुत ही ऊर्जा के साथ तिलोत्तमा शोम ने निभाया है। कोलकाता को लेकर बनी तमाम किस्सों में ये मेरी कहानी है। एक महिला के नजरिये से कही गई कहानी। एक स्तर पर देखा जाए तो एक सीधा सा कथन हम महिलाओं के बारे में ही है। उन महिलाओं के बारे में जिन्होंने एक राजनीतिक सपना साझा किया और दूसरे स्तर पर देखें तो ये सामूहिक जरूरतों, विपदाओं, अनदेखी बातों और कमजारियों की कहानी भी है।