बदलता ट्रेंड: कहानी फिल्मी नहीं Real है तभी इसमें Feel है
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आजादी के पहले से ही भारत में सिनेमा की शुरुआत हो गई थी। ऐसे में सौ साल से भी लंबे इतिहास में सिनेमा ने कई बार करवट ली है। कभी एक्शन फिल्मों ने जोर पकड़ा तो कभी कॉमेडी से सभी को खिलखिलाया गया। जिसके चलते अब सिनेमा ऐसे मोड़ पर है जब सभी के लिए सब कुछ मौजूद है। फिर चाहें किसी को रोमांस देखना हो या फिर हॉरर। लेकिन बदलते सिनेमा में एक सबसे बड़ा और अहम बदलाव आया है। वो ये कि पहले जहां सिर्फ लोग सिनेमा को फॉलो करते थे तो अब सिनेमा भी लोगों को फॉलो करने लगा है। दरअसल अब जो फिल्में बन रही हैं उनमें सिर्फ मसाला नहीं रह गया है बल्कि समाज की परछाई दिखने लगी है। पिछले कुछ वक्त में कई ऐसी फिल्में आई हैं जिन्होंने समाज की किसी सच्चाई को बड़े पर्दे पर दिखाया और बाकी दुनिया को उससे रूबरू करवाया।
सोशल मुद्दों पर बॉलीवुड का वार
आज भी हमारे समाज में कई ऐसे मुद्दे और समस्याएं हैं जो कागज पर तो खत्म या कम हो चुके हैं लेकिन हकीकत की हकीकत कुछ और ही है। ऐसे में इन मुद्दों पर बॉलीवुड ने बहुत वार किए हैं। जिससे न सिर्फ यह मुद्दे खुलकर सामने आए बल्कि लोगों ने इनके बारे में गहराई से सोचा और इनके समाधान पर भी मंथन किया। आर्टिकल 15, पैडमैन, टॉयलेट एक प्रेम कथा, मंथन, मदर इंडिया, माय ब्रदर निखिल, लज्जा, विकी डोनर, क्या कहना, डोर, मातृभूमि- ए नेशन विदआउट वुमेन, पाकीजा, अछूत कन्या, ब्लैक फ्राइडे, उड़ान, दामिनी, ओएमजी- ओह माय गॉड, प्रेम रोग, स्वदेश, 3 इडियट्स, तारे जमीन पर, लिपस्टिक अंडर माय बुर्का, मुल्क, हिंदी मीडियम और इंग्लिश विंग्लिश सहित कई ऐसी फिल्में बॉलीवुड में बनी हैं जिन्होंने समाज के किसी न किसी मुद्दे को दिखाया। फिल्मों में समाज की उन बातों पर ध्यान दिया गया जो हम सबके बीच रहकर भी गुमनाम हैं। आमिर खान की फिल्म थ्री इडियट्स एक सटीक उदाहरण है, फिल्म में उस छोटी सी लेकिन अहम बात पर ध्यान आकर्षित किया गया जिसमें बच्चों को उनके पसंदीदा करियर नहीं चुनने दिया जाता। बचपन से ही उन्हें सिखा और समझा दिया जाता है कि उन्हें डॉक्टर या इंजीनियर बनना है। ऐसे में वो बच्चा कैसे न सिर्फ समाज से बल्कि खुद से समझौता करता है। वहीं फिल्म ओमएजी में धर्म को लेकर एक अलग कहानी बयां की तो वहीं हिंदी मीडियम जैसी फिल्म में बच्चों के एडमिशन की समस्या को बखूबी दिखाया गया है। सोशल मुद्दों के जिक्र की फिल्मों की बात हो तो मधुर भंडारकर का नाम लेना जरूर बनता है। दरअसल मधुर ने कई ऐसी फिल्में बनाई हैं जो समाज के किसी ने किसी तबके की सच्चाई बयान करती हैं। उनकी सोशल फिल्मों की लिस्ट में चांदनी बार, पेज 3, कॉर्पोरेट, ट्रेफिक सिग्नल और फैशन जैसी फिल्में शामिल हैं। जो कभी ग्लैमर वर्ल्ड तो कभी बिजनेस वर्ल्ड की हकीकत बयान करती हैं।
क्राइम मिस्ट्री पर भी बॉलीवुड की नजर
समाज के मुद्दों को उठाने के साथ ही बॉलीवुड ने क्राइम मिस्ट्री को भी बड़े पर्दे पर दिखाने का काम किया है। दरअसल पिछले कुछ सालों में कई मर्डर मिस्ट्री सामने आए जिसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया। इन रियल किस्सों को फिल्मों ने रील पर दिखाया है। नो वन किल्ड जेसिका, तलवार, नॉट ए लव स्टोरी और अंकुर अरोड़ा मर्डर केस जैसी कुछ फिल्में हैं जो मर्डर मिस्ट्री पर बनी हैं। बता दें कि 'नो वन किल्ड जेसिका' जेसिका लाल कांड पर आधारित थी। फिल्म में विद्या बालन और रानी मुखर्जी मुख्य भूमिका में नजर आए थे। वहीं तलवार साल 2008 नोएडा के डबल मर्डर केस पर आधारित है। वहीं 'अंकुर अरोड़ा मर्डर केस' फिल्म 8 साल के बच्चे पर आधारित फिल्म है। जो डॉक्टरों की लापरवाही के कारण ऑपरेशन के दौरान मर जाता है। इतना ही नहीं घटना की खुलासा तब होता है जब सहयोगी डॉक्टरों में से एक मृतक बच्चे की मां को सारी बात बताता है। यह फिल्म साल 2013 में रिलीज हुई थी। इन फिल्मों के साथ ही कई और ऐसी फिल्में बनी हैं जिसमे समाज की घटनाओं को ही दिखाया गया है।
इतिहास पर भी है बॉलीवुड की नजर
समाज के मुद्दों के साथ और क्राइम मिस्ट्री पर तीखी नजर रखने के बाद बॉलीवुड ने इतिहास को जगाने का भी काम किया है। जोधा अकबर, पद्मावत, बाजीराव मस्तानी, मोहेंजो दारो, मुग़ल ए आज़म, केसरी और अशोका सहित कई ऐसी फिल्में बॉलीवुड में बनी हैं जिनमें इतिहास को जगाने की कोशिश की गई। हालांकि ऐसा करना आसान नहीं रहा। कभी इतिहास से खेलने का आरोप लगाया गया तो कभी सब सही होने के बाद भी फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कुछ खास कमाल नहीं दिखा पाई। लेकिन बॉलीवुड हार नहीं मानता।
शौर्य गाथा को भी बॉलीवुड ने किया नमन
केसरी, मणिकर्णिका: द क्वीन ऑफ झांसी, मंगल पांडे और शहीद भगत सिंह जैसी फिल्मों को भी बॉलीवुड ने बखूबी बड़े पर्दे पर दिखाया। भगत सिंह पर तो पांच से ज्यादा फिल्में बन चुकी हैं। दरअसल बॉलीवुड ने शुरू से ही अच्छाई और शौर्य को बड़े पर्दे पर बड़ा दिखाया है। भारतीय सिनेमा की पहली फिल्म 'राजा हरीशचंद्र' भी राजा हरीशचंद्र की सच्चाई को दिखाती थी। ऐसे में बॉलीवुड ने समाज को यह दिखाया और समझाया की सच आसान नहीं होता और सच्चाई की राह में मुश्किलें बहुत आती हैं। लेकिन हमें बहादुरी से लड़ना है और सच की राह पर आगे बढ़ना है। वैसे एक तरफ जहां बॉलीवुड ने युद्ध को बड़े शानदार तरीके से दिखाया तो वहीं गांधीगिरी का पाठ भी दर्शकों को बखूबी पढ़ाया। महात्मा गांधी या फिर कहें बापू पर भी कई फिल्में आ चुकी हैं जिनमें कभी उनका जीवन दिखाया गया तो कभी सच्चाई पर अडिग रहना। लेकिन ऐसे में 'लगे रहो मुन्नाभाई' फिल्म एक शानदार उदाहरण है जिसमें बापू की सच्चाई वाली राह की बात को बड़े ही मनोरंजक तरीके से दिखाया गया है। इस फिल्म ने न सिर्फ सोशल मैसेज दिया बल्कि साथ ही साथ बॉक्स ऑफिस पर अच्छी कमाई भी।
नेता और राजनेताओं का सफर
जब किसी भी क्षेत्र को बॉलीवुड ने नहीं छोड़ा तो फिर आखिरकार राजनीति और राजनेता कैसे पीछे रह जाते। दरअसल बॉलीवुड ने राजनीति से लेकर नेताओं तक की जिदंगी पर फिल्में बनाई हैं। सुभाष चंद्र बोस, द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर, ठाकरे, राजनीति, आरक्षण, इंदु सरकार, सरकार राज, पीएम नरेन्द्र मोदी, नायक, यंगिस्तान और सत्याग्रह जैसी कई फिल्मे हैं जिसमें राजनीति के साथ-साथ किसी राजनेता के बारे में बताया गया। हालांकि इतिहास की फिल्मों की तरह ही इन फिल्मों पर भी कई बार विवाद हुआ।
स्पोर्ट्स के स्ट्रगल को भी बड़े पर्दे पर दिखाया
बॉलीवुड ने स्पोर्ट्स की हकीकत को भी बड़े पर्दे पर दिखाने में गुरेज नहीं किया है। कई ऐसी फिल्में बनी हैं जिनमे या तो किसी स्पोर्ट्सपर्सन या किसी किस्से को दिखाया गया है। एम एस धोनी- द अनटोल्ड स्टोरी, भाग मिल्खा भाग, दंगल, बुधिया सिंह-बॉर्न टू रन, मेरी कॉम और सचिन ए बिलियन ड्रीम्स कुछ ऐसी फिल्मे हैं जिनमें स्पोर्ट्सपर्सन के स्ट्रगल को दिखाया गया है।
रियल किस्सों का 'रील' बजट और कमाई
रियलिटी को रील पर दिखाना बॉलीवुड के लिए आसान नहीं होता है। कई बार इसको लेकर भारी विवाद होता तो कई दफा बड़ा बजट खर्च करने के बाद भी फिल्म बॉक्स ऑफिस पर लुढ़क जाती है। दरअसल कुछ रियल किस्सों को रील पर दिखाने के लिए अच्छा बजट खर्च होता है। तो वहीं कई दफा कम बजट के साथ ही फिल्म बन जाती है। एक तरफ जहां दंगल, पैडमैन, 3 इडियट्स, टॉयलेट एक प्रेम कथा जैसी फिल्में काफी अच्छा बिजनेस करती हैं तो दूसरी ओर इंदु सरकार, डोर, मातृभूमि- ए नेशन विदआउट वुमेन और सुभाष चंद्र बोस जैसी फिल्में फ्लॉप हो जाती है। हालांकि फिल्मों के हिट और फ्लॉप होने में एक बड़ा हाथ फिल्म की स्टारकास्ट का भी होता है। अधिकतर ऐसी हिट फिल्मों की स्टारकास्ट भी बड़े सितारे रहे हैं। खैर फिल्में हिट हो या फ्लॉप बॉलीवुड रियल स्टोरीज को रील पर बनाना तो नहीं छोड़ेगा और हर क्षेत्र पर अपनी तीखी नजर बनाकर रखेगा।