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महेश भट्ट से सुनिए 'आशिकी 2' बनने की कहानी
रोहित मिश्र
Updated Wed, 17 Apr 2013 05:49 PM IST
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26 अप्रैल को रिलीज होने वाली 'आशिकी 2' 1990 की सुपरहिट फिल्म 'आशिकी' का सीक्वल है। इन दोनों ही फिल्मों से महेश भट्ट का वास्ता रहा है। खुद महेश भट्ट से सुनिए कि कैसे 'आशिकी 2' अपने वजूद में आयी। वह 'आशिकी' के भी कुछ अनुभव आपसे सांझा करना चाहते हैं।
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'आशिकी' का सफल होना एक फिल्मकार के रूप में मेरे लिए बहुत बड़ा सुखद सरप्राइज था। इस फिल्म ने मुझे एहसास कराया था कि लोग जिंदगी में कैसे भी हों पर वह प्यार में डूबकर खुद को हारना चाहते हैं। 'आशिकी' के बाद मैं अलग-अलग तरह की फिल्मों में व्यस्त हो गया। मैंने 'मर्डर' और 'राज' की कई सीरिज बनायी। दिमाग और फिल्मी फॉर्मूले से बनायी गयीं इन फिल्मों ने मुझे पैसा भी खूब दिया।
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इस बीच कभी यह ख्याल आया ही नही कि 'आशिकी' का सीक्वल बन सकता है। जबकि इन दिनों बहुत सी फिल्मों के सीक्वल बन रहे थे। मेरे मन में यह बात थी कि क्या आज 'आशिकी' जैसी फिल्म चल पाएगी। एक दिन अचानक गुलशन कुमार के बेटे भूषण कुमार मेरे पास आए। उन्होंने कहा कि वह 'आशिकी' का सीक्वल मेरे साथ बनाना चाहते हैं। मैने उनकी बात सुनीं। मुझे उनको हां कहने में एक मिनट भी नहीं लगा। शायद मैं अंतश से ऐसी फिल्म बनाने के लिए सोच रहा था, बस मुझमें पहल करने की हिम्मत नहीं थी।
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मैंने उन्हें हां तो कर दी पर मुझे इस बात की थोड़ी शंका जरूर थी कि आज की प्रैक्टिकल पीढ़ी प्रेम के इस जुनुनी और मरने-जीने वाले स्वरूप को स्वीकार्य कर पाएगी। उसे यह सब कुछ बनावटी तो नहीं लगेगा? कहानी क्या हो यह भी एक बड़ा प्रश्न था। मैंने शगुफ्ता रफीक से इसकी कहानी लिखने के लिए कहा। कहानी मेरे पास आयी। कहानी पढ़ने के बाद मुझे लगा कि 'आशिकी 2', 'आशिकी' से एक हजार गुना बेहतर फिल्म है।
यह फिल्म फिर से वैसा ही जादू जगाएगी। पिछले दिनों मैं शाम को जुहू बीच की तरफ टहल रहा था तो आठ-दस लड़कों के एक झुंड ने मेरा अभिवादन किया। उन्होंने 'आशिकी' के मुखड़े गाए और कोट ओढ़कर फिल्म का पोस्टर बनाने की कोशिश की।
मुझे वहां यकीन हुआ कि मेरा और भूषण का फैसला गलत नहीं था। मोहब्बत के तरीके बदलते हैं पर उसकी दीवानगी नहीं। भूषण कुमार ने ही यह तय किया कि वह यह फिल्म मोहित सूरी से निर्देशित करवाएंगे। बाकी कि जिम्मेदारी मोहित सूरी पर थी। उसने आदित्य और श्रृद्घा को इस कहानी के लिए कॉस्ट किया। मुझे लगता है कि उसका फैसला बिल्कुल सही है।
मेरा नाम गुलशन है, क्या आप महेश हैं?
'आशिकी' के हिट होने की एक बड़ी वजह उसका संगीत था। अब संगीत कैसे बना यह कहानी भी जान लीजिए। मैं 'आशिकी' की शुरुआती शूटिंग कर रहा था। चेहरे पर चमक और विश्वास के साथ एक आदमी अचानक मेरे पास आकर मुझसे मुखातिब होता है। "क्या आप महेश हैं? मुझे गुलशन कहते हैं। गुलशन कुमार। मैं म्यूजिक इंडस्ट्री में काम करता हूं। मैंने अभी तक एलबम बनाए हैं। सुना है कि आप एक फिल्म बना रहे हैं।
इस फिल्म के लिए मैंने कुछ धुने तैयार की हैं। इन्हें सुन लीजिए। मेरा विश्वास कीजिए कि 'आशिकी' की इन धुनों को घर-घर में सुना जाएगा।" मैंने उनकी धुने सुनीं। वाकई ऐसी धुनें थीं जो फिल्म के असर को और भी गहरा करती थीं। बाद में गुलशन कुमार की यह बात सोलह आना सच निकली। एक-एक घर और दुकानों में 'आशिकी' का म्यूजिक बजा और बजता ही रहा।
'आशिकी' की वजह से मैं हूं
पिछले दिनों मैं हवाई जहाज से सफर कर रहा था। एक एयर होस्टेस मेरे पास आयी। उसने मुझसे पूछा कि क्या आप 'आशिकी' का सीक्वल बना रहे हैं। मैंने कहा हां, कोशिश तो कर रहा हूं। उसने कहा आप नहीं जानते कि 'आशिकी' मेरे जिंदगी में कितनी अहम है। यदि 'आशिकी' न होती तो मैं न होती। उसने बताया कि उसके मां और बाप इस फिल्म के दौरान डेटिंग कर रहे थे।
शादी के लिए दोनों में ही प्रपोज करने की हिम्मत नहीं थी। मामला वही कि प्रपोज कौन करे। इस फिल्म के एक सीन ने मेरे पापा को प्रपोज करने की हिम्मत दी। फिल्म खत्म होते-होते यह तय हो गया था कि वह दोनों शादी करने जा रहे हैं।
फिर से मोहब्बत बरसाएगी यह फिल्म
लोगों की जिंदगी से प्यार खत्म हो गया है, यह बात पूरी तरह से सही नहीं है। मैने 'मर्डर' और 'राज' सीरिज की कई फिल्में बनायीं। यह फिल्में चली भीं। इस फिल्म के साथ जुड़कर ऐसा महसूस हुआ कि जैसी फिल्में मुझे संतुष्टि देती हैं 'आशिकी 2' वैसी फिल्म है।
फिल्म के कई दृश्य ऐसे हैं जहां मैं भूल जाता हूं कि मैं क्या हूं। यह फिल्म और दृश्य हिंदुस्तान में मोहब्बत को एक बार फिर से जिंदा कर देंगे। हर लड़का खुद में आदित्य कपूर को खोजेगा और हर लड़की श्रृद्घा में। मैं दावा करता हूं कि यह फिल्म इन दोनों को कलाकार से सुपरस्टार बनाएगी।