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'1947 से देश में असहिष्णुता है, वरना पाक नहीं होता'

Wed, 04 Nov 2015 11:13 AM IST
Updated Wed, 04 Nov 2015 11:13 AM IST
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Kamal Haasan reacts on returning National Awards

दक्षिण के सुपरस्टार कमल हसन ने नेशनल अवार्ड लौटाने का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने संघर्ष के दूसरे रास्तें अपपाने की नसीहत दी है। अंग्रेजी टीवी चैनल टाइम्स नाउ के एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि सम्मान वापस करने से कुछ नहीं होगा। मैं अपना सम्मान वापस नहीं करूंगा।

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कमल हसन के मुताबिक देश में असिष्‍णुता बढ़ी है। उन्होंने कहा कि साल 1947 में भी असहिष्णुता के चलते ही देश दो भागों में बंट गया। इस पर बहस होनी चाहिए और इस पर रोक लगनी चाहिए। लेकिन बात रखने के और भी तरीके हैं। यही नहीं अनिवार्य तौर पर हर पांच साल में सहिष्‍णुता-असहिष्‍णुता पर बहस होनी चाहिए।
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उनका मानना है कि सम्मानियों को सम्मान वापस करने के बजाय इस मुद्दे पर सार्वजनिक प्लेटफॉर्म पर आकर सीधी बहस करनी चाहिए। उनके मुताबिक सम्मान लौटाने से कही अधिक प्रभावशाली कदम इस मुद्दे पर एक लेख लिखना होगा।

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शाहरुख स्पष्ट कर चुके हैं अपना मत

Kamal Haasan reacts on returning National Awards

टीवी चैनल के कार्यक्रम में कमल हसन ने जोड़ा कि वे धार्मिक व्यक्ति नहीं हैं, लेकिन वह हर धर्म का सम्मान करते हैं। ऐसे में असहनशीलता एक बड़ा मुद्दा है। लेकिन इस मुद्दे को ध्यान में रखकर अगर अवॉर्ड वापस किया जाएगा तो यह मुद्दा सुलझने के बजाय और बढ़ता जाएगा।

इसको लेकर उन्होंने सम्मान वापस करने वालों को मामले पर सहिष्‍णु बनने की नसीहत दी। गौरतलब है कि बीते कल अपने 50वें जन्मदिन पर शाहरुख खान ने माना था कि देश में असहिष्‍णुता बढ़ी है।

हिन्दी व अंग्रेजी टीवी चैनलों के दो अलग-अलग कार्यक्रमों में उन्होंने स्वीकारा था कि अगर इसको लेकर उनसे सम्मान वापस करने को कहा जाएगा, तो वह भी सम्मान लौटाएंगे। शाहरुख को साल 2005 में चतुर्थ सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मश्री दिया गया था।

क्या है मुद्दा, कौन-कौन लौटा चुका है सम्मान

Kamal Haasan reacts on returning National Awards

उल्लेखनीय है कि पिछले महीने दिल्ली से लगे गौतमबुद्धनगर जिले के बिसहाड़ा गांव में एक मुसलमान की गाय का मांस रखने के शक में हत्या कर दी गई थी। इससे पहले कर्नाटक में तर्कवादी लेखक एमएम कलबुर्गी की कट्टरपंथी तत्वों ने हत्या कर दी थी। जिसके बाद से ही कई लेखकों ने असहिष्‍णुता के विरोध में अपने सम्मान लौटा दिए।

बाद में चित्रकार, वैज्ञानिक, इतिहासकार भी उस मुहिम में शामिल हो गए।हाल ही में फिल्म निर्देशक दिबाकर बनर्जी और मशहूर डॉक्यूमेंट्री फिल्म निर्देशक आनंद पटवर्धन के नेतृत्व में फिल्मी दुनिया के 10 ह‌स्तियों ने नेशनल अवार्ड लौटाए थे। इसमें लिपिका सिंह, निशांत जैन, कीर्ति नेखवा, हर्ष कुलकर्णी, हरि नायर जैसे बड़े नाम थे।

कई उद्योगपतियों ने भी देश में बढ़ रही असहिष्‍णुता के मुद्दे पर बयान दिया है। जिनमें एनआर नारायणमूर्ति और किरण शॉ मजुमदार प्रमुख हैं। हालांकि सरकार ऐसे विरोधों को खारिज करती रही है और उसका कहना है कि ये विरोध एक विचारधारा से प्रेरित और राजनीतिक हैं।

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