महिलाओं की गलत छवि पेश करता है बॉलीवुड?
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यूं तो बॉलीवुड में नई-नई हीरोइने डेब्यू कर रही हैं लेकिन अंर्तराष्ट्रीय महिला दिवस पर ये सोचने की जरूरत है कि क्या बॉलीवुड इंडस्ट्री में महिलाओं की छवि सही दिखाई जा रही है।
बॉलीवुड के परफेक्शनिस्ट आमिर खान ने अपने टीवी शो 'सत्यमेव जयते' में महिलाओं से संबंधित कई गंभीर विषयों पर बात की लेकिन क्या बॉलीवुड फिल्मों में महिलाओं के चित्रण को लेकर विचार नहीं किया जाना चाहिए?
खुद आमिर खान ने पिछले साल महिला दिवस के मौके पर कहा था कि रूपहले परदे पर महिलाओं की छवि बदलने की जरूरत है। ‘सत्यमेव जयते’ के जरिए लोगों पर प्रभाव डालने वाले आमिर खान खुद चाहते हैं कि परदे पर महिलाओं की छवि सकारात्मक हो।
ऐसी फिल्में करके दुखी हैं आमिर
आमिर खान ने अपनी एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म के प्रचार के दौरान इस बात को स्वीकारा था कि हमारी इंडस्ट्री में महिलाओं को वस्तु की तरह पेश किया जाता है। उन्होंने ये भी कहा था कि उन्हें इस बात का दुख है कि ऐसी ही फिल्मों का हिस्सा रह चुके हैं।
आपको बता दें, आमिर खान ने 'सत्यमेव जयते' शो में 'मुन्नी बदनाम हुई' और 'फेविकोल' जैसे आइटम नंबर्स पर भी सवाल उठाए थे। आमिर का खुद मानना है कि बॉलीवुड लोगों को प्रभावित करता है लेकिन बॉलीवुड महिलाओं की गलत छवि पेश करता है। उनका मानना है कि अब समय आ गया है
कि महिलाओं की फिल्मों में ऐसी छवि पेश की जाए जिससे लोग महिलाओं की इज्ज्त करें।
प्रमोशन में दिखती है गलत छवि
आजकल की नई हीरोइनें फिल्मों में खुल्ल्मखुल्ला एक्सपोज कर रही हैं। इतना ही नहीं, अब किसी भी फिल्म का प्रचार-प्रसार फिल्म की थीम से नहीं बल्कि फिल्म में किस हीरोइन कितने न्यूड सीन दिए, फिल्म में कितने बैड सीन है या फिर कितने किसिंग सीन है। इनसे फिल्मों का प्रचार किया जाता है।
यहां तक की जानबूझकर एमएमएस तक बनवाए जाते हैं या फिर प्रमोशन के जरिए ऐसी कंट्रोवर्सी की जाती है कि फिल्म रातोरात चर्चा में आ जाए।
फिल्मों में अश्लीलता और नग्नता को खुल्लेपन की दहाई देकर परोसा जा रहा है। महिलाओं की नकारात्मक छवि बनाकर इसे खुलेपन का नाम दिया जा रहा है।
लेकिन क्या ये सचमुच खुलापन है या खुलेपन की आड़ में महिलाओं की छवि का नुकसान? आपको नहीं लगता अब सचमुच महिलाओं की छवि में बदलाव करने की अब जरूरत है?