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Ittu Si Baat Review: छोटे शहरों की कहानियों का एक और जाल बट्टा, ‘इत्तू सी बात’ में देखने लायक कुछ भी नहीं

Fri, 17 Jun 2022 01:38 PM IST
Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Fri, 17 Jun 2022 01:38 PM IST
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Ittu Si Baat Movie Review by Pankaj Shukla Bhupendra Jadawat Gayatri Bharadwaj Dheerendra Gautam Farida Jalal Adnan Ali
इत्तू सी बात - फोटो : social media
Movie Review
इत्तू सी बात
कलाकार
भूपेंद्र जाड़ावत , गायत्री भारद्वाज , धीरेंद्र गौतम और फरीदा जलाल
लेखक
कमल शुक्ल और अदनान अली
निर्देशक
अदनान अली
निर्माता
लक्ष्मण उतेकर , करिश्मा शर्मा , नरेंद्र हीरावत और श्रेयांश हीरावत
रिलीज:
17 जून 2022
रेटिंग
1/5

सिनेमा दो कालखंडों में बंट चुका है। कोरोना से पहले का सिनेमा और कोरोना के बाद का सिनेमा। यानी थिएटर वाला सिनेमा और ओटीटी वाला सिनेमा। कौतुक दिखाने वाला सिनेमा, आईमैक्स के स्क्रीन पर विस्मित कर देने वाला सिनेमा, लोगों को एक साथ ठहाके मारकर हंसने पर मजबूर कर देने वाला सिनेमा या फिर किसी पुरानी कहानी के सिलसिले का दुखांत अंत दिखाकर दर्शकों को रुला देने वाला सिनेमा ही अब दर्शकों को सिनेमाघरों तक लाएगा। ‘पुष्पा’, ‘केजीएफ’, ‘आरआरआर’ और ‘भूल भुलैया 2’ की कामयाबी का यही डीएनए है। ये नहीं होता तो फिल्म कितनी भी अच्छी हो, जनहित में जारी की गई हो, समाज में एक मुद्दे पर बात करने का सबब बनती हो, मामला बॉक्स ऑफिस पर जमा नहीं पा रही। नुसरत भरूचा बीते हफ्ते इसी का नुकसान उठा चुकी है। इस हफ्ते रिलीज फिल्म ‘इत्तू सी बात’ में नुसरत भरूचा भी नहीं हैं और राज शांडिल्य की लेखनी भी नहीं है। फिर...? आइए जानते हैं।

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Ittu Si Baat Movie Review by Pankaj Shukla Bhupendra Jadawat Gayatri Bharadwaj Dheerendra Gautam Farida Jalal Adnan Ali
इत्तू सी बात - फोटो : सोशल मीडिया

बीती सदी की बासी कहानी
फिल्म ‘इत्तू सी बात’ की कहानी इत्ती सी है कि अपनी प्रेमिका से आई लव यू सुनने के लिए एक युवा को आईफोन का जुगाड़ करना है। बदलते भारत की ये धुंधलाती तस्वीर है। ना जाने कौन से भारत का सिनेमा बनाना चाहते हैं फिल्म ‘इत्तू सी बात’ बनाने वाले। प्रेम अब भी भावनाओं की बयार है। इसमें व्यापार की सोचना ही कहानी के कमजोर होने की पहली कड़ी है। ये सच है कि मित्रता का मंत्र ‘तत् सुखे सुखे त्वम्’ में ही है लेकिन अपनी बहन के दहेज का पैसा लेकर या फिर अपनी दादी की गुल्लक तोड़कर 21वीं सदी में शायद ही कोई युवा अपनी प्रेमिका के लिए आईफोन खरीदने के लिए पागल हो जाएगा। और, वह तब जब ये तय भी नहीं है कि जिसके लिए ये सब मेहनत हो रही है, वह किसी और से प्रेम नहीं करती। कहानी यहां से प्रेम त्रिकोण वाले खांचे में जाती है और दर्शकों का टाइम बर्बाद करके खत्म हो जाती है।

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Ittu Si Baat Movie Review by Pankaj Shukla Bhupendra Jadawat Gayatri Bharadwaj Dheerendra Gautam Farida Jalal Adnan Ali
इत्तू सी बात - फोटो : सोशल मीडिया

बड़ी कंपनी की छोटी फिल्म
एनएच स्टूडियोज की गिनती हिंदी सिनेमा की बड़ी फिल्म कंपनियों में होती है। उनको फिल्में भी बड़ी ही बनानी चाहिए। बजट ना बड़ा हो तो कम से कम सोच तो बड़ी रखनी ही चाहिए। सिनेमाघरों तक दर्शकों को लाना आसान काम नहीं है। भूपेंद्र जाड़ावत, गायत्री भारद्वाज और धीरेंद्र गौतम जैसे नए चेहरों को लेकर एक अस्वाभाविक सी कहानी पर फिल्म बनाने का विचार ही घाटे का सौदा है। फिल्म की कहानी भी दर्शकों से रिश्ता कहीं नहीं जोड़ती। इसके किरदारों का चरित्र भी विरोधाभासी है। ऐसे में निर्देशक अदनान अली ना कहीं ठीक से कहानी बता पाते हैं और न ही अपने कलाकारों को ये समझा पाते हैं कि उनके किरदार की ताकत क्या है और कमजोरी क्या? भ्रमित चरित्रों को लेकर बनी फिल्म ‘इत्तू सी बात’ एक भ्रमित फिल्म ही होकर रह जाती है।

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Ittu Si Baat Movie Review by Pankaj Shukla Bhupendra Jadawat Gayatri Bharadwaj Dheerendra Gautam Farida Jalal Adnan Ali
इत्तू सी बात - फोटो : social media

बेअसर रही नए चेहरों की नई खेप
फिल्म ‘इत्तू सी बात’ की कहानी इसके निर्देशक की है और पटकथा कमल शुक्ल ने लिखी है। दोनों अपने अपने डिपार्टमेंट में फेल हैं। रही बात अभिनेता मंडली की तो भूपेंद्र जाड़ावत का  हिंदी सिनेमा में सिनेमाघरों के रास्ते डेब्यू करने का ख्याल गलत निकला है। फिल्म सीधे ओटीटी पर रिलीज होती तो शायद इसे दर्शक सिनेमाघरों से ज्यादा ही मिलते। भूपेंद्र ने अपनी इस फिल्म से पहले कोई वर्कशॉप की हो, लगता नहीं है। अभिनय के मूल भाव भी उनके चेहरे पर नहीं उभरते। पूरी फिल्म वह कभी आमिर तो कभी शाहरुख की नकल करते दिखते हैं। बीच बीच में उन पर सलमान भी हावी होते हैं, लेकिन कॉमेडी का सूत्र भी उनकी मदद नहीं करता। यही हाल फिल्म की हीरोइन गायत्री भारद्वाज का है। इन दोनों से ठीक काम धीरेंद्र गौतम कर गए हैं। फरीदा जलाल को ऐसे किरदारों में देख तरस आता है।

Ittu Si Baat Movie Review by Pankaj Shukla Bhupendra Jadawat Gayatri Bharadwaj Dheerendra Gautam Farida Jalal Adnan Ali
इत्तू सी बात - फोटो : social media

देखें कि न देखें
तकनीकी तौर पर भी फिल्म ‘इत्तू सी बात’ एक खराब फिल्म है। विशाल मिश्रा और राज शेखर की जोड़ी मिलकर पूरी फिल्म में एक भी गाना ऐसा नहीं दे पाई है जिसे फिल्म देखने के बाद कोई गुनगुनाने भर को याद रख सके। राजन सोहानी की सिनेमैटोग्राफी और मनीष प्रधान का संपादन भी फिल्म का भला नहीं कर पाता है। अपने कथ्य, निर्माण, निर्देशन और संगीत में औसत से भी नीचे रही इस फिल्म को अगर देखने का मन ही हो तो इसे चार हफ्ते बाद ओटीटी पर ही देखना ठीक रहेगा।

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