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गुरुदत्त ने वहीदा रहमान को क्यों छोड़ा
जनार्दन पांडेय/अमर उजाला, दिल्ली
Updated Wed, 30 Mar 2016 09:07 PM IST
सार
- गुरुदत्त, वहीदा से बेपनाह मुहब्बत करते थे। उनके बैनर की हर फिल्म में वहीदा के अलग से खासतौर पर दृश्य लिखे जाते थे। बिना वहीदा के गुरुदत्त फिल्म की कल्पना भी नहीं करते थे। फिल्म का निर्देशक कोई हो, अगर दृश्य में वहीदा है तो उसका निर्देशन वह खुद करते थे।
- गुरुदत्त की पत्नी गीता दत्त की जिंदगी में एक आकर्षक पाकिस्तानी युवक आ गया था। गीता की मुलाकात उससे लंदन में हुई थी।
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गुरुदत्त (1925-1964)
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विस्तार
'गुरुदत्त फिल्म्स' के सेट्स पर वहीदा का मेकअप रूम गुरुदत्त के मेकअप रूम के साथ लगा हुआ था। इन दोनों कमरों के सामने एक और कमरा था, जो दत्त और वहीदा के कमरों को ढक सा लेता है। यहां तक कि अगर वहीदा किसी दूसरे बैनर के तले भी काम कर रही हो थीं तब भी वह दत्त फिल्म्स के मेकअप रूम का ही उपयोग करती थीं।
एक दिन वहीदा जब अपने मेकअप रूम में आ रही थीं तो अचानक ही दत्त के विश्वसनीय, रतन ने यह कहते हुए उनका रास्ता रोक दिया कि मेकअप रूम में अब उनका प्रवेश वर्जित है। रतन इसका कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया। अगले दिन जब फिर वही वाकया हुआ तो वहीदा रोते हुए वहां से चली गईं। गुरुदत्त ने वहीदा रहमान को ठुकरा दिया।
सर्वविदित है गुरुदत्त, वहीदा से बेपनाह मुहब्बत करते थे। उनके बैनर की हर फिल्म में वहीदा के अलग से खासतौर पर दृश्य लिखे जाते थे। बिना वहीदा के गुरुदत्त फिल्म की कल्पना भी नहीं करते थे। फिल्म का निर्देशक कोई हो, अगर दृश्य में वहीदा है तो उसका निर्देशन वह खुद करते थे।
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वहीदा रहमान के बहनोई रउन ने तो यहां तक कहा था गुरुदत्त धर्म बदलकर वहीदा से शादी के लिए भी तैयार हो गए थे। फिर ऐसा क्या हुआ, क्यों गुरुदत्त ने उन्हें बेदखल कर दिया, इसके बारे में किताब 'टेन ईयर्स विद गुरुदत्त' में उनके दोस्त अब्रार आल्वी विस्तार से बताते हैं।
बात उन्हीं दिनों की है जब भारत में गुरुदत्त के मुसलमान बनकर वहीदा से शादी की चर्चाएं जोरों थीं और दत्त की पत्नी गीता लंदन में थीं। उन्हें जल्द ही घर लौटना था, लेकिन वह घर लौटने के बजाय अपने कश्मीर स्थित घर चली गईं। दिन हफ्तों में तब्दील हो गए पर गीता घर वापस आने का नाम ले रही थीं। जब दत्त का धीरज जवाब देने लगा तो उन्होंने गीता के ऊपर वापस आने की लिए दबाव डालना शुरू किया।
जवाब में गीता ने यह संदेश भोजा कि घोड़े से गिर जाने के कारण उनके कंधे में चोट आ गई थी और अगले कुछ हफ्तों वह किसी तरह की यात्रा नहीं कर पाएंगी। अब्रार बताते हैं कि गुरुदत्त एक संवेदनशील पति थे, उन्हें तुरंत गीता के स्वास्थ्य को लेकर चिंता होने लगी। खुद बुरी तरह से काम में व्यस्त होने कारण उन्होंने अपने सहायक श्याम कपूर को कश्मीर भेजा। लेकिन कश्मीर जाकर कुछ और ही देखने को मिला।
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एक दिन वहीदा जब अपने मेकअप रूम में आ रही थीं तो अचानक ही दत्त के विश्वसनीय, रतन ने यह कहते हुए उनका रास्ता रोक दिया कि मेकअप रूम में अब उनका प्रवेश वर्जित है। रतन इसका कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया। अगले दिन जब फिर वही वाकया हुआ तो वहीदा रोते हुए वहां से चली गईं। गुरुदत्त ने वहीदा रहमान को ठुकरा दिया।
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सर्वविदित है गुरुदत्त, वहीदा से बेपनाह मुहब्बत करते थे। उनके बैनर की हर फिल्म में वहीदा के अलग से खासतौर पर दृश्य लिखे जाते थे। बिना वहीदा के गुरुदत्त फिल्म की कल्पना भी नहीं करते थे। फिल्म का निर्देशक कोई हो, अगर दृश्य में वहीदा है तो उसका निर्देशन वह खुद करते थे।
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वहीदा रहमान के बहनोई रउन ने तो यहां तक कहा था गुरुदत्त धर्म बदलकर वहीदा से शादी के लिए भी तैयार हो गए थे। फिर ऐसा क्या हुआ, क्यों गुरुदत्त ने उन्हें बेदखल कर दिया, इसके बारे में किताब 'टेन ईयर्स विद गुरुदत्त' में उनके दोस्त अब्रार आल्वी विस्तार से बताते हैं।
बात उन्हीं दिनों की है जब भारत में गुरुदत्त के मुसलमान बनकर वहीदा से शादी की चर्चाएं जोरों थीं और दत्त की पत्नी गीता लंदन में थीं। उन्हें जल्द ही घर लौटना था, लेकिन वह घर लौटने के बजाय अपने कश्मीर स्थित घर चली गईं। दिन हफ्तों में तब्दील हो गए पर गीता घर वापस आने का नाम ले रही थीं। जब दत्त का धीरज जवाब देने लगा तो उन्होंने गीता के ऊपर वापस आने की लिए दबाव डालना शुरू किया।
जवाब में गीता ने यह संदेश भोजा कि घोड़े से गिर जाने के कारण उनके कंधे में चोट आ गई थी और अगले कुछ हफ्तों वह किसी तरह की यात्रा नहीं कर पाएंगी। अब्रार बताते हैं कि गुरुदत्त एक संवेदनशील पति थे, उन्हें तुरंत गीता के स्वास्थ्य को लेकर चिंता होने लगी। खुद बुरी तरह से काम में व्यस्त होने कारण उन्होंने अपने सहायक श्याम कपूर को कश्मीर भेजा। लेकिन कश्मीर जाकर कुछ और ही देखने को मिला।
पराए मर्द के आकर्षण में आ गई थी गीता दत्त
गुरुदत्त (1925-1964)
'टेन ईयर्स विद गुरु दत्त' में अब्रार साफ बताते हैं कि श्याम कपूर कश्मीर से उल्टे पांव लौट आए। उन्होंने एक अलग ही दास्तां बयां की। लौटकर कपूर ने बताया कि गीता को कोई चोट नहीं लगी है। उनके मुंबई वापस न लौटने का कारण एक आकर्षक पाकिस्तानी युवक था। गीता की मुलाकात उससे लंदन में हुई थी। लेकिन अब दोनों कश्मीर की वादियों में खोए हुए हैं।
अब्रार के मुताबिक गुरुदत को यह खबर सुनकर सांप सूंघ गया। वह इस सच का सामना नहीं कर पा रहे थे। उन्हें कतई विश्वास नहीं हो रहा था कि उकनी पत्नी किसी दूसरे पुरुष के साथ वक्त बिता रही है। लेकिन उसी वक्त उनके जेहन में यह खयाल भी आया कि वह खुद भी उसी रास्ते पर हैं।
अब्रार बताते हैं, "दत्त के जीवन में किंकर्तव्यविमूढ़ता का नामो-निशान भी नहीं था। मुझे याद है कि जब मैं एक ऐसी लड़की से विवाह करने पर अमल कर रहा था जो कि पढ़ाई-लिखाई के साथ कुलीनता के मामले में मुझसे और दत्त से नीचे थी तो उन्होंने मुझे एक कठोर सलाह दी, 'तुम उस लड़की से रिश्ते को शादी में बदलने के ख्याल अपने दिल से निकाल दो... ऐसे रिश्ते झटके से समाप्त हो जाते हैं... तुम अपनी जिंदगी बर्बाद मत करो। यह कहते हुए उन्होंने अपने हाथों से कत्ल करने का अभिनय किया था।"
ऐसे में जब उनकी पत्नी गीता को एक पराए मर्द के साथ जोड़ा जा रहा था, गुरुदत्त ने कुछ इसी तरह के फैसले के बारे में सोच लिया था। अब्रार कहते हैं कि उन्हें गुरुदत्त के उस फैसले के बारे में 'साहिब बीबी गैंगस्टर' की शूटिंग के आखिरी दिनों में पता लगा। एक दिन जब वहीदा उनके पास गुस्से में आईं और बोलीं, 'आखिर दत्त को हो क्या गया है? मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है?'
अब्रार के मुताबिक गुरुदत को यह खबर सुनकर सांप सूंघ गया। वह इस सच का सामना नहीं कर पा रहे थे। उन्हें कतई विश्वास नहीं हो रहा था कि उकनी पत्नी किसी दूसरे पुरुष के साथ वक्त बिता रही है। लेकिन उसी वक्त उनके जेहन में यह खयाल भी आया कि वह खुद भी उसी रास्ते पर हैं।
अब्रार बताते हैं, "दत्त के जीवन में किंकर्तव्यविमूढ़ता का नामो-निशान भी नहीं था। मुझे याद है कि जब मैं एक ऐसी लड़की से विवाह करने पर अमल कर रहा था जो कि पढ़ाई-लिखाई के साथ कुलीनता के मामले में मुझसे और दत्त से नीचे थी तो उन्होंने मुझे एक कठोर सलाह दी, 'तुम उस लड़की से रिश्ते को शादी में बदलने के ख्याल अपने दिल से निकाल दो... ऐसे रिश्ते झटके से समाप्त हो जाते हैं... तुम अपनी जिंदगी बर्बाद मत करो। यह कहते हुए उन्होंने अपने हाथों से कत्ल करने का अभिनय किया था।"
ऐसे में जब उनकी पत्नी गीता को एक पराए मर्द के साथ जोड़ा जा रहा था, गुरुदत्त ने कुछ इसी तरह के फैसले के बारे में सोच लिया था। अब्रार कहते हैं कि उन्हें गुरुदत्त के उस फैसले के बारे में 'साहिब बीबी गैंगस्टर' की शूटिंग के आखिरी दिनों में पता लगा। एक दिन जब वहीदा उनके पास गुस्से में आईं और बोलीं, 'आखिर दत्त को हो क्या गया है? मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है?'
गुरुदत्त ने वो कठोर फैसला कर लिया था
गुरुदत्त (1925-1964)
असल में दत्त ने वहीदा को ठुकरा दिया था। 'टेन ईयर्स विद गुरुदत्त' के मुताबिक गुरुदत्त ने यह सब इसलिए किया ताकि अपनी पत्नी गीता अपने जीवन में आए पराए मर्द को छोड़कर एक बार फिर से उनके पास वापस आ जाएं। किताब में गुरुदत्त के सबसे घनिष्ठ रहे अब्रार बताते हैं, 'यह जानने के बाद कि दत्त ने वहीदा को ठुकरा दिया है, मैं दत्त के पास गया। उनको धड़ल्ले से समझाया।'
अब्रार ने दत्त से कहा, "मैंने आपको कभी यह नहीं कहा था कि आप गीता को छोड़ किसी और के साथ प्रेम प्रसंग चलाएं। पर आज जरूर कहूंगा कि आप अभी जो कर रहे हैं वह गलत है। आप की तरह मेरा भी मानना है कि कोई भी वह पुरुष जो कि एक पिता है, उसके लिए आनी पत्नी को छोड़कर किसी और की ओर देखना सही नहीं है पर यह भी एक सत्य है कि ऐसा होना स्वाभाविक है और ऐसा होता है। आपके संदर्भ में यह थोड़ा बहुत तर्कसंगत भी है क्योंकि आपका दाम्पत्य जीवन उलझनों से भरा हुआ है, आपका बतौर धर्मपत्नी गीता का चुनाव ही गलत था। जब आपने वहीदा को लुभाकर उसका दिल जीत लिया तब हम सब चुप थे क्योंकि वहीदा की मां और आपकी माता जी तक को ऐसा लगा था कि वहीदा ही आपके जीवन संगिनी के तौर पर अधिक उपयुक्त हैं। आप वहीदा को बिना किसी ठोस कारण के इस तरह से अपनी जिंदगी से अलग कैसे कर सकते हैं!"
लेकिन गुरुदत्त इस विषय पर किसी तरह की चर्चा में नहीं दिखाई। इसके बाद दोनों साहिब बीबी गुलाम की एक आखिरी शूटिंग पर आमने सामने हुए थे। लेकिन वहां का नाजारा कुछ यूं था। वहीदा सीन करने लिए तब राजी हुईं जब उन्हें आश्वस्त किया गया कि दत्त का उनके साथ सीधे कोई संवाद नहीं होगा। लेकिन एक उलझन फंस गई। सीन में उन्हें दत्त को स्पर्श करना था वो कतई तैयार नहीं थीं। लंबी जद्दोजहद के बाद उन्होंने दत्त के कंधे पर हाथ तो रखा पर नजर उठाकर देखा तक नहीं।
अब्रार ने दत्त से कहा, "मैंने आपको कभी यह नहीं कहा था कि आप गीता को छोड़ किसी और के साथ प्रेम प्रसंग चलाएं। पर आज जरूर कहूंगा कि आप अभी जो कर रहे हैं वह गलत है। आप की तरह मेरा भी मानना है कि कोई भी वह पुरुष जो कि एक पिता है, उसके लिए आनी पत्नी को छोड़कर किसी और की ओर देखना सही नहीं है पर यह भी एक सत्य है कि ऐसा होना स्वाभाविक है और ऐसा होता है। आपके संदर्भ में यह थोड़ा बहुत तर्कसंगत भी है क्योंकि आपका दाम्पत्य जीवन उलझनों से भरा हुआ है, आपका बतौर धर्मपत्नी गीता का चुनाव ही गलत था। जब आपने वहीदा को लुभाकर उसका दिल जीत लिया तब हम सब चुप थे क्योंकि वहीदा की मां और आपकी माता जी तक को ऐसा लगा था कि वहीदा ही आपके जीवन संगिनी के तौर पर अधिक उपयुक्त हैं। आप वहीदा को बिना किसी ठोस कारण के इस तरह से अपनी जिंदगी से अलग कैसे कर सकते हैं!"
लेकिन गुरुदत्त इस विषय पर किसी तरह की चर्चा में नहीं दिखाई। इसके बाद दोनों साहिब बीबी गुलाम की एक आखिरी शूटिंग पर आमने सामने हुए थे। लेकिन वहां का नाजारा कुछ यूं था। वहीदा सीन करने लिए तब राजी हुईं जब उन्हें आश्वस्त किया गया कि दत्त का उनके साथ सीधे कोई संवाद नहीं होगा। लेकिन एक उलझन फंस गई। सीन में उन्हें दत्त को स्पर्श करना था वो कतई तैयार नहीं थीं। लंबी जद्दोजहद के बाद उन्होंने दत्त के कंधे पर हाथ तो रखा पर नजर उठाकर देखा तक नहीं।