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नए साल से टीवी पर आएगा 'केसरी नंदन', लीड एक्टर मानव ने दिए 5 सवालों के जवाब
Sun, 23 Dec 2018 03:58 PM IST
विजय जैन
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Published by: विजय जैन
Updated Sun, 23 Dec 2018 03:58 PM IST
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Manav Gohil
- फोटो : social media
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महिला सशक्तिकरण का डंका हर तरफ बज रहा है। नए साल की शुरूआत में ऐसा ही एक टीवी पर देखने को मिलेगा। नाम है केसरी नंदन। शो के लीड कलाकार मानव गोहिल से हमने पूछे 5 सवाल।
हिम्मत कहां से आती है?
मैं खुद की बात कहूं, जब मैं स्ट्रगल कर रहा था मुंबई में, तो पापा मुझे बहुत प्रोत्साहन देते थे, कि कोई बात नहीं है, गिरे हो तो उठो, लड़ो जाओ, फिर से फेल हो रहे हो तो फिर मेहनत करो। तो मेरे हिसाब से यही प्रोत्साहन जो लड़कों को मिलता है यह लड़कियों को भी बोलने में क्या दिक्कत है, एक बारी आप खुद को मौका दें और जाने की लड़कियां भी कितनी स्ट्रॉंग हो सकती हैं
महिला सशक्तीकरण को लेकर आपकी सोच क्या है?
मैं खुद एक लड़की का पिता हूँ, तो वह जब कहती है कि "इटस माई चोइस, आई डोंट वॉंट टू गो फॉर द फिल्म" तो मैं उसे कभी फोर्स नहीं करता हूँ। और अब शहरों में रहते रहते इस तरह की सोच रही नहीं है, की लड़का होता तो मैं यह करने देता और लड़की होती तो नहीं। मैं चाहता हूँ, जो सब चीज़ें मैने करी हैं वो भी करे। आई एम नॉट ब्रिंगिग हर अप एस अ गर्ल और एस अ वीकर सेक्स।
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हिम्मत कहां से आती है?
मैं खुद की बात कहूं, जब मैं स्ट्रगल कर रहा था मुंबई में, तो पापा मुझे बहुत प्रोत्साहन देते थे, कि कोई बात नहीं है, गिरे हो तो उठो, लड़ो जाओ, फिर से फेल हो रहे हो तो फिर मेहनत करो। तो मेरे हिसाब से यही प्रोत्साहन जो लड़कों को मिलता है यह लड़कियों को भी बोलने में क्या दिक्कत है, एक बारी आप खुद को मौका दें और जाने की लड़कियां भी कितनी स्ट्रॉंग हो सकती हैं
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महिला सशक्तीकरण को लेकर आपकी सोच क्या है?
मैं खुद एक लड़की का पिता हूँ, तो वह जब कहती है कि "इटस माई चोइस, आई डोंट वॉंट टू गो फॉर द फिल्म" तो मैं उसे कभी फोर्स नहीं करता हूँ। और अब शहरों में रहते रहते इस तरह की सोच रही नहीं है, की लड़का होता तो मैं यह करने देता और लड़की होती तो नहीं। मैं चाहता हूँ, जो सब चीज़ें मैने करी हैं वो भी करे। आई एम नॉट ब्रिंगिग हर अप एस अ गर्ल और एस अ वीकर सेक्स।
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शहरों की बात करें तो आप गुजरात...
शहरों की बात करें तो आप गुजरात के एक छोटे शहर सुरेंद्रनगर से हैं, तो वहां से यहां तक के सफर में औरतों को लेकर, आपने किस किस तरह के चेंजस देखे हैं समाज की सोच में।
मेरे शहरों की छोड़दो, मेरे खुद की सोच में कई परिवर्तन आए हैं। बचपन में हमने भी वही देखा है, कि मां घर का खयाल रखती है, लेकिन बहन नहीं थी मेरी, तो मैं श्वेता यानी मेरी वाइफ से मिला, तो जब वह लिप्सटिक भी लगाती थी, तो मुझे बड़ा अजीब लगता था और मैं उसे कहता था की कमसेकम पबलीकली, तो मेरे हिसाब से लडकीयों की अपब्रिंगिंग से ज़यादा लड़कों की अपब्रिंगिंग और का माइंडसेट चेंज करना चाहिए। समय के साथ मेरी भी सोच बदली है, तो इसी तरह लड़कों का माइंडसेट भी चेंज हो जाएगा।
मेरे शहरों की छोड़दो, मेरे खुद की सोच में कई परिवर्तन आए हैं। बचपन में हमने भी वही देखा है, कि मां घर का खयाल रखती है, लेकिन बहन नहीं थी मेरी, तो मैं श्वेता यानी मेरी वाइफ से मिला, तो जब वह लिप्सटिक भी लगाती थी, तो मुझे बड़ा अजीब लगता था और मैं उसे कहता था की कमसेकम पबलीकली, तो मेरे हिसाब से लडकीयों की अपब्रिंगिंग से ज़यादा लड़कों की अपब्रिंगिंग और का माइंडसेट चेंज करना चाहिए। समय के साथ मेरी भी सोच बदली है, तो इसी तरह लड़कों का माइंडसेट भी चेंज हो जाएगा।
इस शो में अपने किरदार के बारे में बताइए ? कौन है हनुमंत सिंह ?
हनुमंत केसरी नंदन है, केसरी नंदन एक खिताब है जो हनुमंत को मिला है, क्योंकि वह हारा नहीं है अभी तक, जिसकी कई पुशतों से अखाड़ा आंगन में ही है, और परीवार में कोई भी कभी हारे नहीं है आजतक। तो वह चाहता है यह कि उसका लड़का यह परमपरा आगे बढ़ाए। वह औरतों की बहुत इज़्जत करता है, लेकिन वो यह कभी नहीं सोच सकता कि उसकी बेटी जाके दंगल लड़ेगी।
क्या लगता है आपको कि कितना असरदार रहेगा यह दर्शकों पर ? किस हद तक चेंजस ला सकता शो ?
मात्रा तो नहीं बता सकता हूं, लेकिन अगर मुझे नहीं लगता की यह शो उस हद तक सोसाईटी में चेंज सा सकता है, तो मैं यह शो करता ही नहीं। आपको तो पता है की टीवी का माध्यम कितना स्ट्रॉंग है, कितनी इसकी रीच है, तो मुझे लगता है, कि यह पहुंचेगा लोगो तक और उनकी सोच भी बदलेगा।
क्या लगता है आपको कि कितना असरदार रहेगा यह दर्शकों पर ? किस हद तक चेंजस ला सकता शो ?
मात्रा तो नहीं बता सकता हूं, लेकिन अगर मुझे नहीं लगता की यह शो उस हद तक सोसाईटी में चेंज सा सकता है, तो मैं यह शो करता ही नहीं। आपको तो पता है की टीवी का माध्यम कितना स्ट्रॉंग है, कितनी इसकी रीच है, तो मुझे लगता है, कि यह पहुंचेगा लोगो तक और उनकी सोच भी बदलेगा।