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Digital Review: दंगल के आमिर से आगे निकले सेलेक्शन डे में राजेश तैलंग
Tue, 01 Jan 2019 05:56 PM IST
विजय जैन
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Published by: विजय जैन
Updated Tue, 01 Jan 2019 05:56 PM IST
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सेलेक्शन डे
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सेलेक्शन डे: वेब सीरीज
कलाकार: मो. समद, यश ढोले, राजेश तैलंग, रत्ना पाठक शाह, महेश मांजरेकर, अक्षय ओबरॉय
निर्देशक: उदयन प्रसाद
ओटीटी: नेटफ्लिक्स
नेटफ्लिक्स की भारत में घुसपैठ को मजबूती भले सेमी पोर्न सीरीज सेक्रेड गेम्स से मिली हो लेकिन किसी भी कंटेंट प्लेटफॉर्म के लिए जरूरी ही है कि वह उस देश की जमीन से जुड़ी भावनाओं को भी समझे जहां उसे पैर जमाने हैं। इस लिहाज से नेटफ्लिक्स ने अनिल कपूर के प्रोडक्शन हाउस के साथ मिलकर एक अच्छी सीरीज पेश की है सेलेक्शन डे।
सेलेक्शन डे हर उस पिता की कहानी है जो अपनी संतानों को चैंपियन बनाना चाहता है। यहां बहाना क्रिकेट है। अरविंद अडिगा के उपन्यास पर बनी सीरीज 15.16 साल के बच्चों राधा कुमार और मंजू, यश और समदद्ध की कहानी है जिनका हिटलर सा बर्ताव करने वाला बाप, राजेश तैलंग, हर हाल में उन्हें चैंपियन बनाना चाहता है।
कहानी कुछ कुछ फिल्म दंगल के ट्रैक पर है लेकिन इस ट्रैक पर हर वो पिता चल चुका है जिसने अपना पेट काटकर अपने बच्चों को कुछ बना देने का जज्बा पाला है। छोटे से गांव से निकले बच्चे मुंबई शहर में अपनी पहचान बनाते हैं अपने खेल से। साथ में स्कूल की जमीन को हड़पने की साजिश है। हाशिये पर डाल दिया गया एक कोच है। अंग्रेजी बोलने वाले भगवान हैं और है एक मां जो कहानी में दिखती नहीं है।
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सीरीज में एक जगह राधा कुमार कहता है, माएं हमेशा वापस आती हैं। सुमीत अरोड़ा ने हिंदी के संवादों में मिट्टी की महक बोई है तो राजेश तैलंग की अदाकारी इस सीरीज की जान है। सीरीज राधा कुमार के गुंडों के हाथों पिटने और मंजू को अपनी मां के लापता हो जाने का पता लगने पर खत्म होती है और दूसरे सीजन का इंतजार करने की वजह छोड़ जाती है।
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कलाकार: मो. समद, यश ढोले, राजेश तैलंग, रत्ना पाठक शाह, महेश मांजरेकर, अक्षय ओबरॉय
निर्देशक: उदयन प्रसाद
ओटीटी: नेटफ्लिक्स
नेटफ्लिक्स की भारत में घुसपैठ को मजबूती भले सेमी पोर्न सीरीज सेक्रेड गेम्स से मिली हो लेकिन किसी भी कंटेंट प्लेटफॉर्म के लिए जरूरी ही है कि वह उस देश की जमीन से जुड़ी भावनाओं को भी समझे जहां उसे पैर जमाने हैं। इस लिहाज से नेटफ्लिक्स ने अनिल कपूर के प्रोडक्शन हाउस के साथ मिलकर एक अच्छी सीरीज पेश की है सेलेक्शन डे।
सेलेक्शन डे हर उस पिता की कहानी है जो अपनी संतानों को चैंपियन बनाना चाहता है। यहां बहाना क्रिकेट है। अरविंद अडिगा के उपन्यास पर बनी सीरीज 15.16 साल के बच्चों राधा कुमार और मंजू, यश और समदद्ध की कहानी है जिनका हिटलर सा बर्ताव करने वाला बाप, राजेश तैलंग, हर हाल में उन्हें चैंपियन बनाना चाहता है।
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कहानी कुछ कुछ फिल्म दंगल के ट्रैक पर है लेकिन इस ट्रैक पर हर वो पिता चल चुका है जिसने अपना पेट काटकर अपने बच्चों को कुछ बना देने का जज्बा पाला है। छोटे से गांव से निकले बच्चे मुंबई शहर में अपनी पहचान बनाते हैं अपने खेल से। साथ में स्कूल की जमीन को हड़पने की साजिश है। हाशिये पर डाल दिया गया एक कोच है। अंग्रेजी बोलने वाले भगवान हैं और है एक मां जो कहानी में दिखती नहीं है।
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सीरीज में एक जगह राधा कुमार कहता है, माएं हमेशा वापस आती हैं। सुमीत अरोड़ा ने हिंदी के संवादों में मिट्टी की महक बोई है तो राजेश तैलंग की अदाकारी इस सीरीज की जान है। सीरीज राधा कुमार के गुंडों के हाथों पिटने और मंजू को अपनी मां के लापता हो जाने का पता लगने पर खत्म होती है और दूसरे सीजन का इंतजार करने की वजह छोड़ जाती है।