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‘चोली के पीछे..’ ने लगा दिया था ठप्पा, महिला समानता दिवस पर इला अरुण ने की मन की बात; बोलीं- समाज से दबती नहीं

Wed, 26 Aug 2026 07:00 AM IST
Kiran Vinod Kumar Jain किरण जैन
Updated Wed, 26 Aug 2026 07:00 AM IST
सार

Women's Equality Day: आज 26 अगस्त को महिला समानता दिवस मनाया जा रहा है। इस मौके पर मशहूर गायिका इला अरुण ने सिनेमा जगत में महिलाओं की स्थिति पर बात की। जानिए वे क्या बोलीं?

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Ila Arun talks about feminism and place of women in industry In a Exclusive Interview On Womens Equality Day
इला अरुण - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

‘चोली के पीछे क्या है...’, इला अरुण के करियर का यह गाना आज भी लोगों को याद है। गाने ने उन्हें पहचान दी, लेकिन इसके साथ एक ठप्पा भी लग गया। इला को इस बात का दुख है कि उनके बाकी काम उस एक गाने के पीछे छूट गए। महिला समानता दिवस के मौके पर उन्होंने अमर उजाला से बातचीत में इंडस्ट्री में महिलाओं की जगह, अपने अनुभव, समाज और फेमिनिज्म पर खुलकर बात की।

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Ila Arun talks about feminism and place of women in industry In a Exclusive Interview On Womens Equality Day
इला अरुण - फोटो : इंस्टाग्राम @llaarun

‘चोली के पीछे क्या है’ से मेरे ऊपर ठप्पा लग गया
इला कहती हैं, 'मेरा एक गाना इतना बदनाम हुआ- चोली के पीछे क्या है। देखिए, एक तो लोग संगीत में ऐसे छेड़छाड़ वाले गाने होते रहे हैं। पंजाबी, गुजराती, यूपी-बिहार... हर जगह ऐसे गाने रहे हैं। सवाल ये है कि इस तरह के सवाल करता कौन था? लड़के करते थे ना..? लेकिन जब वो गाना आया और मैंने गाया तो मेरे ऊपर उंगली उठी, ठप्पा लग गया कि ये तो ऐसे डबल मीनिंग गाने ही गाती है'। 
'दुख इस बात का है कि उन्होंने मेरे दस एल्बम नहीं सुने, जिन दस एल्बम में प्यार है, लोक संगीत है। उन्होंने क्यों नहीं सुने? क्योंकि फिल्म इतना सशक्त माध्यम है। उसका एक आइटम नंबर है, जो सिचुएशन के हिसाब से है'। 
वह गाना जिस माहौल और किरदार के लिए था, लोगों ने उसी के आधार पर मुझे देखना शुरू कर दिया। लांछन मुझ पर भी लगे, लेकिन जब आप हटके कुछ करते हो तो ये होना स्वाभाविक है।'

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Ila Arun talks about feminism and place of women in industry In a Exclusive Interview On Womens Equality Day
इला अरुण - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

'मैं समाज से दबती नहीं हूं, न उसे ताक पर रखती हूं’
इला के लिए समाज को पूरी तरह नकार देना भी रास्ता नहीं है। वह कहती हैं, 'समाज और आपका व्यक्तित्व दोनों साथ चलते हैं। अगर आपके व्यक्तित्व में दम है तो समाज आपको एक्सेप्ट करता है। मैं समाज की तारीफ करती हूं, खास तौर से औरतों की, जिन्होंने मुझे इतना प्यार दिया है। मैं न तो समाज से दबती हूं और न ही समाज को ताक पर रखती हूं।'

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किरदार मेरी पर्सनैलिटी को डिफाइन नहीं करता
अपने अलग-अलग किरदारों के बारे में वह कहती हैं, 'आर्टिस्ट को हर रोज कुछ नया करना पड़ता है। स्क्रीन पर मां भी रही हूं, सौतेली मां भी रही हूं, मंडी में प्रॉस्टिट्यूट भी रही हूं, स्ट्रॉन्ग वुमन भी रही हूं। लेकिन वो मेरी पर्सनैलिटी को डिफाइन नहीं करता। उससे मेरे बारे में सब कुछ पता नहीं चलता।'

महिला होने की वजह से इंडस्ट्री में भेदभाव के सवाल पर वह अपने अनुभव की बात करती हैं। इला कहती हैं, 'मैं आपको बहुत फ्रैंकली बताऊं, मुझे ऐसा भेदभाव महसूस नहीं हुआ, क्योंकि मैं एक आर्टिस्ट हूं, कैरेक्टर आर्टिस्ट हूं। लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि उस दौर में महिलाओं को लेकर सोच में कोई फर्क नहीं था।'

Ila Arun talks about feminism and place of women in industry In a Exclusive Interview On Womens Equality Day
इला अरुण - फोटो : सोशल मीडिया

‘पहले औरतों के लिए स्क्रिप्ट ही नहीं हुआ करती थी’
इला कहती हैं, 'एक जमाने में एक्शन ओरिएंटेड फिल्में होती थीं। मर्दों को उम्मीद नहीं होती थी कि औरतें फिल्में चला पाएंगी। उनको बहुत कम था कि औरतें एक्शन कर लेंगी। आजकल 'मर्दानी' जैसी फिल्में बन रही हैं। पहले औरतों की स्क्रिप्ट हुआ नहीं करती थी। उनको डॉसाइल समझा जाता था।'

अब वह महिलाओं के लिए लिखी जा रही कहानियों में बदलाव देखती हैं। 'अब सेंटर स्क्रिप्ट आने लगी हैं। कोई कहेगा कि हमें मौका नहीं मिला, लेकिन अब लिखी जाने लगी हैं।'
इला मानती हैं कि दर्शक भी इस बदलाव को आगे बढ़ाते हैं। 'अगर सोसाइटी औरतों की मजबूती की फिल्में देखने लगेगी तो इंडस्ट्री वाले बिजनेसमैन हैं। वे वैसी फिल्में बनाएंगे। ऐसा मेरा सोचना है।'

‘भारत बहुत बड़ा है, हर जगह बदलाव एक जैसा नहीं है’
भारत में महिलाओं की स्थिति को लेकर इला किसी एक तस्वीर में बात नहीं करना चाहतीं। वह कहती हैं, 'हम पूरे इंडिया की बात नहीं कर सकते। भारत बहुत बड़ा है। हमारे राजस्थान में एक जमाने में जौहर प्रथा, सती प्रथा, बाल विवाह था। वो अब गायब हो गए हैं। लड़कियां खुद चुन रही हैं।'

'हम बढ़ रहे हैं, चाहे धीरे-धीरे ही सही’
वह आगे कहती हैं, 'भारत के कई ऐसे कोने हैं, जहां लड़कियों को शिक्षा नहीं मिल रही है। आज भी उम्र से पहले शादी कर दी जाती है। लेकिन मैं ऐसा बिल्कुल नहीं कहूंगी कि हमारा देश आगे नहीं बढ़ रहा। हम बढ़ रहे हैं, चाहे धीरे-धीरे ही क्यों न सही।'
पुरुषों के नजरिए में भी उन्हें बदलाव दिखता है। 'आजकल के मर्दों का नजरिया बहुत बदला हुआ है। लड़के भी संवेदनशील हो रहे हैं। अच्छे पिता हो रहे हैं, अपनी वाइफ की मदद भी कर रहे हैं।'

Ila Arun talks about feminism and place of women in industry In a Exclusive Interview On Womens Equality Day
इला अरुण - फोटो : इंस्टाग्राम

‘फेमिनिज्म है, जरूरत भी है, लेकिन गलत फायदा नहीं उठना चाहिए’
फेमिनिज्म पर इला का रुख साफ है। वह कहती हैं, 'फेमिनिज्म है, जरूरत भी है, लेकिन कई बार लोग इसका गलत फायदा उठाते हैं। मैं हर उस औरत के खिलाफ हूं जो फेमिनिज्म का गलत फायदा उठाती है।'
इसी सिलसिले में वह लद्दाख के मिनिमार्ग चेकपोस्ट पर सुरक्षा कर्मियों से बहस करती महिला के वायरल वीडियो का उदाहरण देती हैं। वीडियो में महिला सड़क बंद होने को लेकर सुरक्षा कर्मियों से बहस करती और खुद को 'Gen Z' बताते हुए नाराजगी जाहिर करती नजर आई थी। बाद में उसने भारतीय सेना से माफी भी मांगी। 
इला कहती हैं, वह देखकर मुझे बहुत शर्म आई...बहुत गुस्सा आया। हमारे समाज में हर किस्म की जिम्मेदारी निभानी है। बराबरी का मतलब ये नहीं है कि आप कुछ भी बोल दो और किसी को भी बोल दो।'

'जो लड़कियां शोषित हो रही हैं, उनके लिए हमें आवाज उठानी है'
लेकिन इला यह भी मानती हैं कि इसका मतलब यह नहीं कि महिलाएं अपने साथ होने वाले गलत व्यवहार पर चुप रहें। 'तुम्हारे साथ अपने प्रोफेशन में कोई गलत कर रहा है तो तुम जरूर बोलो। लड़कियां बोल नहीं पातीं, डर जाती हैं। हमें बहुत बैलेंस्ड और केयरफुल होना है। जो लड़कियां शोषित हो रही हैं, उनके लिए हमें आवाज उठानी है।'

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